तेजिंदर सिंह बग्गा: पहले पंजाब पुलिस ने गिरफ़्तार किया, फिर दिल्ली पुलिस वापस लेकर आई

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दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा को दिल्ली पुलिस कुरुक्षेत्र से वापस लेकर आ गई है. पंजाब पुलिस ने उन्हें उनके दिल्ली स्थित घर से शुक्रवार को गिरफ़्तार किया था. 1 अप्रैल को तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के ख़िलाफ़ पंजाब में प्राथमिकी दर्ज कराई थी जिसके बाद ये गिरफ़्तारी हुई थी.
तेजिंदर पाल सिंह बग्गा द्वारा 'कश्मीर फाइल्स' फिल्म को लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ टिप्पणी करने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता और मोहाली निवासी सनी अहलूवालिया की शिकायत पर ये एफ़आईआर दर्ज की गई थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के नेता तेजिंदर सिंह बग्गा की गिरफ़्तारी के बाद अपहरण का मामला भी दर्ज किया है.
कोर्ट में दिल्ली पुलिस का पक्ष रहे एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने बताया, "तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के पिता ने जनकपुरी पुलिस स्टेशन में एफ़आईआर दर्ज कराई थी कि कुछ लोग उनके बेटे को जबरन उठाकर ले गए हैं. दिल्ली पुलिस ने द्वारका कोर्ट से सर्च वॉरंट जारी कराया और फिर जानकारी मिली कि हरियाणा पुलिस ने पिपली के पास उन्हें रोक लिया है."
"दिल्ली पुलिस बगग्गा को लेकर आ गई है. आगे की कार्रवाई की जाएगी. हमने पंजाब पुलिस से किसी को गिरफ़्तार नहीं किया है. उन्होंने बग्गा को गिरफ़्तार करने से पहले दिल्ली पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी थी. उन्होंने खुद ही बग्गा को हिरासत में ले लिया था. इस मामले में कल सुबह दस बजे अदालत में सुनवाई होगी.

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हरियाणा पुलिस ने रास्ते में रोका था
पंजाब पुलिस बग्गा को उनकी गिरफ़्तारी के बाद पंजाब ला रही थी लेकिन रास्ते में हरियाणा पुलिस ने बग्गा को ले जारी पंजाब पुलिस की टीम को कुरुक्षेत्र में रोक लिया था.
रिपोर्टों के मुताबिक सुबह क़रीब 11.30 बजे जब पंजाब पुलिस का काफ़िला हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पहुंचा तो हरियाणा पुलिस ने उनसे रुकने के लिए कहा. मौके पर कुरुक्षेत्र के एसपी अंशु सिंगला, करनाल के एसपी गंगा राम पूनिया और अंबाल के एसपी जशनदीप सिंह रंधावा मौजूद थे.
वहीं दूसरी तरफ़ दिल्ली पुलिस ने बग्गा के पिता की शिकायत पर पंजाब पुलिस के ख़िलाफ़ उनके अपहरण का मामला दर्ज कर लिया है. दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक दिल्ली के जनकपुरी इलाक़े में बग्गा को गिरफ़्तार करने से पहले पंजाब पुलिस ने अपने केस के बारे में जनकपुरी पुलिस थाने में जानकारी दी थी.
इससे पहले दिल्ली बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर बताया है कि पंजाब पुलिस के 50 जवान शुक्रवार सुबह तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ़्तार करके ले गए हैं.
हालाँकि बग्गा के पिता प्रीतपाल सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया था कि कुल 10-15 पुलिसकर्मी आए थे.
पंजाब पुलिस की तरफ़ से अभी इस बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
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तेजिंदर पाल बग्गा के पिता ने मीडिया से बात करते हुए अपने बेटे को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है.
तेजिंदर पाल बग्गा बीजेपी यूथ विंग के राष्ट्रीय सचिव भी हैं.
दो अप्रैल को उन्होंने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि पंजाब पुलिस के जवान उन्हें गिरफ़्तार करने के लिए उनके घर पहुँचे थे.
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बग्गा ने दावा किया था कि पुलिस ने उन पर दर्ज किसी मुक़दमे के बारें में उन्हें जानकारी नहीं दी है.
क्या है मामला
मोहाली के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में तेजिंदर पाल सिंह बग्गा और अन्य के ख़िलाफ़ धार्मिक वैमनस्य फैलाने और आपराधिक धमकी का मुक़दमा दर्ज किया गया था.
पंजाब में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता डॉ. सनी सिंह अहलूवालिया की शिकायत पर ये एफ़आईआर दर्ज हुई थी.
बग्गा पर आरोप आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी के आरोप भी लगे थे.
बग्गा ने कश्मीर फ़ाइल्स फ़िल्म को लेकर अरविंद केजरीवाल की टिप्पणी की वजह से उन पर तीखी बयानबाज़ी की थी.
हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि पंजाब पुलिस ने इसी मामले में बग्गा को गिरफ़्तार किया है.
बग्गा पर ये भी आरोप है कि वो 30 मार्च को अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदर्शन में शामिल थे और उन्होंने कथित तौर पर टीवी चैनलों से बात करते हुए कहा था कि 'बीजेवाईएम के कार्यकर्ता उन्हें (केजरीवाल) को जीने नहीं देंगे.'
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इस घटना के बाद ही पंजाब में तेजिंदर बग्गा और अन्य के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया था.
बग्गा ने 22 अप्रैल को किए एक ट्वीट में कहा था, "अरविंद केजरीवाल अगर तुम्हें लगता है कि झूठे केस कर के डरा लोगे तो ये तुम्हारी ग़लतफ़हमी है, जितनी ताक़त हैं ना उतने केस दर्ज कर, फिर भी तुम्हारी पोल इसी तरीके से खोलता रहूंगा."
कौन हैं बग्गा

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36 साल के तेजिंदर बग्गा सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय हैं. 2020 में दिल्ली की हरिनगर विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं.
उनके ट्विटर पर 9.18 लाख फॉलोअर हैं. ये कहा जाता है कि ट्विटर पर सक्रियता की वजह से ही उन्हें टिकट मिला था.
जब बीजेपी दिल्ली की पहली लिस्ट में उनका नाम नहीं आया तो भी ट्विटर पर उनके पक्ष में एक मुहिम सी दिखी थी. उन्हें ट्रोल भी किया गया.
ऐसा नहीं है कि बग्गा राजनीति में नए हैं. 2017 में पार्टी ने आधिकारिक तौर पर उन्हें दिल्ली बीजेपी का प्रवक्ता बनाया था.
प्रशांत भूषण पर हमला

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लेकिन पहली बार बग्गा चर्चा में तब आए थे जब उन्होंने आम आदमी पार्टी के पुराने साथी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पर हमला किया था.
प्रशांत भूषण के एक बयान पर उनको आपत्ति थी, जिसमें कश्मीर में जनमत संग्रह की बात कही गई थी.
फ़िलहाल ये मामला कोर्ट में है लेकिन बग्गा के मुताबिक़ ये सवाल उनका पीछा ही नहीं छोड़ता.
इस मुद्दे पर उन्होंने ज़्यादा कुछ बोलने से इनकार करते हुए कहा, "जो कोई देश को तोड़ने की बात करेगा तो उसका वही हाल होगा, जो प्रशांत भूषण का हुआ."
उनके मुताबिक़ किसी पर हमला करने की उनकी इस छवि का चुनाव में कोई असर नहीं होगा. उन्होंने कहा, "कोई आपकी मां को गाली देगा तो आप सुनती रहेंगी क्या? या इस बात का इंतज़ार करेंगी की इस पर कोई क़ानून बने?"
प्रशांत भूषण पर हमले के अलावा भी कई बार बग्गा सुर्खियों में रहे हैं. साल 2014 में जब कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने नरेंद्र मोदी के लिए एक विवादस्पद बयान दिया था, तब बग्गा ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की बैठक के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के लिए चाय की केतली लेकर चाय पिलाने पहुंचे थे.
इस तरह के आयोजनों के लिए वो अक्सर चर्चा में रहते हैं. कभी केजरीवाल के गुमशुदा होने के पोस्टर लगवाने की बात हो या फिर मोदी के प्रधानमंत्री पद के लिए रॉक परफॉर्मेंस की बात हो, नए तरीकों के साथ हेडलाइन में बने रहने का नायाब तरीक़ा वो खोज ही निकालते हैं.
राजनीति से नाता

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तेजिंदर पाल सिंह बग्गा शुरू से ही राजनीति में रुचि लेते रहे हैं. 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में उन्होंने हरिनगर सीट से चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गए.
राजनीति में आने के बारे में बीबीसी से बात करते हुए बग्गा ने कहा था, "मुझे हमेशा से देश के लिए कुछ करने का मन था. मैं चार साल की उम्र से संघ की शाखा में पिता के साथ जाता था. तब मैं दिल्ली के विकासपुरी इलाके में रहता था. 16 साल की उम्र में मैंने कांग्रेस सरकार की सीलिंग की मुहिम का विरोध किया था. 2002 में सीलिंग के विरोध में जेल भरो आंदोलन की शुरुआत भी की थी और तीन दिन तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी बंद रहा था. 23 साल की उम्र में बीजेपी की नेशनल यूथ टीम में आ गया था."
बीजेपी से जुड़ाव और अपने राजनीतिक सफ़र पर रोशनी डालते हुए तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बताया था, "सबसे पहले बीजेपी यूथ विंग में मैं मंडल से ज़िला और फिर स्टेट लेवल टीम में आया. हरिनगर विधानसभा सीट से टिकट मिलना बीस साल से राजनीति में पैर जमाने की कोशिशों का ही नतीजा है."
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