उत्तर प्रदेश: धर्मांतरण मामले में 26 लोग गिरफ़्तार, सभी को ज़मानत, क्या है पूरा मामला

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- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर ज़िले में बीते गुरुवार को विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इवेंजलिकल चर्च ऑफ़ इंडिया पर ग़ैरकानूनी रूप से धर्मांतरण करने का आरोप लगाकर चर्च का घेर लिया था, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने 26 लोगों को गिरफ़्तार किया था.
इस मामले में फतेहपुर पुलिस के डीएसपी सिटी दिनेश मिश्र ने मीडिया को दिए अपने बयान में कहा था, "धर्मान्तरण के मामले 15 अप्रैल को थाना कोतवाली में दर्ज शिकायत के बाद विजय कुमार सैमसन सहित 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया."
हालांकि, अब के कुछ देर पहले डीएसपी दिनेश मिश्रा ने बीबीसी से इस बात की पुष्टि की है कि गिरफ़्तार किये गए 26 लोगों में से सभी को ज़मानत मिल गई है. इनमें से 9 लोगों ने कोर्ट में पहले से ज़मानत की अर्ज़ी दी थी.

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क्या है पूरा मामला?
इस घटना से जुड़े वीडियो से जाहिर होता है कि चर्च को वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने घेरा हुआ है. वीडियो में वे "बजरंग दल ज़िंदाबाद" और "जय श्री राम" के नारे लगाते दिख रहे हैं. वहीं पुलिस महिलाओं और बच्चों को अपनी गाड़ियों में चर्च से ले जाती हुई दिख रही है.
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शख्स हिमांशु दीक्षित खुद को वीएचपी से संबंधित बता रहे हैं. उनका दावा है कि चर्च के अंदर धर्मांतरण की प्रक्रिया चल रही थी और उसकी सूचना उन्हें स्थानीय लोगों से मिली, जिसकी जानकारी उन्होंने स्थानीय प्रशासन को दी. उनका यह भी आरोप है कि चर्च के पादरी ने यह स्वीकार किया है कि घेराव के समय चर्च में 70 से 80 लोग थे जिनमे कुछ लोग 'दूसरे समुदाय' के भी थे.
मीडिया से बात करते हुए हिमांशु दीक्षित ने चर्च में इतने लोगों की मौजूदगी पर सवाल उठाया. हिमांशु दीक्षित ने यह भी आरोप लगाया कि चर्च का यह ऐसा पांचवा प्रकरण है. उनका दावा है कि "फतेहपुर के चर्चों में हिंदुओं को लालच देकर ग़ैरक़ानूनी धर्मांतरण कराया जा रहा है और इसके ख़िलाफ़ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है."
उनका कहना है कि अगर कार्रवाई होती तो इस तरह की घटना नहीं होती.
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क्या कहती है मामले से जुड़ी एफ़आईआर?
इस मामले में स्थानीय पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की है जिसमें धर्म के आधार पर लोगों के बीच में दुश्मनी और घृणा पैदा करने का आरोप है.
एफ़आईआर में धर्मान्तरण के क़ानून से जुड़ी धाराएं भी शामिल की गयी थीं. लेकिन पुलिस के मुताबिक़, कोर्ट ने इन धाराओं को ख़ारिज कर दिया क्योंकि धर्मान्तरित किए जा रहे किसी शख़्स या उनके परिजन मामले में शिकायतकर्ता नहीं थे.
इस एफ़आईआर में 35 लोगों को नामजद किया गया है. साथ ही 20 अज्ञात लोगों का ज़िक्र भी है. इन पर आरोप लगाया गया है कि चर्च में वे लगभग 90 हिन्दुओं का धर्मान्तरण करा रहे थे.
वीएचपी का यह भी दावा था कि चर्च के पादरी विजय मसीह ने प्रशासन से यह बात कबूली है कि वो छल-कपट से और डरा-धमका कर हिन्दुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित कर उनके दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ कर उनका नाम परिवर्तित कर रहे थे. हालांकि इसकी अब तक पुष्टि नही की जा सकी है.
वीएचपी ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह सब 34 दिनों से चल रहा था और धर्म परिवर्तन 40 दिनों में पूरा हो जाता.
वीएचपी का ये भी कहना है कि लगभग 90 हिन्दुओं को प्रशासन के पहुंचने के पहले पीछे के दरवाज़े से चुपचाप निकाल दिया.
यह भी आरोप है कि मिशन हॉस्पिटल के मरीज़ों का भी धर्मान्तरण किया जाता है और अस्पताल के कर्मचारी भी इस काम में अहम भूमिका निभाते हैं.

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क्या कहना है फतेहपुर पुलिस का?
इस मामले में फतेहपुर पुलिस के डीएसपी सिटी दिनेश मिश्र ने एक बयान में कहा, "धर्मान्तरण के मामले 15 अप्रैल को थाना कोतवाली में पंजीकृत किये गए अभियोग में वैधानिक कार्रवाई करते हुए, विजय कुमार सैमसन सहित 26 लोगों को गिरफ़्तार कर जेल भेजा जा रहा है."
बाद में डीएसपी दिनेश मिश्रा ने बीबीसी से इसकी पुष्टि की कि गिरफ़्तार किये गए 26 लोगों में से 9 लोगों को ज़मानत मिल चुकी है. बीबीसी ने उनसे जानना चाहा कि क्या धर्मान्तरित किये जा रहे 90 लोग चर्च में पीछे से भाग निकले तो दिनेश मिश्रा का कहना था कि "अभी ऐसा नहीं पाया गया है."
पुलिस के मुताबिक़ उन्हें धर्मान्तरण के सबूत मिले हैं लेकिन मामले की जांच जारी है.
डीएसपी दिनेश मिश्रा का कहना है, "चर्च के पादरी ने बताया कि ईस्टर के पहले हमारा 40 दिन का कार्यक्रम होता है. जिस दिन घटना हुई उस दिन चर्च में उनका कार्यक्रम था. कुछ लोगों को शक़ हुआ कि इस कार्यक्रम में लोगों का ब्रेनवाश कर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. उनका अपना 40 दिन का पर्सनल प्रोग्राम था. अभी इसकी जांच चल रही है और सबूत इकट्ठे किये जा रहे हैं."
क्या पुलिस को ब्रेनवाश करने के साक्ष्य मिले हैं- इस सवाल के उत्तर में डीएसपी दिनेश मिश्रा का कहना हैं, "जी मिले हैं. कुछ लोग ऐसे हैं जो वहां आते-जाते थे."
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क्या है चर्च के पादरी का कहना?
पुलिस थाने में मीडिया ने चर्च के पादरी विजय मसीह से पूछा कि क्या वो चर्च में धर्मान्तरण कर रहे थे, इस पर उन्होंने कहा, "हर धर्म में पूजा की जाती है. हमारे यहाँ 40 दिन का उपवास चलता है. इसलिए उपवास प्रार्थना का आयोजन किया गया था, न कि धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था."
बीबीसी ने ज़मानत पर रिहा किये गए 9 लोगों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.
2020 में योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम पारित किया था जिसमें धर्मान्तरण के ख़िलाफ़ सख़्ती से पेश आने के कई प्रावधान थे.
योगी सरकार का धर्मान्तरण का क़ानून 'लव जिहाद' के मामलों पर भी लागू होता है. 2022 के घोषणापत्र में भाजपा ने लिखा था कि वो 'लव जिहाद' के मामलों में कम से कम दस सालों की सज़ा और एक लाख के जुर्माने का प्रावधान करेंगे.
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