देवघर का त्रिकुट रोपवे हादसा: बचाव अभियान ख़त्म, पर हुआ क्या, किसकी चूक?

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- Author, स्नेहा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
झारखंड के देवघर ज़िले में त्रिकुट पहाड़ पर हुए रोपवे हादसे के बाद फँसे पर्यटकों को 46 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद सुरक्षित निकाल लिया गया है. हालाँकि बचाव अभियान के दौरान दो लोगों की मृत्यु हो गई. दुर्घटना के दिन भी टक्कर में एक महिला की मौत हुई थी.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक ट्वीट कर बताया है कि इस घटना में कुल 48 लोग फंसे थे, जिनमें से 46 लोगों को बचा लिया गया और दो लोगों की मौत हो गई.
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हादसा कैसे हुआ
त्रिकुट पहाड़ देवघर का एक आकर्षक पर्यटक और तीर्थस्थल है. वहाँ रोपवे से लोग एक ऊँची पहाड़ी पर जाते हैं.
गत रविवार को रामनवमी के दिन शाम लगभग साढ़े चार बजे वहाँ हादसा हो गया.
देवघर के पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र जाट ने बीबीसी को बताया कि त्रिकुट पर्वत रोपवे की तार हुक से उतर गई, जिससे रोपवे की ट्रॉलियां नीचे की ओर झुक गई. इनमें से नीचे की दो ट्रॉलियां पत्थर से टकरा गईं, और एक महिला की मौत हो गई.

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बचाव अभियान
इसके बाद स्थानीय प्रशासन, आईटीबीपी और भारतीय वायु सेना की मदद से बचाव अभियान शुरू हुआ जो कि मंगलवार दोपहर समाप्त हुआ. हालाँकि, शुरुआत में ज़मीन के करीब वाली ट्रॉलियों से लोगों को निकालने में स्थानीय लोगों ने काफी मदद की. फंसे तीर्थयात्रियों को निकालने का बेहतर विकल्प एयरलिफ्ट ही था.
वायुसेना ने कहा है कि यह बहुत चुनौतीपूर्ण अभियान था और सेना ने 10 केबल कार से 35 यात्रियों को बेहत कठिन परिस्थितियों में निकाला. इस अभियान में एमआई 17 वी5 और चीता हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया. गरूड़ कमांडर भी शामिल थे.

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वहीं प्रभात ख़बर अख़बार के स्थानीय पत्रकार कमल किशोर ने बताया कि रोपवे की बनावट कुछ ऐसी है कि यह ऊपर जाकर 80 डिग्री पर मुड़ती है. एयरलिफ्ट में ख़तरा यह था कि कहीं हेलिकॉप्टर का ब्लेड वायर के संपर्क में न आए. अधिकारियों के हवाले से वो कहते हैं कि ऐसे में नीचे से ऑपरेशन चलाना मुश्किल था.
बचाव अभियान के दौरान दो लोगों की मौत
त्रिकुट रोपवे के बचाव अभियान के दूसरे दिन, सोमवार को एयरलिफ्ट के दौरान हेलिकॉप्टर तक पहुँचने से ठीक पहले एक व्यक्ति की नीचे गिरने से मौत हो गई.
मंगलवार को भी एक महिला की बचाव अभियान के दौरान गिरने से मौत हो गई.
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किसकी चूक?
हादसे के बाद शुरुआत ख़बरों में यह आशंका जताई जा रही थी कि भीड़भाड़ की वजह से भी यह हादसा हुआ हो सकता है लेकिन इससे राज्य के पर्यटन मंत्री हफीजुल हसन ने इनकार किया है.
उन्होंने बीबीसी से कहा,"ट्रॉली में ज़रूरत से ज्यादा संख्या में लोग सवार नहीं थे. जितने आदमी होने चाहिए उससे भी कम ही संख्या में लोग थे."
गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे हादसे के बाद घटनास्थल पर मौजूद रहे और उन्होंने बचाव कार्य का जायज़ा लिया.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि इस हादसे की ज़िम्मेदारी झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर आती है.

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निशिकांत दुबे ने कहा, '' ट्रॉली में ओवरलोडिंग की बात तो सामने नहीं आई है लेकिन रखरखाव में निश्चित तौर पर चूक हुई है. राज्य सरकार इस मामले में यह कहकर नहीं बच सकती है कि इसका संचालन कॉन्ट्रैक्ट वाली कंपनी करती है. इसमें कोई संशय नहीं होना चाहिए कि यह रोपवे झारखंड सरकार की है.''
वहीं राज्य के पर्यटन मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए टीम गठित होगी. दामोदर कंपनी इसका संचालन कर रही थी. जांच में रोपवे क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे.
उन्होंने बताया कि अभी रोपवे का संचालन नहीं होगा और जांच के बाद ही पता लग पाएगा कि क्या चूक हुई.
इस बीच झारखंड उच्च न्यायालय ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं. अदालत 26 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करेगी. उसने इससे पहले राज्य सरकार को एफ़िडेविट के जरिए विस्तृत जांच रिपोर्ट दायर करने को कहा है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी देवघर रोपवे हादसे पर मंगलवार को झारखंड सरकार को एक पत्र लिखा है. गृह सचिव अजय भल्ला ने झारखंड के मुख्य सचिव को लिखी इस चिट्ठी में कहा है कि 10 अप्रैल को त्रिकुट रोपवे दुर्घटना में 18 ट्रॉलियाँ और उनमें बैठे 59 लोग फँस गए.
उन्होंने लिखा है कि बचाव अभियान के बाद लोगों को बचा लिया गया मगर तीन लोगों की मौत हो गई.
केंद्रीय गृह सचिव ने झारखंड के मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि वो प्रदेश में सभी रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा करवाएँ और ये सुनिश्चित करवाएँ कि उनके संचालन और मेन्टेनेंस की मानक प्रक्रिया और आकस्मिक योजना तैयार रहे और सुरक्षा प्रबंधों की ऑडिटिंग होती रहे.
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पहले भी हुई है तकनीकी ख़राबी
स्थानीय पत्रकार कमल किशोर बताते हैं कि 2009 में उद्घाटन के दिन ही रोपवे की ट्रॉली चार घंटे तक हवा में अटक गई थी. उस समय श्रावणी मेला चल रहा था. करीब 80 पर्यटक इसमें फंस गए थे.
वो बताते हैं कि इसके बाद 2014 में भी डेढ़ घंटे तक ट्रॉली हवा में लटकी रही. इसमें सवार पर्यटकों ने नीचे उतरने के बाद टिकट काउंटर पर हंगामा भी मचाया था.
इस रोपवे का संचालन दामोदर रोपवे इंफ्रा लिमिटेड (डीआरआईएल) करती है. त्रिकुट रोपवे के साइट इंचार्ज विनीत सिन्हा की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि वह इस घटना से स्तब्ध हैं और यात्रियों और उनके परिवार के सदस्यों के साथ खड़े हैं.
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