योगी मंत्रिमंडल: 2024 लोकसभा चुनाव के लिए जातीय समीकरण साधने की कोशिश है?

योगी आदित्यनाथ

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    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मंत्रिपरिषद को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में शपथ दिलाई गई. केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया है. योगी मंत्रिपरिषद में 52 लोगों को शपथ दिलाई गई है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिपरिषद में दो उप-मुख्यमंत्रियों, 16 कैबिनेट मंत्रियों, 14 राज्य मंत्रियों और 20 राज्य मंत्रियों को शामिल किया गया है.

योगी मंत्रिपरिषद ने ओबीसी समाज का खास ध्यान रखते हुए दलित, ब्राह्मण, राजपूत, बनिया, भूमिहार, कायस्थ, सिख और मुस्लिम समाज के नेता को भी जगह दी है. मंत्रिपरिषद में कुर्मी समाज को खासतौर पर तरजीह दी गई है.

लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी के मुताबिक मंत्रिपरिषद में क़रीब 20 ओबीसी, 9 दलित, 7 ब्राह्मण, 6 राजपूत, 4 वैश्य, 2 भूमिहार, 1 कायस्थ, 1 सिख और 1 मुस्लिम समाज के नेता को जगह दी गई है.

योगी मंत्रिमंडल

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दिनेश शर्मा का टिकट क्यों कटा

मंत्रिमंडल बनाते हुए कुछ चौंकाने वाले फैसले भी लिए गए हैं. डिप्टी सीएम और उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण चेहरे के रूप में दिनेश शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है.

बीबीसी से बातचीत में लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी बताते हैं, ''दिनेश शर्मा और श्रीकांत शर्मा की शिनाख्त एक मज़बूत ब्राह्मण नेता की नहीं है. ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी सक्रियता भी काफी कम रही है. 'नॉन परफॉर्मिंग' भी एक बड़ा कारण हो सकता है जिसके कारण इन्हें शामिल नहीं किया गया है''.

दिनेश शर्मा की जगह ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाया गया है. खास बात है कि ब्राह्मण चेहरे की जगह ब्राह्मण चेहरे को लाया गया है. राजनीति के जानकार इसके पीछे ब्रजेश पाठक की राजनीति करने की शैली को वजह मानते हैं.

बृजेश पाठक

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इमेज कैप्शन, ब्रजेश पाठक योगी मंत्रिमंडल में दूसरे डिप्टी सीएम होंगे

ब्रजेश पाठक को कैसे मिला डिप्टी सीएम का पद

बीबीसी से बातचीत में लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ल बताते हैं, ''आज के समय में सुरक्षात्मक राजनीति शैली की जगह नहीं है. अब वो समय चला गया है कि आप मर्यादा का पालन करते हुए राजनीति करें. इसी आक्रामक राजनीति के दम पर ब्रजेश पाठक ने अपनी जगह बनाई है. इसके साथ ब्रजेश पाठक ब्राह्मणों के एक बड़े नेता हैं और पार्टी से लेकर संघ तक उन पर भरोसा करता है''

ना सिर्फ ब्राह्मण चेहरे के रूप में दिनेश शर्मा का टिकट कटा है बल्कि श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थ नाथ सिंह को भी जगह नहीं दी गई है. पहली योगी सरकार में इन दोनों नेताओं को बड़े मंत्रालय दिए गए थे. ये नेता यूपी सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता के तौर पर काम कर रहे थे. कहा जाता था कि इन्हें केंद्रीय नेतृत्व का साथ मिला हुआ है. बावजूद इसके इन्हें इस बार के योगी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है.

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत का मानना है, ''जब इस तरह के लोगों का नाम हटाकर नए लोगों को लाया जाता है तो निश्चित रूप से बदलाव का संकेत मिलता है. ये सारी कवायद क्षेत्रीय, जातीय संतुलन बनाने के लिए की गई है. जिसका इस्तेमाल भाजपा 2024 लोकसभा चुनाव में करना चाहती है.''

दिनेश शर्मा बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात के प्रभारी रहे हैं. सिद्धार्थनाथ सिंह, श्रीकांत शर्मा बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव रहे हैं और वहीं से यूपी की राजनीति में उतारे गए थे. राजनीति के जानकारों का मानना है कि दिनेश शर्मा, श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह जैसे नेताओं को संगठन में फिर से नई ज़िम्मेदारी दी जाएगी.

स्वतंत्र देव सिंह

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इमेज कैप्शन, स्वतंत्र देव सिंह ने भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली है

कुर्मी समाज को साधने की कोशिश

नए मंत्रिमंडल के ज़रिए कुर्मी समाज को साधने की कोशिश की गई है. मंत्रिमंडल में तीन कुर्मी चेहरों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. जिसमें राकेश सचान, स्वतंत्र देव सिंह और अपना दल के आशीष पटेल शामिल हैं.

बीबीसी से बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी कहते हैं, ''2022 के विधानसभा चुनाव में गैर यादव ओबीसी में अकेली कुर्मी जाति ऐसी है जो भाजपा से छिटक रही थी इसलिए इस जाति से तीन कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं. राकेश सचान वो नेता हैं जिन्होंने जीवन भर समाजवादी पार्टी की राजनीति की, बीजेपी में एकदम नए हैं बावजूद इसके उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया. 2024 लोकसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने इन चेहरों की मदद से कुर्मी समाज के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है.''

कुर्मी समाज को मंत्रिमंडल में तरजीह देने पर वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ल भी हेमंत तिवारी की बात से इत्तेफाक रखते हैं. वो कहते हैं, ''पार्टी हाईकमान को ये महसूस हो रहा था कि कुर्मी समाज नाराज़ है और 2024 के चुनाव में नुकसान हो सकता है इसलिए ये कोशिश की गई है.

बेबी रानी मौर्य

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इमेज कैप्शन, पूर्व गवर्नर बेबी रानी मौर्य को कैबिनेट मंत्री पद दिया गया है

दलित समाज पर नज़र

आगरा ग्रामीण क्षेत्र से विधायक बेबी रानी मौर्य को भाजपा ने मंत्री पद की शपथ दिलाकर दलित और महिला दोनों को एक साथ साधने की कोशिश की गई है.

वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ल बताते हैं, ''उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा को मायावती का अच्छा खासा वोट बैंक मिला है. इसका खास ध्यान रखते हुए मंत्रिमंडल में 9 दलित चेहरों को शामिल किया गया है और बेबी रानी मौर्य जाटव समाज से हैं उनके ज़रिए समाज को अपने साथ लाने की कोशिश की गई है.

बेबी रानी मौर्य उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल और आगरा की महापौर रह चुकी हैं. 2021 में उन्होंने कार्यकाल के समाप्ति से पहले अपने पद से त्यागपत्र दे दिया. उसी दौरान बेबी रानी के सक्रिय राजनीति में आने की अटकलें लगनी शुरू हो गई थीं. इसके बाद भाजपा ने उन्हें संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया और फिर विधानसभा चुनाव में उन्हें मौका दिया, जिसमें वह विजयी रहीं.

बेबी रानी मौर्य के अलावा एक बड़े दलित चेहरे के रूप में असीम अरुण को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. असीम अरुण पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं.

दलित खटीक समुदाय से आने वाले दिनेश खटीक, बुंदेलखंड का दलित चेहरा मन्नू कोरी और देवरिया के सलेमपुर से पहली बार जीतीं विजय लक्ष्मी गौतम को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है.

एसटी समाज से संजीव गोंड को राज्यमंत्री बनाया गया है.

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी का मानना है कि बीजेपी मिज़ाज की राजनीति कर रही है. बीबीसी से बातचीत में पत्रकार हेमंत तिवारी कहते हैं, ''भाजपा सारी तैयारी जीतने के लिए करती है. जीतने के लिए जिस भी चीज़ की ज़रूरत होती है उस पर वर्क आउट करती है.''

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