पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने क्यों की भारत की तारीफ़- प्रेस रिव्यू

इमरान ख़ान

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने रविवार को सार्वजनिक तौर पर भारत की विदेश नीति की तारीफ़ की. उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश की विदेश नीति उसके लोगों के हित के लिए है. अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है. आज प्रेस रिव्यू में सबसे पहले यही ख़बर पढ़िए.

इमरान ख़ान सरकार अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है. इस बीच इमरान ख़ान ने पाकिस्तानी सेना और विपक्षी पार्टियों पर जमकर निशाना साधा है. पीएम इमरान ख़ान का ये बयान ऐसे समय में आया है जब उनकी साढ़े तीन साल पुरानी सरकार के ख़िलाफ़ 25 मार्च को संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है.

इमरान ख़ान ने कहा कि तालिबान के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक सैन्य अड्डा बनाने के अमेरिकी अनुरोध को अस्वीकार करने के लिए विपक्ष ने उनकी आलोचना की. उन्होंने ये भी कहा वो उन बाग़ियों को माफ़ कर देंगे जिन्होंने हाल के हफ्तों में पार्टी छोड़ दी है.

इमरान ख़ान ने कहा, "मैं आज हिंदुस्तान को दाद देता हूं, उन्होंने हमेशा आज़ाद विदेश नीति रखी. क्वॉड के अंदर अमेरिका के साथ अलायंस है और अपने आप को वो न्यूट्रल (तटस्थ) कहता है. रूस से तेल मंगवा रहा है, जबकि प्रतिबंध लगे हुए हैं, क्योंकि हिंदुस्तान की पॉलिसी अपने लोगों के लिए है."

इमरान ख़ान ने कहा, "मुझसे अमेरिका को पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बनाने देने को कहा गया था. मैं 25 सालों से किसी के आगे नहीं झुका और न ही झुकूंगा." इस दौरान उन्होंने जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के कार्यकाल में अफ़गानिस्तान में संघर्ष में मारे गए 80 हज़ार लोगों की याद दिलाई और इशारों में अमेरिका के लिए कहा, "हम शांति में आपके साथ हैं लेकिन युद्ध में नहीं."

पाकिस्तान में इसी माह विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया और साथ ही उन्होंने संसद का सत्र बुलाने की भी मांग की है. अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का फ़ैसला विपक्षी पार्टियों के साझा सम्मेलन में लिया गया था.

इस सिलसिले में विपक्षी नेताओं शहबाज़ शरीफ़, आसिफ़ अली ज़रदारी और जेयूआईएफ़ के प्रमुख और पीडीएम के अध्यक्ष मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने इस्लामाबाद में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. इसमें उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को लेकर नेशनल असेंबली यानी संसद के 172 से अधिक सदस्यों का समर्थन उन्हें हासिल है.

बिलावल भुट्टो

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इमरान ख़ान के पास कितने वोट?

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली या संसद की वेबसाइट के मुताबिक़ सत्तारूढ़ पार्टी पीटीआई के पास सहयोगी दलों के साथ 178 सदस्यों का समर्थन हासिल है.

इन सदस्यों में सत्तारूढ़ पीटीआई के 155 सदस्य, एमक्यूएम के सात, बीएपी के पाँच, मुस्लिम लीग (क्यू) के पाँच सदस्य, जीडीए के तीन और अवामी मुस्लिम लीग के एक सदस्य गठबंधन सरकार का हिस्सा हैं.

दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन के कुल सदस्यों की संख्या 162 है. इसमें विपक्षी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी मुस्लिम लीग-एन के सदस्यों की संख्या 84, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के 57 सदस्य, मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल के 15, बीएनपी के चार जबकि अवामी नेशनल पार्टी के एक सदस्य शामिल हैं. इसके अलावा दो स्वतंत्र सांसद भी इस विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं.

अगर संख्या बल को देखें तो विपक्षी गठबंधन को सिर्फ़ 10 और सदस्यों के समर्थन की ज़रूरत है. जमात-ए-इस्लामी जिनके पास संसद की एक सीट है, उसने फ़िलहाल किसी का साथ देने का एलान नहीं किया है.

हिजाब विवाद पर फैसला देने वाले जजों को 'Y' श्रेणी की सुरक्षा

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हिजाब पर फैसला सुनाने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश समेत तीन जजों की जान को ख़तरा होने के मद्देनज़र राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि राज्य सरकार ने तीनों न्यायाधीशों को 'वाई' श्रेणी की सुरक्षा देने का फ़ैसला किया है.

अंग्रेज़ी अख़बार द इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार सीएम बोम्मई ने कहा कि उनकी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी को मामले की जांच करने और तमिलनाडु में गिरफ़्तार किए गए युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए कहा है.

मुख्य न्यायाधीश रितुराज अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्णा एस. दीक्षित और न्यायमूर्ति जे. एम. क़ाज़ी की तीन सदस्यीय पीठ ने 15 मार्च को कुछ मुस्लिम छात्राओं की ओर से दायर याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया था. इस याचिका में कक्षा के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति मांगी गई थी.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार तमिलनाडु पुलिस ने न्यायाधीशों को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देने के आरोप में शनिवार को मदुरै में तमिलनाडु तौहीद जमात (टीएनटीजे) नामक संगठन के एक पदाधिकारी को गिरफ़्तार किया है.

सीएम बोम्मई ने कहा, "कुछ ताक़तें लोगों को व्यवस्था के ख़िलाफ़ उकसाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन ऐसी ताक़तों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."

कोविशील्ड की दो ख़ुराक़ों के बीच फिर घट सकता है अंतराल, समिति ने भेजा सुझाव

कोविशील्ड

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कोरोना टीका कोविशील्ड की दो ख़ुराक़ों के बीच अंतराल एक बार फिर घट सकता है. अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, टीकाकरण पर बनाई गई राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) की ओर से इस गैप को घटाकर 8 से 16 सप्ताह करने की सिफ़ारिश की गई है.

सरकार ने बीते साल मई माह में कोविशील्ड वैक्सीन की दोनों डोज़ के बीच अंतराल को बढ़ाकर 12 से 16 सप्ताह कर दिया था. टीकाकरण की शुरुआत में ये अंतराल 4 से 6 सप्ताह था जिसे बाद में बढ़ाकर 6-8 सप्ताह और फिर 12 से 16 हफ्ते किया गया था. एनटीएजीआई ने अब इसे एक बार फिर से 8-16 सप्ताह करने की सिफ़ारिश की है.

हालांकि, एनटीएजीआई ने अभी तक भारत बायोटेक के कोवैक्सीन की ख़ुराक़ देने की अवधि में कोई बदलाव का सुझाव नहीं दिया है जिसकी दूसरी ख़ुराक़ पहली ख़ुराक़ के 28 दिन बाद दी जाती है.

ख़बर के मुताबिक़, एनटीएजीआई की ये सिफ़ारिश वैश्विक स्तर पर जुटाए वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित है. एनटीएजीआई ने कहा है कि अगर कोविशील्ड की दूसरी ख़ुराक़ आठ सप्ताह बाद दी जाती है तो उससे बनने वाली एंटीबॉडी 12 से 16 सप्ताह के बीच दी जाने वाली ख़ुराक़ जैसी ही पाई गई है.

अख़बार ने स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से लिखा, "अभी सिर्फ़ सिफ़ारिश की गई है, इसे स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वीकार नहीं किया है. मंत्रालय इसपर विचार कर रहा है."

यूक्रेन के बहाने हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर चीन ने चेताया

चीन हिंद प्रशांत क्षेत्र

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क्वॉड जैसे गठबंधनों पर इशारों में निशाना साधते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका की हिंद-प्रशांत नीति यूरोप में पूर्व की तरफ़ विस्तार की नेटो की नीति जितनी 'ख़तरनाक' है, जिसकी वजह से यूक्रेन में रूस का विशेष सैन्य अभियान शुरू हुआ है.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, चीन के उप विदेश मंत्री ली युचेंग ने कहा, "यूक्रेन संकट एशिया-प्रशांत की स्थिति पर ध्यान देने के लिए एक आईने जैसा है. हम पूछ सकते हैं कि एशिया-प्रशांत में इस तरह के संकट को होने से कैसे रोका जाए?"

उन्होंने कहा, "सोवियत संघ के विघटन के बाद उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को भी वारसा संधि के साथ इतिहास के पन्नों में समेट दिया जाना चाहिए था."

ली साल 2014 से 2016 तक मोदी सरकार के शुरुआती दो सालों के दौरान भारत में चीन के राजदूत रह चुके हैं.

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