महिला दिवस: 'तुमसे न हो पाएगा' औरतों की 'माली हालत' का सबसे बड़ा रोड़ा

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    • Author, शालिनी कुमारी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

करीब साल भर पहले एक ई-कॉमर्स कंपनी ने अपने विज्ञापन के लिए अलग-अलग उम्र की 30 महिलाओं और पुरुषों के साथ एक सामाजिक प्रयोग किया जिसमें उनसे कई तरह के सवाल पूछे गए.

इस प्रयोग में, अगर जवाब 'हाँ' होता तो वो एक कदम आगे बढ़ाते और अगर 'ना' होता तो एक कदम पीछे जाते.

जब तक सवाल साइकिल चलाने, खेल खेलने, संगीत, कपड़े प्रेस करने या फिर चाय-नाश्ता बनाने से जुड़े थे, तब तक महिलाएं पुरुषों के मुकाबले में बराबरी पर थीं.

लेकिन जब बिल पेमेंट, सैलरी ब्रेकअप, बीमा पॉलिसी, बजट, निवेश, म्यूच्यूअल फंड, इनकम टैक्स से जुड़े सवाल पूछे गए, तो महिलाओं और पुरुषों के बीच का फ़ासला इतना बढ़ गया कि अंत में केवल पुरुष ही अगली कतार में खड़े नज़र आए.

आइए आपको बताते हैं कि आर्थिक मसलों पर भारत की महिलाओं की क्या हालत है और शेयर बाज़ार में निवेश से पहले किन बातों का महिलाएं ध्यान रख सकती हैं?

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आर्थिक मसलों पर महिलाएं कहाँ खड़ी हैं?

भारतीय शेयर बाज़ार में बाकी देशों की तुलना में पुरुषों और महिलाओं के बीच फ़ासला साफ़ नज़र आएगा. ब्रोकरचूज़र के आंकड़ों में ये पाया गया कि भारत में हर 100 निवेशकों में से सिर्फ़ 21 निवेशक ही महिलाएं हैं, यानी उनकी तादाद 21 प्रतिशत ही है.

इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए स्वप्नजा शर्मा भी शेयर बाज़ार और निवेश से जुड़े वीडियो बनाती हैं. वो खुद एक निवेशक, ट्रेडर और ट्रेनर हैं. स्वप्नजा ये समझाती हैं कि 21% का ये आंकड़ा और भी कम हो सकता है क्योंकि इस आंकड़े में वो महिलाएं भी हैं जो खुद अपना अकाउंट नहीं चलाती.

24 वर्षीय आएशा फ़ातिमा इन महिला निवेशकों की सूची में शामिल होना चाहती हैं. 2016 में जब उन्हें एक स्कॉलरशिप में 30 हज़ार रूपए मिले, तब से वो इन पैसों को निवेश करना चाहती हैं और इन्हें बढ़ाना चाहती हैं.

आएशा ने बीबीसी से कहा, "मेरे हिसाब से गोल्ड जैसे निवेश के विकल्पों में आपका पैसा उतना बढ़ नहीं पाता, लेकिन अगर आप शेयर बाज़ार में निवेश करें तो आपका पैसा कही ज़्यादा बढ़ सकता है."

आएशा पेशे से पत्रकार हैं और उन्होंने कॉमर्स की पढ़ाई की हैं. शेयर बाज़ार और उससे जुड़ी बातों की भी वो जानकारी रखतीं है लेकिन वो ये कहती हैं कि जब शेयर बाज़ार में निवेश करने की बात आती है, तो उन्हें थोड़ी हिचकिचाहट होती हैं.

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निवेश करने से क्यों झिझकती हैं महिलाएँ?

आएशा कहती हैं, "मुझे ये समझ नहीं आता कि शुरू कहाँ से करना हैं और अपने पैसे लगाने से पहले मैं चाहूँगी कि मैं किसी ऐसे इन्सान से बात करुं जिसे शेयर बाज़ार की जानकारी हो और जिनसे मैं पहले अपने कुछ सवालों का जवाब ले पाऊं."

शेयर बाज़ार और फाइनेंस समझाने के लिए कुछ विशेषज्ञ अब इंटरनेट का इस्तेमाल करके इन विषयों पर जानकारी देते हैं. रचना राणाडे उनमें से एक मशहूर नाम है.

रचना एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और यूट्यूब पर प्रचलित 'फिनफ्लुएंसर' हैं. फिनफ्लुएंसर शब्द फाइनेंस और इन्फ्लुएंसर को जोड़ कर बना हैं यानी वे आर्थिक क्षेत्र में सक्रिय प्रभावशाली व्यक्ति हैं.

महिलाओं और शेयर बाज़ार के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "जब भी औरतें निवेश करना चाहती हैं, वो सोना यानी गोल्ड में करना चाहती हैं क्योंकि उन्हें ये विश्वास हैं कि गोल्ड के दाम बढ़ेंगे लेकिन जब शेयर बाज़ार की बात आती हैं तो उनके अंदर उतना आत्मविश्वास नहीं होता क्योंकि वो मार्केट के अस्थिरता से खुद को अनजान महसूस करती हैं."

मध्य प्रदेश में रहने वाली राजश्री गुप्ता ने हाल ही में ट्रेडिंग की शुरुआत की है. उन्होंने बताया कि घर में बैठे-बैठे उन्हें स्टॉक मार्केट के बारे में फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम से जानकारी मिली और फिर उन्होंने ट्रेडिंग की शुरुआत की.

शेयर बाज़ार के प्रति लोगों की धारणा के बारे में बात करते हुए राजश्री ने बताया, "लोगों को लगता है कि शेयर बाज़ार सट्टा बाज़ार है और एक बार पैसे लगाए तो डूब जाएँगे, इसलिए उन्हें डर लगता हैं."

स्वप्नजा शर्मा

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आर्थिक फैसले में पुरुषों की पूछ

आएशा कहती हैं कि पारंपरिक रूप से "परिवारों में जो भी आर्थिक मामले होते हैं, ज़्यादातर उसका फैसला घर के पुरुष सदस्य ही करते हैं."

उन्होंने बताया, "ऐसा नहीं हैं कि ये समस्या उन परिवारों में नहीं हैं जहाँ औरतें पढ़ी-लिखी हैं और संपन्न हैं. वहां भी आर्थिक मुद्दे पुरुषों के हाथों में ही होते हैं और इसीलिए जब फाइनेंस की बात आती हैं तो औरतें थोड़ा हिचकती हैं."

रचना कहती हैं, "अगर महिलाओं के आस-पास ऐसे लोग होंगे जो 'ये सब तुमसे नहीं होगा' कहने की जगह, उनका समर्थन करें, उनके जो भी सवाल हैं उनका जवाब दें, तो महिलाएं ये सब ज़्यादा बेहतर समझ पाएँगी."

निवेश करने और सिखाने वाली स्वप्नजा शर्मा ने बीबीसी को बताया महिला निवेशकों का आंकड़ा असल में 21 प्रतिशत से कम है.

वे कहती हैं, "कुछ लोग अपने पत्नियों के नाम पर भी निवेश करते है. ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार से उन्हें टैक्स में छूट मिलती है. अकाउंट भले पत्नी या बेटी के नाम पर हो लेकिन फैसला ज़्यादातर पुरुष ही लेते है."

हालांकि कई लोग ऐसे मामलें अपने आस-पास देखते है लेकिन इस मामले से ज़ुड़ा कोई भी आधिकारिक आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है.

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निवेश की जानकारी ज़रूरी

राजश्री बताती हैं कि उनके अनुसार निवेश करना बहुत ज़रूरी हैं. वो कहती हैं, "निवेश के बारे में सीखना महिलाओं के लिए ज़रूरी हो गया हैं क्योंकि औरतों के भी खुद के भविष्य के लिए कुछ सपने होते हैं जिन्हे पूरा करने के लिए निवेश करना होगा"

आएशा के मुताबिक देश में फिनेंशियल लिटरेसी पर ध्यान देना ज़रूरी हैं. उन्होंने कहा, "फिनेंशियल लिटरेसी जैसे विषयों को ग्यारवीं या बारहवीं क्लास में पढ़ाना या ग्रेजुएशन में पढ़ाना बहुत ज़रूरी है."

राजश्री ने ये भी कहा कि शेयर बाज़ार और निवेश के बारे में पढ़ाते वक़्त ये भी समझाना चाहिए कि मार्केट में अच्छा या बुरा क्या है जिससे लोग संभलकर निवेश कर पाएँ और मार्केट को समझ पाएँ.

रचना मानती हैं कि औरतों को हमेशा से ही आर्थिक जानकारी है और वो हमेशा से अपने आमदनी को संभालना जानती हैं.

उन्होंने कहा, "ज़्यादातर महिलाएं सालों से ही घर में होने वाले खर्च संभालती आई हैं. पतियों से घर चलाने के लिए उन्हें जितने भी पैसे मिलते हैं, वो इसे अपनी ज़िम्मेदारी समझती हैं कि उतने पैसों में घर के सारे काम हो जाएँ और पैसे बर्बाद ना हो. लेकिन जब निवेश की बात आती हैं तो पुरुष आगे आ जाते हैं."

रुपये

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कैसे दूर होगा निवेश का डर?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीते दो वर्षों में भारत में शेयर बाज़ार में महिलाओं की संख्या बढ़ी हैं. दो सालों में ये संख्या 16 फीसदी से बढ़कर 24 फीसदी हुई है. लेकिन बाकी देशों के मुकाबले में ये संख्या कम हैं. ब्रोकरचूज़र के अनुसार, महिला निवेशकों की संख्या में, फिलीपींस सबसे आगे हैं. वहाँ हर 100 निवेशकों में 44 निवेशक महिलाएँ हैं.

इस मामले में ये समझना भी ज़रूरी है कि देश में महिलाओं के रोज़गार की भी स्थिति कुछ ऐसी ही हैं. वर्ल्ड बैंक के 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट सिर्फ 18.6 फ़ीसदी है. लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन यानी कामकाजी उम्र की कितनी फ़ीसदी महिलाएं काम कर रही हैं या काम की तलाश में हैं.

स्वप्नजा के पास कुछ सुझाव हैं जिससे भारत में भी औरतें निवेश की शुरुआत कर सकती हैं. उनके अनुसार निवेश या ट्रेड करने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए--

  • 'शेयर बाज़ार में निवेश करने से पहले फंडामेंटल एनालिसिस आना चाहिए.'

फंडामेंटल एनालिसिस का मतलब है कि आप कंपनी का बैलेंस शीट, कैश फ्लो स्टेटमेंट और प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट जैसी चीज़ों को मोटे तौर पर समझ सकें.

  • 'अगर आप ट्रेडिंग करना चाहें, तो ट्रेडिंग से पहले टेक्निकल एनालिसिस सीखें.'

टेक्निकल एनालिसिस में प्राइस मूवमेंट और वॉल्यूम जैसे ट्रेंड्स के विश्लेषण से निवेश का मूल्यांकन होता है और व्यापार के अवसरों की पहचान होती है.

  • 'अगर आपके पास सीखने की इच्छा या समय न हो तो आप म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर सकते है. एक साथ इकठ्ठा पैसा डालने से बेहतर है कि आप इन्हे मंथली एसआईपीज़ में बदलें.'

एसआईपी का मतलब है कि एक म्यूचुअल फंड योजना में आप नियमित रूप से हर महीने या हफ्ते एक निश्चित राशि का निवेश करें.

  • 'पोर्टफ़ोलियो और रिस्क डाइवर्सिफाई करना ज़रूरी है.'

पोर्टफोलियो विविधीकरण में अपने पैसे को आप अलग अलग एसेट क्लासेज़ और सिक्योरिटीज में निवेश करें ताकि जोखिम कम से कम हो.

इन सब में घर के पुरुषों की भूमिका पर भी रोशनी डालते हुए रचना ने कहा, "परिवारवालों को भी महिलाओं का समर्थन करने की ज़रूरत हैं. वो भी कोशिश करें कि अपनी घर की बेटी, बहू, पत्नी को सिखाने के लिए एक छोटी धन राशि दें ताकि वो निवेश की शुरुआत कर सकें."

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