हिजाब पर बढ़ते विवाद के बीच कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को देर शाम बताया कि उच्च न्यायालय के सुझाव पर आगामी सोमवार से हाई स्कूल में पढ़ाई शुरू होगी. कर्नाटक उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ गुरुवार को हिजाब मामले में दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी.
सुनवाई ख़त्म होने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई, गृह मंत्री एवं प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा मंत्री एक उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए जहां स्कूलों को खोलने का फ़ैसला लिया गया.
बोम्मई ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "मुख्य न्यायाधीश ने स्कूल और कॉलेजों में किसी तरह के धार्मिक वस्त्र नहीं पहनने की सलाह दी है और उन्होंने स्कूलों को दोबारा खोलने का निर्देश भी दिया है."

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अंतिम आदेश तक धार्मिक वस्त्रों पर बैन
कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी ने संकेत दिया है कि जब तक अदालत हिजाब पहनने वाली छात्राओं की याचिकाओं पर अंतिम फैसला नहीं देता है तब तक शैक्षणिक संस्थानों को खोलने एवं सभी लोगों को धार्मिक रीति-रिवाज़ अपनाने से रोकने के लिए एक अंतरिम आदेश जारी किया जाएगा.
हालांकि, तीन जजों की इस बेंच ने अदालत में किसी तरह का फ़ैसला नहीं दिया. जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं संजय हेगड़े और देवदत्त कामत ने कोर्ट का ध्यान इस ओर खींचने की कोशिश की कि छात्राओं को हिजाब पहनने की अनुमति नहीं देना आर्टिकल 25 के तहत छात्रों के मूल अधिकारों और उनके धर्म को मानने की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होगा.
कोर्ट ने कहा है कि वह इस मामले में सोमवार दोपहर ढाई बजे से फिर सुनवाई शुरू करेगी, लेकिन गुरुवार देर शाम तक हाई कोर्ट की वेबसाइट पर किसी तरह का आदेश जारी नहीं किया गया.
कर्नाटक सरकार ने भगवा गमछा पहने छात्रों द्वारा हिजाब पहने लड़कियों का विरोध करने और उड्डपी ज़िले से शुरू होकर उत्तरी, मध्य और दक्षिण कर्नाटक में हिंसा फैलने के बाद स्कूल और कॉलेज बंद करने के आदेश दिए थे.

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सरकार ने दी जानकारी
इस बैठक के कुछ देर बाद प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने ट्वीट करके सरकारी फ़ैसले की जानकारी दी.
उन्होंने लिखा है, "कुछ छात्रों द्वारा यूनिफ़ॉर्म से जुड़े नियमों को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई जारी है. और हाई कोर्ट ने कक्षाएं शुरू करने का सुझाव दिया है. इस पृष्ठभूमि में, मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये तय किया गया है कि आगामी 14 फ़रवरी से नौवीं कक्षा में पढ़ाई शुरू की जाएगी. कक्षा नौ और दस की शनिवार को छुट्टी रहेगी."
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बोम्मई ने कहा है कि उन्होंने सभी मंत्रियों, उपायुक्तों, पुलिस कप्तानों और ज़िला पंचायत सीइओ समेत अन्य अधिकारियों की बैठक बुलाई है जिससे ज़मीनी स्थिति को समझा जा सके. और उच्च न्यायालय की ओर से फ़ैसला आने तक क़ानून व्यवस्था कायम रखने के लिए सभी ज़रूरी क़दम उठाए जाएंगे.
मुख्य न्यायाधीश रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा दीक्षित और जस्टिस जैबुन्निस्सा मोहिउद्दीन ख़ाज़ी ने गुरुवार दोपहर उड्डपी गवर्नमेंट पीयू कॉलेज की छात्राओं समेत अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की है.
याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा कक्षा में हिजाब नहीं पहनने से जुड़े फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी है.
जस्टिस कृष्णा दीक्षित द्वारा बीते बुधवार इस मामले को एक बड़ी पीठ को भेजा गया था जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने त्वरित कार्यवाही करते हुए गुरुवार दोपहर से इस मामले की सुनवाई शुरू की.

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वकीलों ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हेगड़े और कामत ने छात्राओं को हिजाब पहनने की अनुमति के रूप में अंतरिम राहत देने की मांग की क्योंकि अगले महीने से परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं.
वकीलों और एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवलगी को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि वह शैक्षणिक संस्थाओं को खोलने के लिए एक अंतरिम आदेश जारी करेंगे, लेकिन इस मामले में अंतिम फ़ैसला आने तक सभी लोगों पर धार्मिक कपड़े पहनने पर रोक रहेगी.
चीफ़ जस्टिस ने कहा, "हम एक आदेश पास करेंगे जिससे शैक्षणिक संस्थाएं शुरू हो सकें, लेकिन जब तक ये मामला लंबित है तब तक ये छात्र और अन्य स्टेक होल्डर किसी भी तरह के धार्मिक वस्त्र या टोपी पहनने को लेकर आग्रह नहीं करेंगे. हम सभी पर रोक लगाएंगे.
हम अमन और शांति चाहते हैं. जब तक ये मामला सुलझ नहीं जाता है, तब तक आप सभी लोगों को ये सभी धार्मिक चीजें (चाहें हिजाब हो या भगवा गमछे हों) पहनने पर ज़ोर नहीं देना चाहिए. हम सभी को इस तरह के क़दम उठाने से रोकेंगे. जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक किसी भी तरह की धार्मिक चीज़ों को पहनना ठीक नहीं रहेगा"
जब पांच में से दो याचिकाकर्ताओं के वकील संजय हेगड़े और देवदत्त कामत ने बताया कि ये उनकी आस्था और मूल अधिकारों के हनन जैसा है.
इस पर मुख्य न्यायाधीश अवस्थी ने कहा, "ये कुछ दिनों की बात है. कृपया सहयोग किया जाए."
मुख्य न्यायाधीश की ओर से टिप्पणी हेगड़े और कामत को सुनने के बाद आई.
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'हिजाब एक आवश्यक इस्लामी परंपरा'
कामत ने कोर्ट का ध्यान इस ओर खींचा कि सरकार द्वारा हिजाब पर प्रतिबंध लगाने वाले आदेश का मूल आधार केरल, बॉम्बे, और मद्रास हाईकोर्ट का आदेश था. जबकि वह उडुपी कॉलेज के ताज़ा घटनाक्रम पर लागू नहीं होता.
उन्होंने विशेष रूप से ध्यान दिलाया कि मद्रास हाई कोर्ट के आदेश में इस्लाम के जानकारों ने कहा था कि पर्दा आवश्यक नहीं था लेकिन सिर को ढकना अनिवार्य था. सिर ढकने वाला कपड़ा एक अहम इस्लामी परंपरा थी.
कामत ने कहा, "उन्हें यूनिफ़ॉर्म के रंग वाला सिर ढकने का कपड़ा पहनने दिया जाए और स्कूल जाने दिया जाए. सरकार ये मामला कॉलेज विकास समितियों पर सौंप कर (पांच फ़रवरी को जारी किए गए आदेश के मुताबिक़) आग से खेल रही है."
इसके साथ ही एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवलगी ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट में याचिकाएं दाख़िल होने के बाद छात्र भगवा गमछे पहने हुए कॉलेजों में दिखाई दिए जिसके बाद सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों को बंद किया है.
उन्होंने कहा, "हम इस माहौल में शैक्षणिक संस्थानों को नहीं खोल सकते. हमें एक अनुकूल माहौल चाहिए. एक राज्य के रूप में हम छात्रों की समस्याओं को लेकर भी काफ़ी चिंतित हैं."
संवैधानिक अधिकारों का मामला
हेगड़े ने ये भी कहा कि संवैधानिक अधिकार राजनेताओं के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते. चाहे वे चुनकर आए हों, या न आए हों या भले ही वे सत्ता में हों.
उन्होंने कहा कि "कॉलेज विकास समितियां शायद इसके व्यापक पहलू को न समझ सकें."
हेगड़े ने ये भी बताया कि संविधान ने दो मूल अधिकार दिए हैं. इनमें से एक अधिकार अंत:करण की स्वतंत्रता है और दूसरा धर्म को मानने, आचरण में लाने और प्रचार करने की स्वतंत्रता का है और सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी आवश्यक धार्मिक आचरण को अनुच्छेद-25 के तहत माना है.
हेगड़े ने कहा, "ये सिर्फ़ एक अहम धार्मिक रीति-रिवाज का मामला नहीं है. ये एक बच्ची के लिए बेहद ज़रूरी उसकी शिक्षा का मामला भी है."
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