गोवा की 'गुलामी' को लेकर पीएम मोदी ने जो कहा, उसमें कितना दम?

इमेज स्रोत, PTI
- Author, दीपक मंडल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में दो दिनों से कांग्रेस पर लगातार हमलावर हैं. सोमवार को लोकसभा के बाद मंगलवार को राज्यसभा में भी उन्होंने कांग्रेस पर ताबड़तोड़ हमले किए. प्रधानमंत्री ने कहा कि पंडित नेहरू की वजह से गोवा को 15 साल ज़्यादा गुलाम रहना पड़ा.
पीएम ने संघीय ढांचे पर राहुल गांधी के बयान का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस क्या वह दिन भूल गई जब ज़रा-ज़रा सी बात पर मुख्यमंत्री हटा दिए जाते थे. इमरजेंसी में क्या हुआ यह सबको पता है. आज कांग्रेस अर्बन नक्सल की तरह हो गई है. अर्बन नक्सल ने बड़ी चालाकी से कांग्रेस में अपनी सोच भर दी है.
लेकिन सवाल ये है कि पीएम मोदी के इन आरोपों में कितना दम है?
'अगर नेहरू ज़िम्मेदार तो पटेल क्यों नहीं? '
वरिष्ठ पत्रकार-लेखक और कांग्रेस मामलों के जानकार रशीद किदवई कहते हैं कि प्रधानमंत्री इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं लेकिन यह प्रशासनिक मामला था. फौजी कार्रवाई का सवाल ही नहीं था क्योंकि एक निश्चिचत समय के बाद गोवा का भारत में विलय होना ही था.
गोवा की आज़ादी में कथित देरी के लिए नेहरू को सीधे ज़िम्मेदार ठहराए जाने के आरोपों को ख़ारिज करते हुए रशीद कहते हैं कि अगर ऐसा है तो सरदार पटेल पर भी उंगली उठनी चाहिए. क्योंकि हैदराबाद, जूनागढ़ या कश्मीर के भारत में विलय का मामला वही देख रहे थे. देशी रियासतों का भारत में विलय उन्हीं की कोशिशों से हुआ. ऐसे में नेहरू पर उंगली उठाएंगे तो सरदार पटेल पर भी उंगली उठानी पड़ेगी.
राहुल गांधी ने बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद हुई बहस के बाद अपने भाषण में देश के संघीय ढांचे के कमज़ोर होने का मामला उठाया था. इसके जवाब में पीएम मोदी ने कहा कि राज्यों और केंद्र के बीच कोई टकराव नहीं है.
'केंद्र-राज्य टकराव बीजेपी राज में भी कम नहीं '
लेकिन किदवई का कहना है कि विपक्ष शासित राज्यों से केंद्र का ज़बरदस्त टकराव है. चाहे वो आर्थिक मामले को लेकर हो या फिर आईएएस,आईपीएस के ट्रांसफर को लेकर या फिर बीएसएफ का इलाका बढ़ाने का मुद्दा .
केरल, पश्चिम बंगाल, आंध्र और तेलंगाना से केंद्र का लगातार टकराव होता रहा है. जीएसटी के सवाल पर ऐसे राज्यों से केंद्र सरकार की भारी तनातनी है.
राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी भी इससे इत्तेफ़ाक रखते हैं. उनका कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य बेहद कमज़ोर हो गए हैं.
वो कहते हैं, '' टैक्स लगाने की काफी ज़्यादा ताकत केंद्र के पास है. राज्यों के पास अब रियल एस्टेट, शराब और पेट्रोलियम जैसी चीजों पर ही टैक्स लगाने का विकल्प बच गया है. आगे उनकी आर्थिक ताकत और कम होगी'' .
'अर्बन नक्सल पीएम का राजनीतिक बयान '
जहां तक कांग्रेस को अर्बन नक्सल जैसी सोच का कहने का सवाल है तो सब जानते हैं कि पांच राज्यों के चुनाव हो रहे हैं. लिहाजा पीएम मोदी को लगातार विपक्षियों पर प्रहार करना है. कांग्रेस चूंकि सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है तो ज़ाहिर है उस पर ज़ोरदार हमला होगा. इसे पीएम के राजनीतिक बयान की तरह देखा जाना चाहिए.
रशीद किदवई का कहना है कि गोवा में चुनाव हैं और पीएम को इसकी कथित गुलामी बढ़ने का मामला उठाना ही था. भले ही मुद्दा बने या ना बन लेकिन पीएम को तो कोशिश करनी ही थी और उन्होंने इसे मुद्दा बनाने की कोशिश की.
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में कहा था कि महामारी में महाराष्ट्र और दिल्ली सरकार ने लोगों को पलायन पर मजबूर किया.
इस पर रशीद किदवई कहते हैं कि अगर ऐसा है तो उन्होंने एपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की. मोदी कहते हैं कि कांग्रेस के पास जनाधार नहीं है और यह भी कहते हैं कि उसने चार करोड़ लोगों को पलायन के लिए प्रेरित किया. यह कैसे हो सकता है? प्रधानंत्री मोदी पहले कांग्रेस के बारे में एक राय तो कायम कर लें.

इमेज स्रोत, @SANSADTV
जीएसटी बनाम राज्य-केंद्र संबंध
अमिताभ तिवारी का कहना है कि बीजेपी की तनातनी उन राज्यों से भी बढ़ी है, जहां वह तीसरे नंबर पर थी और दूसरे नंबर पर आना चाहती है. हालांकि बंगाल में वह दूसरे नंबर की पार्टी बन चुकी है. लेकिन तेलंगाना और आंध्र में उसकी यह कोशिश जारी है. यही वजह है कि केंद्र का यहां की सरकारों से टकराव हो रहा है. अब यहां उसकी मुख्य विरोधी कांग्रेस नहीं बल्कि सत्ता में बैठी तृणमूल, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियों से है. ठीक इसी तरह इन पार्टियों का सीधा टकराव भी अब बीजेपी से ही है. केंद्र और कुछ राज्यों के बीच इस समय जो टकराव दिख रहा है उसके पीछे राजनीतिक वर्चस्व की यह होड़ भी अहम वजह है.
पीएम ने राज्यसभा में कहा कि जीएसटी काउंसिल का बनना भारत के संघीय ढांचे का उत्तम उदाहरण है. राज्यों के वित्त मंत्री केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ बैठकर निर्णय करते हैं. इससे बड़ी संघीय व्यवस्था क्या हो सकती है?''
लेकिन अमिताभ तिवारी कहते हैं, '' सचाई ये है कि जीएसटी के आने के बाद केंद्र और राज्यों के संबंध बिगड़े हैं. चूंकि ज्यादातर राज्यों में बीजेपी सरकार इसलिए उनका असंतोष नहीं दिखता. लेकिन विपक्ष शासित राज्यों में इसे लेकर काफी असंतोष है. वो देख रहे हैं कि इसने उन्हें आर्थिक फैसले के मामले में काफी कमज़ोर कर दिया है. ''
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















