बजट 2022 : जानिए ई-पासपोर्ट क्या है, सरकार क्यों शुरू कर रही है ये सुविधा ?

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- Author, अभिनव गोयल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में साल 2022-23 में ई-पासपोर्ट शुरू करने की घोषणा की है. बताया जा रहा है कि ई-पासपोर्ट से विदेश आने जाने वाले लोगों को कई तरह की सुविधा होगी.
आखिर ई-पासपोर्ट है क्या, ये कैसे काम करता है ? और आने वाले दिनों में कैसे सामान्य पासपोर्ट की जगह ई-पासपोर्ट ले लेगा ? इन तमाम सवालों के लिए बीबीसी ने कई विशेषज्ञों और ऐसे लोगों से बातचीत की जो ई-पासपोर्ट का इस्तेमाल पहले से कर रहे हैं.
ई-पासपोर्ट क्या है?
ई-पासपोर्ट साधारण पासपोर्ट की तरह दिखाई देता है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोप्रोसेसर चिप का इस्तेमाल किया जाता है. ये पासपोर्ट के कवर या इसके पन्नों पर लगाई जाती है. राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने बताया था, ''ई-पासपोर्ट में आवेदकों की जानकारी को डिजिटल साइन की शक्ल में चिप में सुरक्षित किया जाएगा''. इसमें पासपोर्ट धारक से जुड़ी सारी जानकारी होगी. इस चिप में दर्ज सूचनाओं को बदला नहीं जा सकता है. अगर चिप के साथ छेड़छाड़ होगी तो ई-पासपोर्ट काम करना बंद कर देगा.
क्या पहले भी जारी हुआ है ई-पासपोर्ट
साल 2008 में विदेश मंत्रालय की पहल पर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ने ई-पासपोर्ट जारी करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया था. इस प्रोजेक्ट के तहत राजनयिकों और अधिकारियों के लिए करीब 20 हजार ई-पासपोर्ट जारी किए गए थे. इस अनुभव के आधार पर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र को आम नागरिकों, अधिकारियों और राजनयिकों के लिए ई-पासपोर्ट को बनाने और लागू करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इस ई-पासपोर्ट में कवर पेज पर इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाई गई थी.
ई-पासपोर्ट में किस तरह की जानकारी होगी ?
जवाब- ई-पासपोर्ट के लिए बायोमेट्रिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चैटबॉट्स, ऑटो-रिस्पॉन्स जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. पासपोर्ट में फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल पहले से होता है. ई-पासपोर्ट में फिंगरप्रिंट के अलावा आंखों के स्कैन को भी शामिल किया जाएगा. जैसे आधार कार्ड बनवाते समय उंगलियां और आंखों की पुतलियां स्कैन की जाती हैं वैसे ही ये सारी जानकारी चिप में स्टोर की जाएगी. इससे इमिग्रेशन पर लगी मशीन को सही व्यक्ति की पहचान करने में मदद मिलेगी.

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साधारण पासपोर्ट की तुलना में ई-पासपोर्ट कैसे काम करता है?
साधारण पासपोर्ट के साथ जब आप किसी देश में प्रवेश करते हैं तो उसे आपके पासपोर्ट पर लिखा जाता है. ई-पासपोर्ट में ये सारी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक चिप में स्टोर होगी. ई-पासपोर्ट धारक ने कब किस देश की यात्रा की है और वो कितने समय उस देश में रहा है इसे बिना कागजी कार्रवाई के किया जा सकेगा.
ई-पासपोर्ट से कितनी सुविधा ?
जब आप साधारण पासपोर्ट से किसी देश की यात्रा करते हैं तो सबसे पहले संबंधित देश का वीजा लगवाना होता है. वीजा की मुहर पासपोर्ट पर लगाई जाती है. सफर से पहले हवाई अड्डे पर इमीग्रेशन विभाग के अधिकारी पासपोर्ट और वीजा की जांच करते हैं. अक्सर इमीग्रेशन पास करने के लिए लंबी कतारें लगी होती हैं. घंटों इंतजार करने के बाद ही व्यक्ति का नंबर आता है और उसे सफर की अनुमति मिलती है.
ई-पासपोर्ट में इमीग्रेशन पास करने के लिए व्यक्ति का पासपोर्ट और वीजा अधिकारी चेक नहीं करते बल्कि आटोमेटिक मशीन चेक करती हैं. जैसे मेट्रो में टोकन लगाते ही गेट खुल जाते हैं वैसे ही ई-पासपोर्ट को इमीग्रेशन गेट पर स्कैन करने से गेट खुलते हैं.
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ई-पासपोर्ट मिलने पर क्या ई-वीजा भी मिल सकता है?
कुछ देशों में ये सुविधा है कि आप घर बैठे ई-पासपोर्ट की मदद से ई-वीजा ले सकते हैं. मेटावर्स ब्लॉकचेन सॉल्यूशन की फाउंडर प्रीति आहूजा के पास ई-पासपोर्ट है. वे बताती हैं कि वो घर बैठे ही ई-वीजा प्राप्त कर लेती हैं. जब कोई देश ई-वीजा देता है तो उसे पासपोर्ट में लगी इलेक्ट्रॉनिक चिप में अपडेट कर देता है.
ई-पासपोर्ट धारक जब इमिग्रेशन गेट पर पहुंचता है तो वहां लगी मशीन और कैमरा, पासपोर्ट में लगी चिप को स्कैन कर लेता है. स्कैन करने के बाद गेट खुल जाते हैं. पासपोर्ट धारक की यात्रा से सारी गतिविधियों को चिप में दर्ज किया जाता है. कंप्यूटर पर सिंगल की मदद की से कई साल पुराना रिकॉर्ड भी आसानी से देखा जा सकता है. भारत सरकार कब से ई-वीजा देना शुरू करेगी इसे लेकर अभी कुछ साफ नहीं है.

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किसी देश का ई-पासपोर्ट भारत में कैसे काम करता है ?
फिलहाल भारत में ई-पासपोर्ट में लगी चिप को स्कैन करने के लिए इमीग्रेशन गेट नहीं हैं. प्रीति आहूजा बताती हैं, ''पासपोर्ट में लगी चिप भारत में काम नहीं करती. पासपोर्ट के अंदर जो कागज हैं उन पर इमीग्रेशन के अधिकारी मुहर लगाते हैं जिसके बाद भारत में प्रवेश मिलता है. इसका मतलब है कि ई-पासपोर्ट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की भी जरूरत पड़ेगी.
कौन बनाएगा ई-पासपोर्ट ?
केंद्र सरकार ने नासिक की इंडिया सिक्योरिटी प्रेस को ई-पासपोर्ट के लिए इलेक्ट्रॉनिक कॉन्टैक्टलेस इनलेज और ऑपरेटिंग सिस्टम खरीदने का टेंडर दिया है. नासिक की इंडिया सिक्योरिटी प्रेस जब खरीद प्रक्रिया पूरी कर लेगी उसके बाद ही ई-पासपोर्ट जारी किए जाएंगे.
किन देशों में ई-पासपोर्ट का चलन है ?
पासपोर्ट के मानकीकरण का काम इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन करता है. जो यूएन का ही एक हिस्सा है. इसके अलावा देशों के पास अपने हिसाब से इन मानकों को लागू करने का अधिकार होता है. 2016 में तय हुआ था कि सभी पासपोर्ट मशीन में पढ़े जाने योग्य होने चाहिए.
दुनिया के कई देश पासपोर्ट की साख को बढ़ाने के लिए ई-पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं. आईसीएओ ने पासपोर्ट में चिप लगाने यानी ई-पासपोर्ट को अनिवार्य नहीं किया है. आईसीएओ के मुताबिक 100 से अधिक देश फिलहाल ई-पासपोर्ट जारी करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में इस समय करीब 45 करोड़ से ज्यादा ई-पासपोर्ट लोगों के पास हैं. यूरोप के ज्यादातर देशों में ई-पासपोर्ट ही चलते हैं.

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ई-पासपोर्ट में क्या सेंधमारी हो सकती है ?
साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल का मानना है, ''ई-पासपोर्ट कहने और सुनने में तो काफी अच्छा लगता है. ई-पासपोर्ट आने के बाद से सरकार को साइबर सुरक्षा का काफी ध्यान रखना पड़ेगा. सरकार के लिए ये किसी चुनौती से कम नहीं होगा. ई-पासपोर्ट में सेंधमारी कर डेटा का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.
ई-पासपोर्ट इस्तेमाल करने वालों का क्या कहना है ?
मेटावर्स ब्लॉकचेन सॉल्यूशन की फाउंडर प्रीति आहूजा के पास ई-पासपोर्ट है. बीबीसी से बातचीत में वे बताती हैं, ''मेरे पास पिछले बीस सालों से यूके का ई-पासपोर्ट है. पासपोर्ट के कवर पेज पर एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी है जो दिखाई नहीं देती. कवर पेज के अलावा अंदर के पेज पर भी मेरी सारी जानकारी है जो साधारण पासपोर्ट की तरह होती है.
वह बताती हैं, '' साधारण पासपोर्ट की तरह ही 30 या 60 पेज ई-पासपोर्ट में होते हैं. जब मैं लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर जाती हूं तो वहां इमीग्रेशन के लिए ई-पासपोर्ट की अलग लाइन लगती है और साधारण पासपोर्ट वालों की अलग. ई-पासपोर्ट वालों की लाइन काफी छोटी होती है और काफी तेजी से आगे बढ़ती है क्योंकि वेरिफिकेशन का काम मशीन करती है.
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