पेगासस भारत को बेचा गया था, न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार का दावा - प्रेस रिव्यू

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अमेरिकी अख़ाबर न्यूयॉर्क टाइम्स ने शुक्रवार को अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि भारत ने इसराइली स्पाईवेयर पेगासस को ख़रीदा था. अंग्रेज़ी अख़बर द टेलिग्राफ़ में ये ख़बर दी गई है.
नरेंद्र मोदी सरकार ने पेगासस की ख़रीद की बात को ना तो स्वीकार किया है और ना ही इसे नकारा है.
पिछले साल पेगासस जासूसी सॉफ़्टवेयर के ज़रिए कई देशों में नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के कॉल रिकॉर्ड करने की बात सामने आई थी. इ
समें भारत का नाम भी शामिल था. विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार की आलोचना की थी और जवाब मांगा था.
हालांकि, सरकार ने विपक्ष के आरोपों को ग़लत बताया था.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का एक पैनल इस मामले की जांच कर रहा है.

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'ख़ान सर' अब तक RRB NTPC विवाद पर क्या बोले
अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, आरआरबी-एनटीपीसी परीक्षा मामले से चर्चा में आए फ़ैसल ख़ान उर्फ़ ख़ान सर कहते हैं कि उनके छात्र विज्ञान के सभी सिद्धांतों का हल कर सकते हैं लेकिन वो ये नहीं समझ पाते कि रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) क्या सोचता है.
बिहार और उत्तर प्रदेश में आरआरबी-एनटीपीसी परीक्षा को लेकर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के मामले में एक कोचिंग संस्थान के प्रमुख और यूट्यूबर फ़ैसल ख़ान उर्फ़ ख़ान सर पर छात्रों को भड़काने के लिए एफ़आईआर दर्ज की गई है. उनके अलावा पांच और शिक्षकों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर की गई है.
हाल ही में 14 जनवरी को जब रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड ने एनटीपीसी (नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी) परीक्षा के नतीजे घोषित किए तो छात्रों का ग़ुस्सा भड़क गया.
छात्रों का आरोप है कि इन नतीजों में गड़बड़ी है और इनसे ऐसे छात्र बाहर हो जाएंगे जिनके पास मेरिट है.
छात्रों में नाराज़गी इस बात को लेकर भी है कि भर्तियां सही समय पर नहीं निकल रही हैं और निकल भी रही हैं तो उनमें देरी की जा रही है.
विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बिहार में दो जगहों पर रेल जला दी और पुलिस व छात्रों के बीच झड़प भी हुई थी.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक 29 साल के फ़ैसल ख़ान उन पर लगे छात्रों को भड़काने के आरोपों से इनकार करते हैं.
वह कहते हैं कि आरआरबी कैसे काम करता है, ये उनकी समझ के बाहर है. उन्होंने 26 जनवरी को मीडिया से बात करते हुए कहा था, ''आरआरबी के अधिकारी ज़मीनी सच्चाई नहीं जानते. सरकार को हर चीज़ के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. अच्छा है कि रेलवे ने छात्रों की बात सुनने का फ़ैसला किया है."

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फ़ैसल ख़ान ने पटना के कोचिंग हब चक मुसल्लाहपुर में पांच साल पहले अपनी कोचिंग जीएस रिसर्च सेंटर की शुरुआत की थी. इस सेंटर में टीन से ढका हुआ बड़ा हॉल है जिसमें एक हज़ार छात्र आ सकते हैं.
साल 2019 में फ़ैसल ख़ान ने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया था. उनका एक ऐप भी है जिसे लाखों में डाउनलोड किया गया है.
कोचिंग सेंटर के इलाक़े के ही एक शिक्षक के मुताबिक फ़ैसल ख़ान की कोचिंग में अलग-अलग बैच में करीब 12000 से 15000 छात्र पढ़ते हैं. कोचिंग में कोई और शिक्षक नहीं है लेकिन उनकी रिसर्च टीम है.
कोचिंग सेंटर रेलवे, कर्मचारी चयन आयोग, राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा और बैंकिंग की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयार कराता है.
गुरुवार को छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील के बाद फ़ैसल ख़ान ने कॉल और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया है.
26 और 27 जनवरी को उन्होंने कहा था कि उन्होंने छात्रों को कभी नहीं भड़काया था और ना ही सड़कों पर आने के लिए कहा था.
उन्होंने बताया कि रेलवे की नीतियों के ख़िलाफ़ एक डिजिटल विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया था जिसमें करीब 80 लाख ट्वीट किए गए. उन्होंने बताया, ''मैंने सिर्फ़ एक बार ट्वीट किया था और वो भड़काऊ नहीं था.''

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योगी आदित्यनाथ ने नहीं मानी राजनाथ सिंह की सलाह
इंडियन एक्सप्रेस में ही एक और ख़बर है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अपने बयान में 'जिन्ना' का ज़िक्र किया है.
जबकि एक दिन पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि राज्य के चुनाव में 'गन्ना किसानों' के मसले उठाने चाहिए ना कि मोहम्मद अली जिन्ना का मसला.
उन्होंने ग़ाज़ियाबाद ज़िले के मोदीनगर में गुरुवार को मतदाताओं से बात करते हुए कहा, ''मुझे नहीं पता कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का नाम चुनाव के दौरान क्यों लिया जाता है. जो इसका राजनीतिकरण करना चाहते हैं... यूपी की राजनीति में जिन्ना का नाम नहीं आना चाहिए. इसके बजाए हमें गन्ना किसानों पर बात करनी चाहिए.''
इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को बयान दिया था, ''वो जिन्ना की पूजा करते हैं और हम सरदार पटेल की पूजा करते हैं.''

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भारत पाकिस्तान से बात करने का इच्छुक
तीर्थयात्रियों को यात्रा की अनुमित देने को लेकर 1974 के संयुक्त प्रोटोकॉल को बेहतर करने के लिए भारत पाकिस्तान से बातचीत के लिए 'सकारात्मक' और 'इच्छुक' है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की इस ख़बर के मुताबिक भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. तीर्थयात्रियों को हवाई यात्रा की अनुमति देने और दोनों देशों से तीर्थयात्रियों की संख्या को बढ़ाने के लिए भारत संयुक्त प्रोटोकॉल पर बात कर सकता है.
इससे पहले पाकिस्तान की सरकार ने पाकिस्तान हिंदू काउंसिल की ओर से एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें सीधे कराची और लाहौर से 170 तीर्थयात्रियों के भारत के तीर्थस्थानों पर आने की अनुमति मांगी गई थी.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, ''तीर्थस्थलों की संख्या बढ़ाने को लेकर दोनों तरफ़ से रुचि दिखाई गई है. भारत की इसे लेकर सकारात्मक सोच है और वो पाकिस्तान से इस पर बात करने का इच्छुक है.''
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