यूपी: सीएए विरोधी प्रदर्शनों के लिए वसूली की मार झेल रहे हैं दिहाड़ी मज़दूर -प्रेस रिव्यू

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट छापी है जिसमें बताया गया है कि कैसे उत्तर प्रदेश में नागरिकता क़ानून को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों की क़ीमत उन लोगों को चुकानी पड़ रही है जो आर्थिक रूप से तंगी का सामना कर रहे हैं या दिहाड़ी मज़दूरी करके बमुश्किल परिवार चलाते हैं.
अख़बार लिखता है कि "एक रिक्शा वाला, एक तांगा चलाने वाला, फल बेचने वाला, मुर्गे की दुकान चलाने वाला, दूधवाला, एक नौजवान जो अपने पिता के कपड़ों की दुकान में काम कर रहा था और एक किशोर जिसने स्कूल में पढ़ाई छोड़ दी - ऐसे आठ दिहाड़ी मज़दूर जो मुश्किल से 200-250 रुपये रोज़ाना कमा पाते हैं, इनमें से हर व्यक्ति ने13,476 रुपये सरकार को दिए."
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ कानपुर में बेकनगंज के रहने वाले ऐसे ही 21 लोगों से सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए 2.83 लाख रुपये वसूले गए. प्रशासन के मुताबिक़ जो वसूली की गई है उसमें 2.5 लाख रुपये की टाटा सुमो गाड़ी और 33,000 रुपये की कीमत वाले कैमरे, तीन खिड़की और दो दरवाज़े को हुए नुकसान की भरपाई हुई है.
अख़बार ने इन लोगों की पृष्ठभूमि समझने के लिए 21 में से 15 परिवारों को ट्रैक किया और पाया कि इनमें से किसी को नहीं पता कि 2.83 लाख की रक़म आख़िर किस नुकसान के लिए है और कैसे उनके हिस्से के 13,476 रुपये तय किए गए. मतलब इन लोगों को ये तक नहीं पता कि प्रशासन इनसे किस तरह के नुक़सान के पैसे वसूल रहा है.
एक परिवार ने बताया कि उन लोगों ने मुश्किल से कमाए जिन पैसों को जोड़कर बचत की थी उससे उन्होंने ये रक़म चुकाई. वहीं, दो अन्य परिवारों ने बताया कि उन्हें ये तक नहीं पता कि उनके नाम पर वो पैसे किसने भरे. अन्य 12 परिवारों ने बताया कि उन्होंने किसी पड़ोसी, दोस्त या रिश्तेदार से कर्ज़ ले कर ये पैसे भरे. ये सभी 15 लोग जेल भी गए थे जो अब ज़मानत पर रिहा है लेकिन ये नहीं चाहते की इनकी पहचान उजागर की जाए.
15 में से 7 लोगों के वकीलों ने बताया कि उन लोगों ने इस नोटिस को चुनौती भी नहीं दी. अक़बार के अुसार एक वकील ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया, "इनमें से कई लोग जेल में थे जब उन्हें नोटिस भेजा गया. कुछ लोग पहले ही ये रक़म भर चुके थे और उसके बाद हमारे पास आए. इस तरह के केस में जो भी मेरे मुवक्किल हैं वो सभी आर्थिक रूप से ग़रीब हैं."
पेशे से एक दिहाड़ी मज़दूर से जब अख़बार ने पूछा कि उन्होंने इस नोटिस को चुनौती क्यों नहीं दी? तो उन्होंने बताया, "हम सरकार, पुलिस और प्रशासन को चुनौती नहीं देना चाहते थे."

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रूस पर टिप्पणी के कारण जर्मन नौसेना प्रमुख को देना पड़ा इस्तीफ़ा
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी के रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि रूस-यूक्रेन संकट पर विवादास्पद टिप्पणी देने के कारण जर्मनी की नौसेना के प्रमुख ने इस्तीफा सौंप दिया है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के हवाले से अख़बार ने कहा है कि शुक्रवार को नई दिल्ली में एक थिंक टैंक बैठक में के-अचिम शोएनबैच नाम के अधिकारी ने कहा था कि ये बात पूरी तरह "बकवास" है कि रूस यूक्रेन पर हमला करना चाहता है और पुतिन सम्मान के पात्र हैं
मंत्रालय के प्रवक्ता ने एएफ़पी को बताया कि वाइस एडमिरल "तत्काल प्रभाव से" अपना पद छोड़ देंगे.
नई दिल्ली की बैठक में फिल्माए गए इस वीडियो में, शोएनबैच ने कहा कि पुतिन जो चाहते थे उसका "सम्मान होना" चाहिए.

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पंजाब चुनावः चन्नी-सिद्धू के झगड़े में सोनिया का दखल
हिंदी दैनिक जनसत्ता में छपी ख़बर के मुताबिक़, पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस को शनिवार को उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी करनी थी. लेकिन सीएम चरणजीत चन्नी और नवजोत सिद्धू के झगड़े के कारण इस पर सहमति नहीं बन पाई.
इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने विवाद में दखल देते हुए एक सब-कमेटी बनाई है, जो इन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय करेगी. इसमें कांग्रेस महासचिव केके वेणुगोपाल के साथ अंबिका सोनी और अजय माकन को शामिल किया गया है.
पंजाब की 117 विधानसभा सीटों के लिए कांग्रेस पहले 86 उम्मीदवार घोषित कर चुकी है. दूसरी सूची में 6 विधायकों का टिकट काटने की तैयारी की जा रही है. पहली सूची में जगह नहीं मिल पाने से नाराज़ नेताओं को मनाने के कारण ही कांग्रेस की दूसरी सूची के जारी होने में देरी हो रही है. दूसरी सूची में कई नामों में बदलाव भी होने की भी संभावना है. इसका कारण है कि चुनाव के दौरान आलाकमान भी पार्टी में टूट जैसे हालात नहीं चाहता है.

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अरुणाचल में सेला सुरंग परियोजना अपने निर्णायक चरण में: रक्षा मंत्रालय
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन की सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग परियोजना अब अपने निर्णायक चरण में है और जल्द ही ये सुरंग तैयार हो जाएगी.
सेला सुरंग के ज़रिए तवांग सेक्टर में आगे के क्षेत्रों में सैनिकों को भेजने और उनके लिए हथियारों को भेजना आसान हो जाएगा.
रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि शनिवार को सुरंग बनाने के लिए पहाड़ों को तोड़ने के काम का आख़िरी चरण पूरा हुआ और आख़िरी धमाका किया गया. इसके साथ ही परियोजना से संबंधित सभी उत्खनन का कार्य पूरा हो गया है.
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