मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर ऐप पर अपलोड करने की जाँच करेगी पुलिस

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शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक जनवरी को कहा था कि सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें गिटहब प्लेटफॉर्म के ज़रिए एक ऐप पर अपलोड की गई हैं.
चतुर्वेदी ने इस मामले को मुंबई पुलिस के सामने उठाया था और उन्होंने इसके दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ़्तार करने की मांग की थी.
प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट कर कहा था, ''मैंने सीपी मुंबई पुलिस और डीसीपी क्राइम रश्मि कारंदिकर से बात की है. वे इस मामले की जांच करेंगे. इसे लेकर महाराष्ट्र के डीजीपी से भी बात की है कि वे मामले में हस्तक्षेप करें. उम्मीद है कि इसमें शामिल महिला विरोधी और लैंगिक भेदभाव करने वाले गिरफ़्तार होंगे.''
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पूरे मामले पर मुंबई पुलिस ने कहा कि उसने मामले को संज्ञान में लिया है और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए कहा गया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि मुंबई साइबर पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है.
सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना है कि ऐप 'बुल्ली बाई' भी सुल्ली डील्स की तरह ही काम करता है. एक बार जब इसे आप ओपन करेंगे तो मुस्लिम महिलाओं के चेहरे दिखने लगते हैं.
ट्विटर पर अपनी अच्छी ख़ासी मौजूदगी रखने वाली मुस्लिम महिलाओं ने बुल्ली बाई पर अपनी फ़ोटो अपलोड किए जाने का स्क्रीनशॉट ट्वीट किया है.
द वायर की पत्रकार इस्मत आरा ने इस प्लेटफॉम पर बनाई गई ख़ुद की प्रोफ़ाइल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, ''ये बहुत दुख की बात है कि एक मुस्लिम महिला के रूप में मुझे नए साल की शुरुआत इस डर और घृणा के साथ करनी पड़ रही है. बेशक #sullideals के इस नए संस्करण में मुझे अकेले निशाना नहीं बनाया गया है, आज सुबह एक दोस्त ने ये स्क्रीनशॉट भेजा. नववर्ष की शुभकामनाएं.''
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इस्मत ने इस मामले में दिल्ली साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. दिल्ली पुलिस ने ट्विट कर कहा है कि वह इस मामले की जांच कर रही है.
केंद्रीय सूचना मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि ''आज सुबह ही गिटहब ने जानकारी दी है कि इस एप को ब्लॉक कर दिया गया है. पुलिस अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं.''
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सोशल मीडिया पर काफ़ी लोकप्रिय आरजे सायमा ने ट्वीट कर कहा, ''सुल्ली डील्स की तर्ज पर बनाए गए बुल्ली डील्स ऐप पर कई मुस्लिम लड़कियों की तरह मेरा प्रोफ़ाइल भी बनाया गया है. यहाँ तक कि नजीब की माँ को भी नहीं बख्शा गया है. यह भारत की टूटी-फूटी न्याय व्यवस्था, एक जर्जर क़ानून-व्यवस्था व्यवस्था का प्रतिबिंब है. क्या हम महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश बनते जा रहे हैं? ''
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पत्रकार हिमा बेग ने ट्विटर पर लिखा, ''कोरोना के कारण अपनी दादी को खोने के बाद आज मैं पहली बार उनकी क़ब्र पर गई. जैसे ही मैं घर जाने के लिए कार में बैठी, मुझे दोस्तों ने बताया कि एक बार फिर मेरी तस्वीरों की नीलामी की जा रही है. बुली डील्स पर. पिछली बार इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया, और यह फिर से हो रहा है.''
''मैंने ख़ुद को सेंसर कर लिया है, मैं अब शायद ही यहां (ट्विटर पर) बोलती हूं, लेकिन फिर भी, मुझे ऑनलाइन बेचा जा रहा है, मेरा सौदा किया जा रहा है. मैं इस देश में सुरक्षित नहीं हूं, मेरे जैसी मुस्लिम महिलाएं इस देश में सुरक्षित नहीं हैं. कार्रवाई के लिए हमें कितने ऑनलाइन सौदे देखने होंगे? हमारी मदद करिए!''
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सुल्ली डील मामले में पुलिस ने क्या किया?
बीते साल जुलाई में जब सुल्ली डील्स ऐप पर इस तरह मुस्लिम लड़कियों की तस्वीर अपलोड की जा रही थी तो उस वक़्त भी इसे लेकर एफ़आईआर कराई गई थी, लेकिन उन शिकायतों का क्या हुआ?
अगस्त में बीबीसी ने इसे लेकर एक रिपोर्ट की थी, जिसमें मुस्लिम महिलाओं की ऑनलाइन प्रताड़ना के तमाम मामलों में पुलिस ने क्या किया है, इस बात की पड़ताल की गई थी.
संसद में मॉनसून सत्र के दौरान 29 जुलाई को राज्यसभा में सांसद अब्दुल वहाब के सवाल के जवाब में महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने बताया कि ''गृह मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक़ दिल्ली पुलिस ने सुल्ली डील्स मामले में एक एफ़आईआर दर्ज की है.''
बीबीसी ने पाया था कि इस मामले में उस समय तक कोई गिरफ़्तारी नहीं की गई थी.

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सुल्ली डील्स को लेकर एक एफ़आईआर हना मोहसिन ख़ान ने भी दर्ज कराई थी. हना उन महिलाओं में से एक थीं, जिनकी तस्वीर और नाम को सुल्ली ऐप पर इस्तेमाल किया गया था. ये एफ़आईआर नोएडा सेक्टर-24में दर्ज हुई है.
हना ने बीबीसी को बताया था कि घटना के एक महीने बाद भी पुलिस को इस मामले में कुछ भी नहीं मिला. थाना प्रभारी ने उन्हें बताया था कि पुलिस के हाथ कोई ठोस जानकारी नहीं लगी.

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सुल्ली डील्स के मामले में गिटहब ने क्या किया?
सुल्ली डील्स ऐप की तरह बुल्ली बाई ऐप को भी गिटहब पर ही बनाया गया था.
जुलाई में सुल्ली डील्स को लेकर बीबीसी ने गिटहब से कुछ सवालों के साथ इमेल के ज़रिए संपर्क किया था.
जवाब देते हुए गिटहब ने कहा था, "हमने इस मामले में यूज़र का अकाउंट सस्पेंड कर दिया है. रिपोर्ट्स के आधार पर इस मामले की जाँच शुरू कर दी गई है. गिटहब की नीतियां ऐसे कॉन्टेंट, जो प्रताड़ना, भेदभाव और हिंसा को बढ़ावा देते हैं, उनके ख़िलाफ़ हैं. ये कॉन्टेंट हमारी नीतियों का उल्लंघन है.
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