जनरल बिपिन रावत के बाद कौन बनेगा अगला सीडीएस?

सीसीएस की बैठक

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

जनरल बिपिन रावत भारत के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ (सीडीएस) थे.

मार्च 2023 तक सीडीएस के तौर पर उनका कार्यकाल था.

बुधवार शाम को जनरल बिपिन रावत की हेलीकॉप्टर हादसे में मौत की आधिकारिक पुष्टि के ठीक बाद कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक बुलाई गई थी.

सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक में हेलीकाप्टर हादसे पर सेना प्रमुख ने सभी को ताज़ा स्थिति से अवगत कराया. इस बैठक के ख़त्म होने के साथ ही जनरल बिपिन रावत के उत्तराधिकारी के बारे में चर्चा शुरू हो गई.

भारत के अगले सीडीएस कौन होंगे, कब तक उनके नाम का एलान होगा, पूर्णकालिक होंगे या फिर अगले एक साल के लिए - इस बारे में भारत सरकार की तरफ़ से कोई जानकारी नहीं आई है.

सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं.

बीबीसी ने इस बारे में रक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे वरिष्ठ रिटायर्ड अधिकारियों से उनकी राय जानी.

जनरल बिपिन रावत

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जनरल बिपिन रावत कब और कैसे बने सीडीएस

जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार ने सीडीएस की चयन प्रक्रिया और पद की योग्यता के बारे में कोई रूल बुक सार्वजनिक नहीं किया है.

जनरल बिपिन रावत भारत के पहले सीडीएस होंगे इसकी घोषणा 20 दिसंबर 2019 को केंद्र सरकार की तरफ़ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से की गई थी जिसमें इसे केंद्र सरकार का फैसला बताया गया था.

अभी जनरल बिपिन रावत का तक़रीबन एक साल से ज़्यादा का कार्यकाल बाक़ी था. शायद उनके रिटायरमेंट के क़रीब केंद्र सरकार इन नियमों के बारे में कोई तैयारी करती.

लेकिन इस हादसे की वजह से उनका पद अचानक खाली हो गया है.

जानकार मानते हैं कि मोदी सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र में किए गए बदलावों में ये सबसे अहम बदलाव था, इस वजह से ज़्यादा दिन तक इस पद को ख़ाली भी नहीं रखा जा सकता है.

इसकी अहमियत का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस नए पद का ज़िक़्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में लाल किले से दिए अपने 15 अगस्त के भाषण में किया था और उसी साल दिसंबर के आख़िरी दिन उनके पद संभालने का आदेश जारी किया गया था.

दरअसल करगिल युद्ध के बाद से इस पद को लाने की वकालत की जा रही थी. बाद में पूर्व कैबिनेट सचिव नरेश चंद्र की अध्यक्षता वाली समिति ने भी इसकी अनुशंसा की थी.

जनरल बिपिन रावत के जाने के बाद आगे इस पद पर कब, कैसे और किसकी नियुक्ति होगी - इसको लेकर भारत में काफ़ी लोग सवाल पूछ रहे हैं.

जनरल बिपिन रावत

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सीडीएस की ज़िम्मेदारी

सीडीएस की मुख्य ज़िम्मेदारी के बारे में जानकारी देते हुए केंद्र सरकार ने कहा था सीडीएस का काम सेना, नौसेना और वायुसेना के कामकाज में बेहतर तालमेल बिठाना और देश की सैन्य ताक़त को और मज़बूत करना होगा.

उनकी ज़िम्मेदारी रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के तौर पर है जिनके अधीन तीनों सेनाओं के मामले आएंगे. सीडीएस की डिफ़ेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) और डिफ़ेंस प्लानिंग कमीशन (डीपीसी) जैसे महत्वपूर्ण रक्षा मंत्रालय समूहों में जगह होगी.

लेफ़्टिनेंट जनरल सतीश दुआ इंटीग्रेटेड डिफ़ेंस स्टॉफ के प्रमुख के पद पर रह चुके हैं. अब सेवानिवृत्त हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने साफ़ कहा कि इस पद के लिए योग्यता, नियुक्ति और अगला कौन होगा, इसपर फ़िलहाल कोई पॉलिसी सार्वजनिक नहीं है.

इस वजह से लेफ़्टिनेंट जनरल ( रिटायर्ड) सतीश दुआ कहते हैं कि अगले सीडीएस के चुनाव की निश्चित प्रक्रिया बता पाना मुश्किल है.

अपने तज़ुर्बे के आधार पर वो कहते हैं, " अगले सीडीएस के नाम का एक पैनल रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से सुझाव के तौर पर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी को भेजा जाना चाहिए.

कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी से भी इस लिस्ट को पास कराने की ज़रूरत पड़ेगी. हालांकि अंतिम फ़ैसला सीसीएस की बैठक में ही होगा जिसके अध्यक्ष ख़ुद प्रधानमंत्री होते हैं.

इस पैनल में आने वाले नामों पर केवल रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं से ही इनपुट नहीं लिया जाएगा बल्कि इंटेलिजेंस एजेंसी और चार बड़े मंत्रालय जो सीसीएस के सदस्य होते हैं उनकी राय भी ली जाएगी.

इस पैनल को तैयार करने में आम तौर पर सीनियॉरिटी का ख़्याल रखा जाता है. चूंकि इस पद पर काम करने वाले व्यक्ति को तीनों सेना के साथ काम करना होता है, तो अगला सीडीएस इन तीनों सेना में किसी भी सेना से हो सकता है."

सीसीएस की बैठक में मोदी

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सीडीएस के लिए योग्यता

जब जनरल बिपिन रावत को सीडीएस के पद पर नियुक्त किया गया था तो वो सेना प्रमुख थे और अपने रिटायरमेंट के क़रीब थे. सीडीएस के पद पर उनकी नियुक्ति तीन साल के लिए हुई थी और रिटायरमेंट की आयु सीमा बढ़ा कर 65 वर्ष कर दी गई थी.

इस वजह से जानकार मानते हैं, सीडीएस पद के लिए आयु सीमा 65 साल की है और कार्यकाल तीन साल का हो सकता है.

इस लिहाज से देखा जाए तो तीनों सेनाओं के अध्यक्ष इस पद के लिए योग्य होंगे क्योंकि सेना प्रमुख के रिटायरमेंट की आयु सीमा 62 साल होती है.

इस आधार पर आर्मी चीफ़, नेवी चीफ़ और एयरफोर्स चीफ़ तीनों अगले सीडीएस पद के दावेदार हो सकते हैं.

सिनियॉरिटी के आधार पर देखें तो भारत के तीनों सेनाओं के प्रमुख में लेफ़्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे सबसे वरिष्ठ हैं.

हालांकि इस पद पर कौन अगला व्यक्ति कौन आएगा, इस पर अंतिम फ़ैसला मोदी सरकार को ही करना है.

हादसे की जगह

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एक पद, तीन ज़िम्मेदारियाँ

एक तथ्य ये भी है कि जनरल बिपिन रावत के अचानक हादसे में मौत ने एक साथ तीन पद रिक्त कर दिए.

दरअसल चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ एक साथ तीन ज़िम्मेदारियाँ संभालते थे.

पहला सीडीएस की ज़िम्मेदारी.

दूसरा चेयरमैन, चीफ़ ऑफ़ स्टॉफ़ कमेटी और

तीसरी ज़िम्मेदारी सचिव, डीएमए की थी. डीएमए यानी डिपार्टमेंट ऑफ़ मिलिट्री अफ़ेयर्स. ये रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला सैन्य मामलों का विभाग है.

एयर चीफ़ मार्शल (रिटायर्ड) अरूप राहा पाँच साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, "मेरी समझ में सीडीएस के पद पर नियुक्ति के लिए इंटीग्रेटेड सर्विस में काम करने का अनुभव होना चाहिए. इस लिहाज से तीनों सेनाओं के प्रमुख में से कोई भी इस पद पर हो सकता है. तीन सेना प्रमुख चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ कमेटी (सीओएससी) में होते हैं और उनमें से एक इसका चेयरमैन होता है. जिनके पास सीओएससी का अनुभव नहीं होगा उनके लिए सीडीएस का पद संभालना थोड़ा मुश्किल हो सकता है."

हालांकि सीडीएस का पद बनने के बाद सीडीएस को ही सीओएससी का प्रमुख बना दिया गया था.

वो आगे ये भी जोड़ते हैं कि सीओएससी के सदस्य ना रहने वाले भी सीडीएस पद पर काम कर पाएंगे. बस अनुभव हासिल करने में थोड़ा वक़्त लग सकता है.

बिपिन रावत

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एयर चीफ़ मार्शल (रिटायर्ड) अरूप राहा का कहना है कि सीडीएस के काम में केवल सेना के साथ ही तालमेल बिठाने की ज़रूरत नहीं है बल्कि सरकार के साथ-साथ नौकरशाही के साथ भी काम करने की ज़रूरत पड़ती है. इस वजह से सरकार चाहे तो सीडीएस की नियुक्त के लिए पैनल को बड़ा भी कर सकती है जिसमें वाइस चीफ़ को मौका दिया सकता है.

दरअसल तीनों सेनाओं की तरह सीडीएस के पोस्ट पर कोई नंबर दो के तौर पर काम नहीं कर रहा था.

इस वजह से अगले सीडीएस का नाम पहले से तय नहीं है.

आर्मी, एयरफ़ोर्स और नेवी के अलावा एक इंटीग्रेटेड डिफ़ेंस स्टॉफ ( IDS) सर्विस भी होती है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है. करगिल युद्ध के बाद ये बना था और अब इस सर्विस को बने 20 साल हो चुके हैं.

लेफ़्टिनेंट जनरल ( रिटायर्ड) सतीश दुआ, इसी आईडीएस के प्रमुख रह चुके हैं. वो बताते हैं कि बाक़ी सेनाओं के प्रमुख 4 स्टार जनरल रैंक के होते हैं. जबकि आईडीएस के प्रमुख को 'चीफ़' का दर्ज़ा नहीं था बल्कि 'वाइस चीफ़' का दर्ज़ा था. यानी वो 3 स्टार जनरल रैंक के होते थे.

सीडीएस का पद भी बाक़ी सेना प्रमुखों की तरह 4 स्टार जनरल रैंक का रखा गया था और वेतन और अतिरिक्त सुविधाएं किसी भी अन्य सेना प्रमुख की तरह ही थीं.

इस वजह से जानकारों की राय इस पर बंटी है कि आईडीएस के भी वाइस चीफ़ को भी इस पद के लिए योग्य माना जा सकता है या नहीं. हालांकि मोदी सरकार ऐसा करने पर विचार करती है तो उन्हें ऐसे अफ़सर को पदोन्नती देनी पड़ेगी.

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