एटीएम से 1 जनवरी से पैसा निकालना कितना महंगा हो जाएगा - प्रेस रिव्यू

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अगले महीने (जनवरी) से एटीएम ट्रांज़ेक्शन में मुफ़्त लेनदेन की सीमा पार करने के बाद लोगों को ज़्यादा पैसे ख़र्च करने होंगे.

मिंट अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जून में बैंकों को इजाज़त दी थी कि 1 जनवरी, 2022 से मुफ़्त लेनदेन की मासिक सीमा से अधिक बार एटीएम इस्तेमाल करने पर लोगों से वे ज़्यादा शुल्क वसूल सकते हैं.

एक्सिस बैंक ने इस बारे में कहा है, "आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, एक्सिस या दूसरे बैंकों के एटीएम से मुफ़्त लेनदेन की सीमा से अधिक बार लेनदेन करने पर 1 जनवरी, 2022 से 21 रुपये के साथ जीएसटी का भुगतान करना होगा." अभी तक लिमिट के पार जाने पर 20 रुपए और जीएसटी का भुगतान करना होता है.

इससे पहले जून में अपने एक आदेश में आरबीआई ने कहा था, "उच्च इंटरचेंज शुल्क की भरपाई करने और बढ़ी हुई लागत को देखते हुए बैंकों को अपने ग्राहकों से 21 रुपए तक शुल्क वसूलने की इजाज़त है. यह वृद्धि 1 जनवरी, 2022 से प्रभावी होगी."

असल में, आरबीआई ने 1 अगस्त से प्रभावी व्यवस्था के तहत, बैंकों को हर वित्तीय लेनदेन पर इंटरचेंज शुल्क को 15 रुपए से बढ़ाकर 17 रुपए कर दिया था. वहीं पैसे से इतर लेनदेन के मामले में इसे 5 के बजाय बढ़ाकर 6 रुपये किया गया था.

ग्राहक जिस बैंक में खाता है, उसके एटीएम से हर महीने पांच बार मुफ़्त लेन-देन करने के योग्य हैं.

दूसरे बैंकों के एटीएम के मामले में महानगरों में हर महीने मुफ़्त लेनदेन की यह सीमा पहले की तरह तीन रहेगी. वहीं अन्य शहरों में पांच बार मुफ़्त लेनदेन पहले की तरह होते रहेंगे.

बासिल राजपक्षे

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इमेज कैप्शन, भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला के साथ श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे

श्रीलंका की मदद के लिए चार सूत्रीय पहल पर सहमत हुआ भारत

श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे भारत के दो दिनों के दौरे पर नई दिल्ली में हैं. इस यात्रा के दौरान, दोनों देश श्रीलंका के आर्थिक संकट को कम करने के लिए खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा सहित एक चार सूत्रीय दृष्टिकोण पर सहमत हुए.

बासिल राजपक्षे राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के भाई भी हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने इस ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

ये चार सूत्रीय पहल हैक्या?

अख़बार के अनुसार, इन चार सूत्रों में सबसे पहली पहल है- श्रीलंका की खाद्य, दवा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत की उसे क़र्ज़ देने पर बनी सहमति. दूसरी पहल, श्रीलंका के भुगतान संतुलन की समस्या से निपटने के लिए करेंसी स्वैप समझौते को मंज़ूरी देना है.

तीसरी पहल, त्रिंकोमाली ऑयल फार्म की "शुरुआती" आधुनिकीकरण परियोजना पर सहमत होना है. भारत इसके लिए कई सालों से प्रयासरत था. आख़िरी और चौथी पहल, श्रीलंका के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय निवेश को आसान बनाने के प्रति श्रीलंका का प्रतिबद्ध होना है.

राजपक्षे की इस यात्रा के अंत में उनकी भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बुधवार को एक "संयुक्त बैठक" हुई. इसमें भारत में श्रीलंका के उच्चायुक्त मिलिंडा मोरागोडा और वित्त सचिव एसआर एटिगॉल भी शामिल हुए.

इसके बाद श्रीलंका के उच्चायोग ने एक बयान जारी किया. इसमें कहा गया, "यह सहमति बनी कि इन उद्देश्यों को हासिल करने के तौर-तरीक़ों को एक तय समयसीमा के भीतर आपसी सहमति से अंतिम रूप दिया जाएगा."

राजपक्षे

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श्रीलंकाई राष्ट्रपति से अबू धाबी में कल मिलेंगे जयशंकर

वहीं भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर शनिवार को अबू धाबी में श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे से मुलाकात करेंगे. राजपक्षे वहां इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'हिंद महासागर क्षेत्र सम्मेलन' का उद्घाटन करने वाले हैं.

श्रीलंका के उच्चायोग ने इस बयान में कहा, "दोनों मंत्री सीतारमण और जयशंकर संचार की सीधी लाइनें खोलने और इन पहलों पर समन्वय बनाने के लिए एक-दूसरे के सीधे और नियमित संपर्क में रहने पर सहमत हुए."

बासिल राजपक्षे ने गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की. एक बयान के अनुसार, दोनों ने "आपसी रणनीतिक हितों से संबंधित कई मुद्दों" पर चर्चा की.

पिछले दो सालों में, दोनों देशों के बीच आर्थिक मुद्दों को लेकर कई मतभेद रहे हैं. एक धारणा बनी कि राजपक्षे सरकार चीन की कंपनियों को आगे बढ़ा रही है.

श्रीलंका के त्रिंकोमाली में तेल के बुनियादी ढांचे के विकास की परियोजना 2017 से ही लटकी हुई है. मई 2020 में 1 अरब डॉलर की करेंसी स्वैप योजना अभी तक अमल में नहीं आ सकी. हालांकि श्रीलंका के ताज़ा बयान से लग रहा है कि अब आरबीआई से स्वैप होगा.

आइडिया-वोडाफ़ोन

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रेट्रो टैक्स से जुड़े विवाद ख़त्म करने के लिए वोडाफोन ने केंद्र को दिया आवेदन

वोडाफ़ोन ने अपने विवाद ख़त्म करने के लिए केंद्र सरकार के पास आवेदन दिया है.

बिज़नेस अख़बार द इकोनॉमिक टाइम्स ने सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के हवाले से बताया है कि पहले से लागू किए गए क़ानून (रेट्रोस्टपेक्टिव लॉ) के तहत लगाए गए कर से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए कंपनी ने आवेदन दिया है.

पिछले महीने केयर्न इनर्जी ने भी केंद्र सरकार के साथ इसी तरह के विवाद को ख़त्म करने पर सहमति बनाई थी. बताया जा रहा है कि अब वोडाफ़ोन भी चाहती है कि केंद्र सरकार के साथ उसका विवाद ख़त्म हो जाए. केंद्र सरकार ने भी ऐसे लंबित मामलों के निपटान के लिए कर क़ानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 बनाया है.

बताया जाता है कि दोनों पक्षों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि वाडाफ़ोन भारत के ख़िलाफ़ देश के बाहर किए मुक़दमों को वो वापस ले लेगी, इसके बदले में सरकार से उसे 44 करोड़ रुपए का रिफंड मिलेगा.

अधिकारी के अनुसार, "उन्होंने आवेदन किया है. आवेदन पर कार्रवाई के बाद कंपनी को फॉर्म 2 जारी किया जाएगा." फॉर्म 2 आवेदन के मंज़ूर होने का संकेत होता है. इसके तहत, भुगतान किए गए टैक्स को वापस पाने की प्रक्रिया तय की जाती है.

नए कर क़ानून के नियम जारी होने के बाद केयर्न एनर्जी सहित कई कंपनियों ने रेट्रो टैक्स से जुड़े विवाद ख़त्म करने के लिए पहले ही आवेदन कर दिया है. अधिकारी के अनुसार, उन आवेदनों पर कार्रवाई हुई है और अधिकांश को फॉर्म 2 जारी कर दिया गया है.

गंडक

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बांध सुरक्षा विधेयक राज्यसभा से पारित

बांधों की सुरक्षा के लिए लाए गए बांध सुरक्षा विधेयक (डैम सेफ़्टी बिल), 2019 गुरुवार को राज्यसभा से पारित हो गया. लोकसभा ने 2019 में ही इस विधेयक को अपनी मंज़ूरी दे दी थी.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विपक्ष के उस आरोप को ख़ारिज कर दिया कि इस विधेयक से राज्यों के अधिकार क्षेत्रों में हस्तक्षेप होगा, लिहाजा ये "असंवैधानिक" और शासन के "संघीय ढांचे का विरोधी" है.

उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य पानी, बांध के स्वामित्व या रखरखाव, या बिजली पर राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण करना नहीं है. इसके बजाय इसका उद्देश्य देश के सभी बांधों की सुरक्षा तय करना और बांध संबंधी आपदाओं को रोकने का प्रयास करना है.

डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने इस विधेयक को चयन समिति के पास भेजने के लिए एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया, जिसे 28 के मुक़ाबले 80 मतों से ख़ारिज कर दिया गया. इस पर चार घंटे चली बहस के दौरान विपक्ष के तमाम सांसद एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध कर रहे थे.

बांध की समस्याओं से पैदा होने वाली आपदाओं को रोकने के लिए इस विधेयक में बांधों की निगरानी, जांच, संचालन और रखरखाव का इंतज़ाम करने के प्रावधान हैं. इसके लिए एक संस्थागत तंत्र बनाने का प्रस्ताव यह विधेयक करता है.

परमबीर सिंह

ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में परमबीर सिंह निलंबित

महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को ड्यूटी में कथित लापरवाही बरतने के लिए निलंबित कर दिया. साथ ही, उनके ख़िलाफ़ अनुशासन की कार्रवाई भी शुरू हो गई है.

राज्य के गृह विभाग द्वारा जारी एक आदेश में बताया गया कि 1988 बैच के इस आईपीएस अधिकारी को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम 1969 की धारा 3 और 4 के तहत निलंबित किया गया है.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, उप सचिव वेंकटेश भट के दस्तख़त से जारी इस आदेश में परमबीर सिंह के ख़िलाफ़ चार आपराधिक मामलों का जिक्र किया गया है. ये मामले भ्रष्टाचार, जबरन वसूली, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) क़ानून के उल्लंघन से संबंधित हैं. बताया गया है कि ये मामले मरीन लाइन्स, कल्याण और ठाणे के थानों में दर्ज़ हैं.

देश के प्रभावशाली उद्योगपति मुकेश अंबानी के आलीशान घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक मिलने के बाद इस साल 17 मार्च को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाए जाने के बाद परमबी सिंह अगले दिन होमगार्डस के महानिदेशक बनाए गए थे.

बाद में उन पर एक के बाद एक आरोप लगते गए और क़रीब छह महीनों तक वो गायब हो गए. सुप्रीम कोर्ट से गिरफ़्तारी से राहत मिलने के बाद पिछले हफ़्ते वो सामने आए हैं.

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