वोडाफोन आइडिया पर लगा जुर्माना, डुप्लिकेट सिम से हुई थी धोखाधड़ी -प्रेस रिव्यू

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राजस्थान में आईटी (इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) डिपार्टमेंट ने वोडाफोन आइडिया को एक मामले में अपने एक ग्राहक को 27.5 लाख रुपये जुर्माना देने के लिए कहा है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, टेलीकॉम कंपनी ने ग्राहक की उचित तरीके से पहचान किए बिना एक डुप्लिकेट सिम जारी कर दिया था और उस सिम का इस्तेमाल करके पीड़ित के बैंक खाते से अवैध तरीके से 68.5 लाख रुपये निकाल लिए गए थे.
अख़बार की रिपोर्ट अनुसार जिस व्यक्ति को डुप्लिकेट सिम जारी किया गया था, उसने आईडीबीआई बैंक के एक खाते से 68.5 लाख रुपये निकालकर अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया. बाद में उसने पीड़ित को 44 लाख रुपये लौटा दिए. लेकिन पीड़ित को बाक़ी रकम नहीं लौटाई.
अख़बार लिखता है कि 25 मई, 2017 को पीड़ित का मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गया था. उसने इसकी शिकायत वोडाफोन आइडिया के हनुमानगढ़ दफ़्तर में कराई जिसके बाद उसे एक नया सिम दिया गया. बार-बार की शिकायतों के बावजूद नए सिम को कंपनी ने एक्टिवेट नहीं किया.
पीड़ित ने इसके बाद कंपनी के जयपुर दफ़्तर में शिकायत की जहां अगले दिन उसका सिम एक्टिव कर दिया गया लेकिन इस बीच उसके खाते से 68.5 लाख रुपये निकाले जा चुके थे.
वोडाफोन आइडिया के ख़िलाफ़ जारी किए गए इस आदेश में कहा गया है कि वो पीड़ित को 2.31 लाख ब्याज के रूप में, 72,000 रुपये उसकी जमा राशि के और 24 लाख रुपये उसे हुए नुक़सान की भरपाई करेगी.
अगर कंपनी एक महीने के भीतर इस रकम का भुगतान नहीं कर पाई तो उसे 10 फीसदी की दर से ब्याज भरना होगा. वोडाफोन इस आदेश को सक्षम अदालत में चुनौती दे सकती है.

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चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया के कारण दुनिया भर के उद्योगों को लगा झटका
सेमीकंडक्टर चिप की किल्लत के कारण दुनिया भर के उद्योगों, ख़ासकर ऑटो इंडस्ट्री को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
कारोबारी अख़बार बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, आसियान देशों में कोरोना के डेल्टा वर्जन के बढ़ते मामले और कम वैक्सीन दर, साथ में कोविड को लेकर चीन में लागू कड़े कायदे-कानूनों के कारण कई फैक्ट्रियां और बंदरगाह बंद हैं. इसके अलावा कच्चे माल और कंटेनर की कमी की भी समस्या है.
अख़बार के मुताबिक़, दुनिया भर में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री 439 अरब डॉलर की है. सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र ताइवान है जहां 63 फ़ीसदी फैक्ट्रियां हैं. इसके बाद दक्षिण कोरिया (18 फ़ीसदी) का नंबर आता है और तीसरे नंबर पर चीन (6 फ़ीसदी) है.
बाक़ी 13 फ़ीसदी फैक्ट्रियां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हैं.
इसका असर भारत की ऑटो इंडस्ट्री पर भी पड़ा है. ऑटोमोटिव चिप्स के लिए जो इंतज़ार पहले 8-12 हफ़्तों का होता था, अब वो बढ़कर 36-40 हफ़्तों का हो गया है.

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कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों और एशियाई देशों में कोविड प्रोटोकॉल से जुड़ी पाबंदियों के कारण सप्लाई चेन नेटवर्क पर असर पड़ा है.
इसका सबसे बड़ा उदाहरण मारुति सुज़ुकी है.
हरियाणा और गुजरात में कंपनी के सभी प्लांट्स से जितना उत्पादन होना था, चिप की कमी के कारण उसमें 60 फ़ीसदी की कमी आई है.
चिप की कमी का असर रिलायंस जियो के सस्ते स्मार्टफ़ोन की लॉन्चिंग पर भी पड़ा है.
बिज़नेस स्टैंडर्ड लिखता है कि कंपनी ने इसे फिलहाल के लिए टाल दिया है.

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'न्यूज़क्लिक' और 'न्यूज़लॉन्ड्री' के दफ़्तर में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का 'सर्वे'
कोलकाता से छपने वाले टेलीग्राफ़ अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, दो न्यूज़ वेबसाइट के दफ़्तरों में शुक्रवार दोपहर को शुरू हुआ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का 'सर्वे' आधी रात तक चला.
अख़बार के मुताबिक़ ये दोनों वेबसाइट केंद्र सरकार को लेकर आलोचनात्मक रुख़ रखती थीं.
इनमें एक 'न्यूज़क्लिक' वेबसाइट भी है. फरवरी में इस वेबसाइट के दफ़्तर और स्टाफ़ के घरों पर प्रवर्तन निदेशालय की रेड पांच दिनों तक चली थी. उस समय वेबसाइट पर एक विदेशी निवेश से जुड़े पैसे के अवैध लेन-देन का आरोप लगाया गया था.
दूसरी वेबसाइट 'न्यूज़लॉन्ड्री' है. अख़बार के मुताबिक़ 'न्यूज़क्लिक' के दफ़्तर में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का 'सर्वे' शुक्रवार रात 12:15 मिनट पर ख़त्म हो गया था.
ये दोनों वेबसाइट ऑनलाइन न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स के एसोसिएशन 'डिजिपब न्यूज़ इंडिया फाउंडेशन' के संस्थापकों में से हैं.
ऑनलाइन मीडिया पर केंद्र सरकार के प्रस्तावित नियमन को इस संस्था ने चुनौती दे रखी है.

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किसानों पर पांच साल में कर्ज़ 57.7 फ़ीसदी बढ़ा
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के किसान परिवारों पर औसत कर्ज़ 57.7 फ़ीसदी बढ़ गया है.
नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफ़िस की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, साल 2013 में देश के किसान परिवारों पर औसतन 47,000 रुपया कर्ज़ हुआ करता था लेकिन साल 2018 में ये बढ़कर 74,121 रुपया हो गया.
भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को देश के किसान परिवारों की स्थिति पर ये रिपोर्ट जारी की.
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2012-13 की तुलना में साल 2018-19 में अलग-अलग स्रोतों से किसान परिवारों की औसत मासिक आय 59 फ़ीसदी बढ़कर 10,218 रुपये हो गई है. साल 2012-13 में ये रकम 6,426 रुपये ही हुआ करती थी.
आमदनी में वृद्धि का 50 फीसदी हिस्सा मज़दूरी में इज़ाफे की वजह से मुमकिन हो पाया है. साल 2013 में ये रकम 2,071 रुपये प्रति माह हुआ करती थी जो साल 2018 में बढ़कर 4,063 रुपये प्रति माह हो गई है.
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