कुमार मंगलम बिड़ला के पत्र के बाद वोडाफ़ोन आइडिया लिमिटेड ने गंवाए 2,700 करोड़ - प्रेस रिव्यू

कुमार मंगलम बिड़ला

इमेज स्रोत, Getty Images

एक ख़त के सामने आने के बाद टेलीकॉम सेवा कंपनी वोडाफ़ोन आइडिया लिमिटेड (VIL) ने मंगलवार को एक दिन में 2,700 करोड़ रुपये की अपनी बाज़ार पूंजी को गंवा दी.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द टेलीग्राफ़' लिखता है कि कंपनी के चैयरमेन कुमार मंगलम बिड़ला ने जून में कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा को एक पत्र लिखा था जिसके सार्वजनिक होने के बाद कंपनी की पूंजी में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ जून में लिखे गए इस पत्र में बिड़ला ने क़र्ज़ के भारी बोझ तले दबी इस कंपनी की 27.66% हिस्सेदारी को सरकार को बेचने का प्रस्ताव दिया था ताकि VIL चलती रहे.

उन्होंने पत्र में लिखा था कि VIL की आर्थिक स्थिति 'तेज़ी से बदतर' हो रही है. इसके बावजूद 'परिचालन दक्षता में सुधार के लिए हर संभव प्रयास' किया जा रहा है, लेकिन 'VIL को चलाए रखने और सरकारी राशि लौटाने के लिए 25,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है.'

उन्होंने कहा था कि सरकार के समर्थन के बिना जुलाई 2021 तक VIL की वित्तीय स्थिति न बदलने वाली स्थिति तक पहुंच जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि वो 27 करोड़ भारतीयों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझते हुए मालिकाना हक़ को ट्रांसफ़र का प्रस्ताव देते हैं.

इस बात का सामने आना ही था कि मंगलवार को शेयर बाज़ार में VIL के स्टॉक 10 फ़ीसदी से ज़्यादा नीचे आ गए और 52 हफ़्तों में सबसे निचले स्तर पर रहे.

VIL पर इस समय सरकार का 50,399.63 करोड़ का बकाया है जिसमें से वह 7,854.37 करोड़ रुपये दे चुका है.

दिल्ली जाने के लिए नहीं कहा गया था: योगी आदित्यनाथ

योगी

इमेज स्रोत, NURPHOTO/GETTY

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' को दिए एक इंटरव्यू में साफ़ किया है कि उन्हें केंद्रीय नेतृत्व ने दिल्ली भेजने के लिए नहीं कहा था.

अख़बार से उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य के मुद्दों को लेकर मिले थे और वो उनसे कई बार मिलते रहे हैं और सलाह लेते रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि बीते महीने कोविड-19 महामारी की स्थिति संभालने को लेकर राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए गए थेॉ, जिसके बाद राज्य में मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने को लेकर चर्चाएं ज़ोरों पर थीं. फिर बाद में योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी से मुलाक़ात की थी.

हालांकि, अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव में सामाजिक समीकरण के अलावा किसान आंदोलन पर अख़बार से बात की है.

उन्होंने एक ओर जहां कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के प्रदर्शन को राजनीति से प्रेरित बताया है, वहीं कहा है सपा-बसपा को सामाजिक एकजुटता पर बोलने का हक़ नहीं है क्योंकि वे विभिन्न समुदायों के बीच संघर्ष के समर्थक रहे हैं.

कोरोना वायरस संक्रमण के आर-फ़ैक्टर ने बढ़ाई चिंता

मरीज़

इमेज स्रोत, Getty Images

देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते आर-नॉट ने तीसरी लहर को लेकर चिंता बढ़ा दी है. आर-नॉट को आर-फ़ैक्टर भी कहते हैं. इससे पता चलता है कि कोरोना वायरस से संक्रमित एक व्यक्ति आगे कितने व्यक्तियों को संक्रमित कर रहा है.

दैनिक जागरण लिखता है कि आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आर-नॉट बढ़ रहा है, वहीं सात में स्थिर बना हुआ है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के अनुसार देश में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में आर-नॉट सबसे अधिक 1.4 पर पहुंच गया है और इसमें बढ़ोतरी हो रही है.

इसको इस तरह से समझा जा सकता है कि इन दोनों राज्यों में कोरोना संक्रमित 100 लोग दूसरे 140 लोगों में संक्रमण फैला रहे हैं. आर फ़ैक्टर लक्षद्वीप में 1.3, तमिलनाडु, मिज़ोरम और कर्नाटक में 1.2 और केरल, पुडुचेरी में 1.1 है.

एक से अधिक आर-नॉट होने का सीधा मतलब यह है कि इन राज्यों में एक संक्रमित व्यक्ति एक से अधिक व्यक्तियों तक संक्रमण फैला रहा है. इसके कारण आगे तीसरी लहर आ सकती है.

वहीं नागालैंड, हरियाणा, मेघालय, गोवा, झारखंड, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में आर-नॉट एक पर स्थिर है यानी यहां नए मरीज़ों की संख्या न तो बढ़ रही है और न कम हो रही है. केवल आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में आर-नॉट में कमी देखी जा रही है.

कश्मीर में पत्थरबाज़ी की घटनाओं में 88% की गिरावट

पत्थरबाज़ी

इमेज स्रोत, Getty Images

जम्मू-कश्मीर में साल 2019 के बाद से सुरक्षाबलों की भारी तैनाती, कोरोना प्रतिबंधों और चरमपंथी समूहों के ख़िलाफ़ कार्रवाइयों के कारण पत्थरबाज़ी की घटनाओं में ख़ासी कमी दर्ज की गई है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' गृह मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से लिखता है कि साल 2019 की तुलना में इस साल जनवरी और जुलाई के बीच तक़रीबन 88 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

इसके साथ ही बताया गया है कि इन घटनाओं में आम लोगों और सुरक्षाबलों को लगने वाली चोटों में 84 से 93 फ़ीसदी की कमी दर्ज की गई है.

आंकड़ों के अनुसार साल 2019 में जनवरी से जुलाई के बीच जहां पत्थरबाज़ी की 618 घटनाएं हुई थीं, वहीं यह साल 2020 में घटकर 222 ही रह गईं जबकि 2021 में सिर्फ़ 76 घटनाएं हुईं.

साल 2019 में जहां इस दौरान सुरक्षाबलों को 64 चोटें आई थीं वहीं 2021 में सिर्फ़ 10 चोटें आईं.

सुप्रीम कोर्ट बोला- हर मामले में अपील का चलन रोकना होगा

सुप्रीम कोर्ट

इमेज स्रोत, HINDUSTAN TIMES

हर मामले में याचिका लगा देने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताई है. फ़ालतू याचिकाओं से परेशान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सामूहिक रूप से हम सभी न्यायिक प्रणाली का मज़ाक बना रहे हैं.

अमर उजाला लिखता है कि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इस तरह की याचिका की वजह से उसे उन मामलों के निपटारे में दिक्क़त हो रही है, जिनका निपटान ज़रूरी है और लोग लंबे समय से न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर मामले में अपील दायर करने के चलन को हतोत्साहित करना होगा.

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि एक आम इंसान को हमारी बारीकियों या बड़े क़ानूनी सिद्धांतों में कोई दिलचस्पी नहीं है, जिसके बारे में हम लगातार बात करते रहते हैं.

पीठ ने कहा कि एक याचिकाकर्ता यह जानने में उत्सुक रहता है कि उसके मुक़दमे में दम है या नहीं और यह जानने के लिए वह अनिश्चित काल तक इंतज़ार नहीं करना चाहता कि वह सही था या नहीं. अगर फ़ैसला आने में 10 या 20 साल लग जाएं, तो वह उस फ़ैसले का क्या करेगा.

ये भी पढ़ें:-

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)