श्रीलंका ने पिछले साल की तरह भारत को फिर किया निराश?- प्रेस रिव्यू

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भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला श्रीलंका के दौरे पर हैं और उनकी मुलाक़ात राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे से भी हुई है. श्रीलंका और भारत के रिश्तों पर भी चीन की छाया मंडराती रहती है और दोनों देशों का द्विपक्षीय संबंध चीन की मौजूदगी से प्रभावित होता है.

इसके अलावा भारत और श्रीलंका के रिश्तों में तमिलों का मुद्दा भी काफ़ी अहम है. अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने श्रृंगला के श्रीलंका दौरे के पूरे होने और दौरे में हुई वार्ता को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.

अख़बार के अनुसार, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे ने कहा कि श्रीलंकाई संविधान में 13वें संशोधन की कमज़ोरी और मज़बूती को समझना बेहद ज़रूरी है. गोटाभाया ने कहा कि इस हिसाब से ही वार्ता आगे बढ़ाने की ज़रूरत है.

हालांकि उन्होंने 1960 और 1970 के दशक में दोनों देशों के जो संबंध थे, उसी स्तर पर रिश्तों में गर्मजोशी लाने की बात कही. भारत चाहता है कि श्रीलंका अपने संविधान के 13वें संशोधन का पालन करे. यह संशोधन 1987 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और तत्कालीन श्रीलंकाई राष्ट्रपति जेआर जयवर्धने के बीच समझौते के बाद हुआ था.

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इसके तहत श्रीलंका के नौ प्रांतों में काउंसिल को सत्ता में साझीदार बनाने की बात है. इसका मक़सद ये था कि श्रीलंका में तमिलों और सिंहलियों का जो संघर्ष है, उसे रोका जा सके. 13वें संशोधन के ज़रिए प्रांतीय परिषद बनाने की बात थी ताकि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो सके.

इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, हाउसिंग और भूमि से जुड़े फ़ैसले लेने का अधिकार प्रांतीय परिषद को देने की बात थी. लेकिन इनमें से कई चीज़ें लागू नहीं हो सकीं. भारत चाहता है कि श्रीलंका इसे लागू करे ताकि जाफ़ना में तमिलों को अपने लिए नीतिगत स्तर पर फ़ैसला लेने का अधिकार मिले.

भारत को श्रीलंका की सरकार पर 13वां संविधान संशोधन लागू करने पर संदेह रहा है. 2011 में अमेरिकी दूतावास के केबल्स विकीलीक्स के ज़रिए द हिन्दू को मिले थे. केबल्स से पता चला था कि भारत इस संशोधन को लेकर सक्रिय रहा, लेकिन श्रीलंका तैयार नहीं हुआ. लेकिन भारत के लिए तमिल प्रश्न चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच प्राथमिकता खोने लगते हैं.

अख़बार के अनुसार, श्रृंगला की राष्ट्रपति से मुलाक़ात मंगलवार को हुई. श्रृंगला ने अपने दौरे के आख़िरी दिन दोनों देशों की द्विपक्षीय परियोजनाओं में तेज़ी लाने के लिए बात की.

भारतीय विदेश सचिव ने राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे के सामने दोहराया कि भारत चाहता है कि श्रीलंका संविधान के 13वें संशोधन के सारे प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करे. इनमें सत्ता का हस्तांतरण और जल्द ही प्रांतीय परिषदों के चुनाव करने की बात शामिल है. भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि 34 साल पुराना क़ानून श्रीलंका में अब भी विवादित ही है.

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अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच छोटी अवधि और लंबी अवधि के संबंधों को और मज़बूत करने पर सहमति बनी है. गोटाभाया ने ये उम्मीद भी जताई कि 1971 में तत्कालीन श्रीलंकाई प्रधानमंत्री सिरिमाओ भंडारनायके ने हिन्द महासागर को एक शांति क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, भारत उसका समर्थन करेगा.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारतीय विदेश सचिव ने इलाक़े में समुद्री तटों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. श्रीलंका ने हाल ही में भारी मात्रा में नार्कोटिक्स ज़ब्त किया था. भारत को संदेह है कि यह क्षेत्रीय ड्रग माफ़िया से जुड़ा है. भारत ने कहा है कि श्रीलंका की सुरक्षा और शांति के लिए ख़तरा भारत के लिए भी ख़तरा है और श्रीलंका को इसका वाहक नहीं बनना चाहिए.

राष्ट्रपति गोटाभाया की टिप्पणी को भारत के साथ रिश्ते पटरी पर लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. पिछले साल श्रीलंका ने एकतरफ़ा फ़ैसला लेते हुए भारत और जापान के साथ त्रिपक्षीय पोर्ट टर्मिनल प्रोजेक्ट समझौते को रद्द कर दिया था.

इस समझौते पर तीनों देशों ने 2019 में हस्ताक्षर किए थे. भारत की एक चिंता ये भी रही है कि उसके प्रोजेक्ट की गति बहुत धीमी है. दूसरी तरफ़ श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में चीन का दख़ल बढ़ता जा रहा है.

महिंदा राजपक्षे

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हालांकि पिछले हफ़्ते अडानी समूह ने 55 फ़ीसदी हिस्सेदारी के साथ श्रीलंका के जॉन कील्स होल्डिंग्स और श्रीलंकाई पोर्ट अथॉरिटी के साथ वेस्ट कॉन्टेनर टर्मिनल को विकसित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किया है. कहा जा रहा है कि श्रीलंका ने भारत को इस समझौते से मनाने की कोशिश की है.

श्रीलंका के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों ने ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही है. त्रिंकोमाली तेल टैंक फ़ार्म विकसित करने को लेकर दोनों देशों के बीच गंभीरता से बात हुई है. श्रीलंका का कहना है कि इससे दोनों देशों को फ़ायदा होगा. श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री भारत का दौरा कर सकते हैं. हालांकि इस प्रोजेक्ट में भारत के शामिल होने का विरोघ भी हो रहा है.

तेजस्वी यादव

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बिहार में बिखरा महागठबंधन

बिहार में एनडीए के ख़िलाफ़ आरजेडी के नेतृत्व में बना महागठबंधन का कुनबा टूट गया है. बुधवार को कांग्रेस ने तारापुर और कुशेश्वरस्थान विधानसभा क्षेत्र में 30 अक्टबूर को होने वाले उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी.

इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल ने दोनों विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी. कांग्रेस ने कुशेश्वरस्थान (सुरक्षित) सीट पर अपना दावा किया था और और आरजेडी पर एकतरफ़ा फ़ैसला लेने का आरोप लगाया था.

इस ख़बर को हिन्दी और अंग्रेज़ी के सभी अख़बारों ने प्रमुखता से जगह दी है. अख़बारों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि आरजेडी ने तर्क दिया है कि उसने इस मामले में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से बात कर ली थी. कांग्रेस ने बुधवार को तारापुर (मुंगेर) से राजेश कुमार मिश्रा को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की और अतिरेक कुमार को कुशेश्वरस्थान (दरंभगा) से उम्मीदवार बनाया है.

कांग्रेस पार्टी के महासचिव मुकुल वासनिक ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि दोनों उम्मीदवारों की पुष्टि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने की है. इससे पहले आरजेडी ने यहाँ से अरुण कुमार शाह और गणेश भारती को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी.

सुप्रीम कोर्ट

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प्रमोशन में आरक्षण पर कोर्ट का सवाल

हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने पहले पन्ने पर पहली ख़बर लगाई है- प्रमोशन में आरक्षण को जायज़ ठहराने के आँकड़े बताए सरकार: सुप्रीम कोर्ट. अख़बार ने अपनी ख़बर में लिखा है कि प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम सवाल किए हैं. अदालत ने सरकार से पूछा कि अगर वह अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देना और उसे जारी रखना चाहती है तो उसे जायज़ ठहराने के लिए उसके पास क्या आधार है.

अख़बार के अनुसार, कोर्ट ने पूछा है कि क्या सरकार के पास आँकड़े हैं, जिनसे पता चलता हो कि इन वर्गों को नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है और आरक्षण समग्र प्रशासनिक क्षमता पर प्रतिकूल असर नहीं डालेगा. अगर ऐसा नहीं है तो सरकार ने ये आँकड़े जुटाने के लिए अब तक क्या क़वायद की है.

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