मुनव्वर फ़ारूकी के शो के लिए बेंगलुरु पुलिस ने नहीं दी इजाज़त

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूकी के शो को पुलिस ने रद्द कर दिया है. मुनव्वर फ़ारूकी आज बेंगलुरु में शो करने वाले थे लेकिन पुलिस ने आपत्ति जताते हुए उनके शो को रोक दिया है.
पुलिस ने शांति भंग होने और सांप्रदायिक सद्भाव के उल्लंघन की आशंका के बाद फारुकी का शो के आयोजन को रद्द कर दिया है.
आयोजकों के प्रवक्ता सिद्धार्थ दास ने बताया कि डोंगरी टू नो-वेयर शो के आयोजक समूह को नोटिस मिला था और वे नोटिस का पालन करेंगे. उनकी ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि हम क़ानून को मानने वाले नागरिक हैं और पुलिस के नोटिस का पालन करेंगे.
वहीं फ़ारूकी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से इस संबंध में एक पोस्ट किया है और लिखा है कि आज बेंगलुरु शो कैंसल हो गया.
इसके आगे वह लिखते हैं-
इनकी नफ़रत का बहाना बन गया हूं
हंसा कर कितनों का सहारा बन गया हूं
टूटने पर इनकी ख़्वाहिश होगी पूरी
सही कहते हैं, मैं सितारा बन गया हूं
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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि आयोजकों को बहुत साफ़ साफ़ शब्दों में कहा गया कि शो का आयोजन नहीं किया जा सकता है क्योंकि इससे शांति भंग होने की आशंका है.
इन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आयोजकों को मौखिक तौर पर और लिखित तौर पर, दोनों ही तरीक़े से बता दिया गया है.
मुनव्वर फ़ारूकी को जनवरी महीने में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से गिरफ़्तार किया गया था. उनकी गिरफ़्तारी इस आशंका के तहत की गई थी कि अपने शो में वह 'आपत्तिजनक चुटकुले' सुनाएंगे.
आयोजकों को जो नोटिस दिया गया है उसमें पुलिस की ओर से लिखा गया कि - यह सूचना मिली है कि मुनव्वर फ़ारूकी एक विवादित शख़्स हैं. वह दूसरे धर्मों के देवी-देवताओं को लेकर विवादित बयान देते हैं. कई राज्यों में उनके कॉमेडी शो पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके अतिरिक्त यह भी ज्ञात हुआ है कि उनके ख़िलाफ़ इंदौर के तुकोगंज थाना में मामला दर्ज है. इसके अलावा और भी कई राज्यों में उनके ख़िलाफ़ मामले दर्ज हैं.

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इस पत्र पत्र में आगे कहा गया है कि- पुलिस के पास यह जानकारी है कि कई संगठन मुनव्वर फ़ारूकी के स्टैंड अप कॉमेडी शो का विरोध कर रहे हैं. अगर इसके आयोजन की अनुमति दी जाती है तो इससे अराजकता भड़क सकती है. सार्वजनिक शांति और सद्भाव बिगड़ सकता है. जिससे कानून व्यवस्था की समस्या हो सकती है. इसलिए यह सलाह दी जाती है कि आप 28 नवंबर 2021 का शाम को पांच बजे गुड शेफ़र्ड ऑडिटोरियम में होने वाले मुनव्वर फ़ारूकी के कार्यक्रम को रद्द कर दें.
पुलिस ने ऑडिटोरियम के अधिकारियों को भी इस संबंध में सूचित किया है.
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सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का उल्लंघन
हालांकि पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता विनय श्रीनिवास ने बीबीसी हिंदी से कहा कि ऐसा करके बेंगलुरु पुलिस सुप्रीम कोर्ट के साल 2019 के उस फ़ैसले का उल्लंघन कर रही है जिसमें कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को एक शो के सुरक्षित आयोजन का निर्देश दिया था.
श्रीनिवास ने बताया यह आदेश 'भोबिश्योतेर भूत फ़िल्म के प्रदर्शन से जुड़ा हुआ था.
श्रीनिवासन ने इस संबंध में एक ट्वीट भी किया है. वह लिखते हैं, "बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त, आयोजकों पर #munawaarfaruqui शो रद्द करने का दबाव डाल रहे थे. आप उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और बेंगलुरुवासियों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार का उल्लंघन कर रहे हैं. यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है."

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इंदौर में हुई थी गिरफ़्तारी
मूल रूप से गुजरात के रहने वाले मुनव्वर फ़ारूकी को इस साल की शुरुआत में इंदौर पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. जिसके बाद क़रीब एक महीने से लंबे समय तक वह जेल में रहे थे.
कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी को 1 जनवरी को इंदौर पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. उनके अलावा चार अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. इन सभी पर हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी का आरोप लगाया गया था.
मुनव्वर फ़ारूक़ी इंदौर के मुनरो कैफ़े में अपना कार्यक्रम करने के लिये आये थे. उसी दौरान हिंदू रक्षक संगठन के नेताओं ने वहां पहुंच कर हंगामा कर दिया था.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बैंच ने उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए कहा था, "ऐसे लोगों को बख़्शा नहीं जाना चाहिए."
निचली अदालतों से बेल की अर्जी खारिज होने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से उन्हें अंतरिम ज़मानत मिल गयी थी.
फ़ारूकी के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश में भी मामला दर्ज हो चुका है.
19 अप्रैल 2020 को पेशे से वकील और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता आशुतोष मिश्रा ने मुनव्वर फ़ारुक़ी के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज कराया था.
इसमें उन पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया गया था. उन पर आरोप था कि सोशल मीडिया पर मौजूद उनके एक वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं और गोधरा ट्रेन कांड में शिकार हुये लोगों का मज़ाक़ उड़ाया गया है.
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