किसान महापंचायत: लखनऊ में आज किसान दिखाएंगे ताक़त, क्या है एजेंडा?

लखनऊ में किसानों की महापंचायत

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    • Author, अनंत झणाणे
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिन्दी के लिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद संयुक्त किसान मोर्चा लखनऊ में सोमवार को अपना पहला शक्ति-प्रदर्शन करने जा रहा है. इसका नेतृत्व संयुक्त किसान मोर्चे के सभी वरिष्ठ नेता करेंगे और इसमें मोर्चे की प्रदेश भर की इकाइयों से जुड़े संगठन किसानों की भीड़ लखनऊ लेकर आएंगे.

लखनऊ के कांशीराम ईको पार्क में "एमएसपी अधिकार महापंचायत" का आयोजन हो रहा है.

इस बारे में भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया, "उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और लखीमपुर खीरी की घटना के मद्देनज़र हमने घोषणा की थी कि हम लखनऊ में किसान महापंचायत करेंगे. लेकिन किसानों को अब तक न्याय नहीं मिला.''

उन्होंने आगे कहा, ''लखीमपुर की हिंसा वाले मामले की जांच भी सही दिशा में नहीं बढ़ रही है. उस जांच में अब किसानों को फंसाने का काम हो रहा है. जैसे ही सबूत पुख़्ता होते जा रहे हैं वैसे ही अधिक से अधिक किसानों को उसमें बुक कर दिया जा रहा है, जिससे इस केस को अंज़ाम तक ले जाया जा सके. घायलों को मुआवज़े की बात की गई थी लेकिन सरकार ने आज तक एक भी रुपया नहीं दिया.''

एमएसपी अधिकार महापंचायत के बारे में धर्मेंद मलिक कहते हैं, ''एमएसपी अधिकार महापंचायत का मानना है कि जब तक एमएसपी का क़ानून नहीं होगा, तब तक किसानों की आय दोगुनी नहीं होगी और उसका क़र्ज़ बढ़ता ही जाएगा. हम अभी लाभकारी मूल्य की बात नहीं कर रहे. हम तो बस कह रहे हैं कि सरकार जो दाम घोषित करती है बस वो किसानों को मिलना चाहिए."

लखनऊ में किसानों की महापंचायत

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लखनऊ में किसान आंदोलन का पहला सम्मेलन

वैसे तो उत्तर प्रदेश का किसान आंदोलन राज्य के पश्चिमी हिस्से में केंद्रित रहा. बाद में लखीमपुर खीरी में किसानों और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद ये मामला तराई इलाक़े तक जा पहुंचा. लेकिन पहली बार आंदोलन से जुड़ी कोई पंचायत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में होने जा रही है.

उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के अपने तीन दिन के दौरे के बाद दिल्ली लौटे हैं. लेकिन वे सोमवार को भी बांदा के एक दिवसीय दौरे पर राज्य में रहेंगे.

संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक़ बुंदेलखंड, अवध, तराई, पश्चिम और पूर्वांचल सभी क्षेत्रों के किसान इस महापंचायत में आएंगे. सांकेतिक तौर पर हरियाणा और पंजाब के भी कुछ किसान इसमें शरीक़ होंगे.

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लखीमपुरी कांड एक बढ़ा मुद्दा

इस महापंचायत की एक बड़ी मांग केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र की बर्ख़ास्तगी भी है. धर्मेंद्र मालिक के मुताबिक़, "मंत्री अजय मिश्र की बर्ख़ास्तगी की मांग लगातार बनी हुई है तब तक बनी रहेगी जब तक कि वो बर्ख़ास्त नहीं हो जाते."

महापंचायत के आयोजन में हाथ बंटाने में सीतापुर के एहलिया से आए किसान जसवंत सिंह भी हैं. उनका कहना है, "सीतापुर के बहुत सारे किसान गाड़ियों, ट्रैक्टरों और बसों से इस महापंचायत में शामिल होने के लिए आएंगे. सबसे पहले हमारी आवाज़ लखीमपुर खीरी में मारे गए किसानों के लिए ये उठेगी कि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा.''

वे कहते हैं, ''जब तक प्रशासन उस मामले के दोषी लोगों को सज़ा नहीं दिलाता और मंत्री जी के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होती तब तक हम लड़ते रहेंगे. हमारे दिल का दुख है कि जब हमने कोई ग़लती ही नहीं की और हम शांत रहकर अपना विरोध कर रहे थे, तब क्यों हमारे लोगों को पीछे से रौंद दिया गया. सबने देखा कि कैसे हमारे साथ ज़्यादती हुई, फिर भी हमें न्याय नहीं मिल रहा. प्रशासन आज भी ढिलाई बरत रहा है."

वैसे इस महापंचायत में दूसरे किसान संगठन भी जुड़ रहे हैं. अखिल भारतीय किसान महासभा के उत्तर प्रदेश के महामंत्री मुकुट सिंह का कहना है कि, "प्रधानमंत्री ने अभी घोषणा की है कि ये क़ानून संसद से पास होकर बना है तो संसद की प्रक्रिया अभी जारी है. हम मान भी लें कि प्रधानमंत्री ऐसा करेंगे फिर भी लड़ाई अभी जारी है. एमसएसपी का जो सवाल है, वो बहुत बड़ा सवाल है. उत्तर प्रदेश में धान अभी 1,100-1,200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि एमएसपी 1940 रुपये है. तो ये सारे मुद्दे अभी ताज़ा हैं."

वीडियो कैप्शन, कृषि क़ानूनों को वापस लेना मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक या मजबूरी?

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