महाराष्ट्र में अचानक से सांप्रदायिक तनाव क्यों बढ़ रहा है?

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- Author, दीपाली जगताप
- पदनाम, बीबीसी मराठी
महाराष्ट्र के अमरावती, नांदेड़ और मालेगाँव में बीते शुक्रवार को सांप्रदायिक तनाव फैलने की ख़बर आई और इसके चलते पुलिस ने एहतियात के तौर पर राज्य के कुछ ज़िलों में क़र्फ्यू भी लगा दिया.
संवेदनशील इलाक़ों में गश्त बढ़ाई गई है और रविवार से अमरावती, मालेगाँव, नागपुर और पुणे में क़र्फ्यू लागू दिया गया.
महाविकास अघाड़ी गठबंधन सरकार इस तनाव को उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए बीजेपी की साज़िश बता रही है. वहीं, बीजेपी इसे राज्य सरकार की नाकामी बता रही है.
लेकिन महाराष्ट्र में अचानक यह स्थिति क्यों पैदा हुई और संप्रादायिक तनाव क्यों बढ़ गया? क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण हैं?

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अब तक क्या हुआ है?
अमरावती में 12 नवंबर की हिंसा के बाद 17 नवंबर तक क़र्फ्यू लगा दिया गया है. पठान चौक, इतवारा बाज़ार, चित्रा चौक जैसे संवेदनशील इलाक़ों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं.
नागपुर के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा कि नागपुर में क़र्फ्यू लगा दिया गया है और पाँच से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है.
त्रिपुरा में हिंसा के विरोध में 12 नवंबर को मालेगाँव में बंद का आह्वान किया गया था. बंद के दौरान दोपहर तक शांति रही, लेकिन उसके बाद पत्थरबाज़ी की घटनाएं बढ़ गईं.
त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा की घटना के विरोध में अमरावती ज़िलाधिकारी कार्यालय के सामने एक विरोध मार्च आयोजित किया गया. विरोध प्रदर्शन में हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने हिस्सा लिया था. हालांकि, जैसे ही विरोध हिंसक हुआ, शहर में तनाव बढ़ गया.
मालेगाँव में, रज़ा अकादमी सहित अन्य मुस्लिम संगठनों द्वारा बंद का आह्वान किया गया था. त्रिपुरा में दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर किया गया बंद दोपहर तक शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा.

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नासिक रेंज के आईजी बीजी शेखर ने कहा, "कुछ संगठनों ने मालेगाँव बंद का आह्वान किया था, जिसके बाद पुलिस को तैनात किया गया था. अधिकारी और पुलिस के जवान हाई अलर्ट पर थे. प्रतिनिधिमंडल के बयान के बाद 400-500 लोगों की भीड़ जमा हो गई. उन्हें अनुमति नहीं दी गई. उन्होंने तोड़फोड़ की और एक अस्पताल और कुछ दुकानों को नुक़सान पहुँचाया."
जब तक स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास किए गए, तब तक लगभग तीन से चार हज़ार लोगों की भीड़ जमा हो चुकी थी. उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.
इस कार्रवाई में तीन पुलिस अधिकारी और सात पुलिसकर्मी घायल हो गए. इनमें से दो गंभीर रूप से घायल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों के साथ दो नागरिक भी घायल हुए हैं.
देश के पूर्वोतर राज्य त्रिपुरा में पिछले कुछ दिनों के दौरान सांप्रदायिक तनाव की स्थिति देखने को मिली थी. इसे बांग्लादेश में हुई हिंसा की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है. बांग्लादेश में हुई इस घटना के बाद विश्व हिंदू परिषद और जमात-ए-उलेमा (हिंद) जैसे धार्मिक संगठन आमने-सामने आ गए.

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बीजेपी नेता गिरफ़्तार
अमरावती हिंसा के मामले में शहर कोतवाली पुलिस ने सोमवार को बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री अनिल बोंडे को गिरफ़्तार कर लिया.
रविवार को पुलिस ने उन्हें 12 घंटे तक हिरासत में रखा. पुलिस ने बीजेपी नेता तुषार भारतीय और मेयर चेतन गावंडे को भी गिरफ़्तार किया है. पुलिस ने कहा कि वह विधायक प्रवीण पोटे की भी तलाश कर रही है.
पता चला है कि क़र्फ्यू के दौरान हमले के सिलसिले में बीजेपी नेताओं को गिरफ़्तार किया गया है.
अमरावती की पुलिस आयुक्त आरती सिंह ने कहा, "संवेदनशील इलाक़ों में पुलिस बल तैनात है. साथ ही पुलिस द्वारा रूट मार्च निकाला जा रहा है. हम सामाजिक उपद्रव करने वालों को नहीं छोड़ेंगे."
उन्होंने लोगों से बिना घबराए शांति बनाए रखने की भी अपील की.
गिरफ़्तार किए गए बीजेपी नेता अनिल बोंडे ने कहा, "हम राजकमल चौक पर शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे. हमने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया था लेकिन नामुना गली क्षेत्र के एक विशेष समुदाय के कुछ युवा तलवार लेकर आ गए. फिर प्रतिक्रिया देखने को मिली. पूरा अमरावती शांतिपूर्ण है. हम लोग अपनी आवाज़ को संयम में रखने की कोशिश कर रहे हैं."
उन्होंने आगे कहा, ''लोगों के मन में ग़ुस्सा हो तो भी शांत रहना चाहिए. 12 तारीख़ को मारे गए लोगों को मुआवज़ा दिया जाना चाहिए. साथ ही सरकार को घायल युवक के इलाज का ख़र्च वहन करना चाहिए."
वहीं, महाराष्ट्र की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री एवं अमरावती की संरक्षक मंत्री यशोमती ठाकुर ने कहा कि संवेदनशील इलाक़ों में पाबंदियां बरकरार रखी जाएंगी.
यशोमती ठाकुर ने कहा, "क़र्फ्यू के बाद, लंबे समय तक स्थिति नियंत्रण में रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में क़र्फ्यू हटा लिया गया है. लेकिन कुछ वजहों से अंजनगाँव सुरजी तालुका में धारा- 144 अभी भी लागू है. हालात के सामान्य होने के बाद प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी."

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'महाविकास अघाड़ी सरकार को उखाड़ फेंकने की साज़िश'
सवाल यह है कि राज्य में हुई हिंसा के पीछे कौन है? इसको लेकर महाविकास अघाड़ी के नेताओं और मंत्रियों ने बीजेपी पर निशाना साधा है.
एनसीपी नेता और मंत्री नवाब मलिक ने एक संवाददाता सम्मेलन में रज़ा अकादमी के साथ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री आशीष शेलार की एक तस्वीर जारी की.
उन्होंने कहा, "आशीष शेलार रज़ा अकादमी के लोगों से मिल रहे थे. मेरे पास उनकी एक फोटो है. उन्हें बताना चाहिए कि आशीष शेलार वहाँ क्या कर रहा थे."
इसका जवाब देते हुए आशीष शेलार ने बताया है कि फोटो 2016-17 की है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा दंगों और उस समय की तस्वीरों में क्या संबंध है?
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "यह बैठक रज़ा अकादमी के कार्यालय में नहीं हुई थी. महाविकास अघाड़ी की विफलता को पुरानी तस्वीर से छिपाया नहीं जा सकता. अगर हम आपकी तस्वीर दिखाने लगे तो आपके पास चेहरा दिखाने के लिए कोई जगह नहीं होगी."
रज़ा अकादमी ने स्पष्ट किया है कि इन घटनाओं में उसका कोई हाथ नहीं है. वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने इस संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि रज़ा अकादमी के पास कभी भी महाराष्ट्र में दंगा भड़काने की ताक़त नहीं थी.
संजय राउत ने कहा, "रज़ा अकादमी ने लोगों को कुछ समय के लिए उकसाया है लेकिन सरकार ने उन पर कभी नियंत्रण नहीं किया. रज़ा अकादमी बीजेपी की कठपुतली है. रज़ा अकादमी के लोग वही कर रहे हैं जो भाजपा चाहती है."

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महाराष्ट्र में अस्थिरता और तनाव पैदा करना विपक्ष की एक चाल है?
इस मामले में कांग्रेस ने बीजेपी पर भी निशाना साधा है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने आरोप लगाया कि भाजपा दंगा भड़काकर चुनावी फ़ायदा उठाने की योजना बना रही है.
पटोले ने कहा, ''उत्तर प्रदेश समेत पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. त्रिपुरा की घटना के तहत बीजेपी महाराष्ट्र में दंगे भड़काने और उत्तर प्रदेश में राजनीतिक उथल-पुथल पैदा करने की साजिश कर रही है.''
उन्होंने आरोप लगाया, "बीजेपी पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र में स्थिर सरकार को अस्थिर करने में सफल नहीं हुई है. महाराष्ट्र में अशांति फैलाने के लिए सारी ताक़त लगा ली गई है. भाजपा देश के मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने की साज़िश कर रही है."

चुनाव पर क्या असर होगा?
महाविकास अघाड़ी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है. लेकिन उत्तर प्रदेश के चुनावों का महाराष्ट्र के इन ज़िलों से क्या लेना-देना है?
इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार संदीप प्रधान ने कहा, 'आर्यन ख़ान मामले में भी बीजेपी से जुड़े कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया था. 'आश्रम' के दो सीज़न रिलीज होने के बाद तीसरे सीजन की शूटिंग रोक दी गई है क्योंकि सिरीज़ के नाम पर आपत्ति जताई गई है."

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वरिष्ठ पत्रकार मृणालिनी नानिवाडेकर भी इस बात से सहमत हैं कि उत्तर प्रदेश का चुनाव सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर होगा लेकिन वह कहती हैं कि महाराष्ट्र की स्थिति के लिए यहां राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है.
मृणालिनी कहती हैं, "उत्तर प्रदेश चुनावों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का इस्तेमाल होगा. चुनाव के दौरान ऐसी कोशिशें कोई असामान्य बात नहीं हैं. लेकिन राज्य में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की है. दंगा मुक्त राज्य सरकार का काम है और यह बिगड़ रहा है."
उत्तर प्रदेश आबादी के नज़रिए से देश का सबसे बड़ा राज्य है और इस राज्य को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है.
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