आर्यन ख़ान ड्रग्स केस: आर्थर रोड जेल को सबसे ख़तरनाक जेल क्यों कहा जाता है?

- Author, मयंक भागवत
- पदनाम, बीबीसी मराठी
शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान जिस जेल की चहारदीवारी में तीन हफ़्ते से अधिक बंद रहे वो आर्थर रोड जेल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है.
ड्रग्स के मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने आर्यन को इसी महीने की शुरुआत में गिरफ़्तार किया था. उसके बाद से वे उन्हें उसी आर्थर रोड जेल में रखा गया, जहाँ कई कुख्यात गुंडे, शार्पशूटर्स, मकोका के तहत गिरफ़्तार अपराधी इत्यादि अपनी सज़ा काट रहे हैं.
कई फ़िल्मस्टारों, अंडरवर्ल्ड डॉन, राजनेताओं, उद्योगपतियों, आईपीएस अधिकारी जैसे कई मशहूर लोग इस जेल की हवा खा चुके हैं. इन हाइप्रोफ़ाइल क़ैदियों की वजह से ही यह जेल ख़बरों में बनी रहती है.
इसे देश के सबसे सुरक्षित जेलों में से एक माना जाता है. 26/11 हमले के दोषी अजमल आमिर कसाब का नाम भी इस जेल से जुड़ा है.
आख़िर क्या है इस जेल की वो ख़ासियत जो इसे सबसे सुरक्षित जेलों में से एक बनाती है?

इमेज स्रोत, Reuters
कब बना था आर्थर रोड जेल
1842 से 1846 तक बॉम्बे (अब मुंबई) के गवर्नर रहे सर जॉर्ज आर्थर के नाम पर इस जेल का नाम रखा गया है. इसे ब्रिटिश शासन काल के दौरान 1925-26 में बनाया गया था.
जब इसका निर्माण हुआ तो यह दो एकड़ ज़मीन पर बनाया गया था. लेकिन लगातार क़ैदियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए बैरक बनाए जाते रहे और इस तरह आज जेल परिसर छह एकड़ ज़मीन तक पसर गया है. यह मुंबई की सबसे बड़ी जेल है.
सेंट्रल जेल बनाने के लिए इसे 1994 में अपग्रेड किया गया था और वर्तमान आधिकारिक नाम 'मुंबई मध्यवर्ती कारागृह' दिया गया था. लेकिन पुलिस, अदालतों और आम जनता के बीच अभी भी इसे आर्थर रोड जेल के नाम से बेहतर जाना जाता है.
आर्थर रोड जेल के इतिहास के बारे में एबीपी न्यूज़ के क्राइम रिपोर्टर जितेंद्र दीक्षित कहते हैं, "आर्थर रोड जेल का असली नाम मुंबई सेंट्रल जेल है. लेकिन आर्थर रोड पर होने के कारण इसे आम तौर पर आर्थर रोड जेल के नाम से ही जाना जाता है."
यह जेल शहर के पश्चिम में महालक्ष्मी और मध्य के चिंचपोकली स्टेशन से 10 मिनट की दूरी पर है.

इमेज स्रोत, Getty Images
देश की सबसे ख़तरनाक जेल
आर्थर रोड जेल में अंडर ट्रायल क़ैदी रखे जाते हैं. जितेंद्र दीक्षित कहते हैं, "आर्थर रोड जेल को देश की सबसे ख़तरनाक जेलों में से एक माना जाता है."
इसका कारण यह है कि यहाँ संगीन अपराध के कई अभियुक्तों, यहां तक कि अंडरवर्ल्ड से जुड़े अभियुक्तों को भी रखा गया है.
12 मार्च 1993 को हुए मुंबई बम धमाकों के अभियुक्तों, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील, छोटा राजन और अरुण गवली के शार्प शूटर अभी भी इस जेल में ही क़ैद हैं.

अंडा सेल
गंभीर अपराध या आतंकवाद के अभियुक्तों को रखने के लिए यहां एक अत्यधिक सुरक्षित सेल है. जहां बेहद गंभीर किस्म के अपराध करने वालों को अकेले रखा जाता है.
जेल के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जेल में यह एक अंडाकार सेल है. इसिलिए इसे अंडासेल कहा जाता है.
सेल में कुख्यात गुंडे, शार्प शूटर और आतंकवाद के अभियुक्तों को रखा जाता है. 1993 बम धमाकों के अभियुक्तों को भी यहां रखा गया था.
अधिकारियों के मुताबिक आर्थर रोड जेल में क़ैदियों को रखने के लिए 14 सामान्य बैरक, एक उच्च सुरक्षा सेल, और छह अलग अलग बैरक हैं. बीते कुछ वर्षों के दौरान यहां बैरकों की संख्या में वृद्धि हुई है.
गैंग्स्टर अबू सलेम और दाऊद इब्राहिम के भाई इक़बाल कासकर के प्रत्यर्पण के बाद उन्हें भी यहां अडा सेल में रखा गया था.

इमेज स्रोत, Getty Images
जेल से जुड़े विवाद
आर्थर रोड जेल दाऊद गैंग, राजन गैंग और गवली गैंग से जुड़े कई नाम इस जेल में क़ैद हैं और ये जेल के अंदर अपने वर्चस्व की लड़ाई में एक दूसरे के सामने भी आते रहे हैं.
यहां कई बार गैंगवार की घटना भी हुई है. ऐसी ही एक घटना 2006 में हुई थी.
जितेंद्र दीक्षित बताते हैं कि जेल में अभियुक्त खाने की थाली और चम्मच को हथियार बनाते हैं तब हुए उस हमले में अबू सलेम भी घायल हुआ था.
गैंगवार की घटना की वजह से जेल के अंदर क़ैदी भी मारे गए. जेल में अभियुक्तों के पास मोबाइल फ़ोन और ड्रग्स मिलने की ख़बरें लगातार चर्चा में रहती हैं.
साल 2006 में तत्कालीन जेल अधीक्षक स्वाति साठे ने एक ड्रग्स विरोधी अभियान शुरू कर इसे बंद करवाया.

इमेज स्रोत, INDRANIL MUKHERJEE
'मनी मैन जेंटलमैन, नो मंनी मेंटल मैन'
'मनी मैन जेंटलमैन, नो मंनी मेंटल मैन'- कभी आर्थर रोड जेल के बारे में ये कहा जाता था.
जितेंद्र दीक्षित कहते हैं, "इसका मतलब है जिसके पास पैसा है उसके लिए ये जेल, जेल नहीं रहती थी और जिसके पास पैसा नहीं उसके लिए ये जेल किसी नरक से कम नहीं होती."
हालांकि जेल प्रशासन हमेशा इस बात का दावा करता है कि यहां समुचित सुरक्षा है.
जेल अधिकारियों का कहना है, "हाई-रिस्क और हाई-प्रोफ़ाइल क़ैदियों को अलग रखा जाता है, और जनरल बैरक में क़ैदियों को वहां जाने की अनुमति नहीं होती है."
जेल में गैंगवार पर राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रवीण दीक्षित कहते हैं, "जेलों में गैंगवार जैसी घटनाएं होती रहती हैं. इसलिए अलग-अलग गैंग के क़ैदियों को अलग-अलग जेलों में रखा जाए ताकि ये क़ैदी आमने-सामने न आएं."

क्षमता से अधिक क़ैदी
इस जेल में कुल क़ैदियों को रखने की क्षमता 800 है लेकिन एक जेल अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां क़रीब 3,000 क़ैदी हैं.
आर्थर रोड जेल में अधिक क़ैदियों की यह समस्या वर्षों से बढ़ती ही जा रही है.
महाराष्ट्र सरकार के नवी मुंबई के तलोजा में एक नई जेल बनाई है जिसके बाद आर्थर रोड जेल में क़ैदियों की संख्या कम हुई लेकिन यहां अभी कई अधिक भीड़ वाले बैरक हैं.
राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रवीण दीक्षित कहते हैं, ''मुंबई और ठाणे की जेलों में बड़ी संख्या में क़ैदी हैं. जबकि राज्य की अन्य जेलों में क़ैदियों की संख्या बहुत कम है. इसलिए बड़े शहरों से क़ैदियों को वहां भेजा जाना चाहिए."
अक्सर ये भी आरोप लगाया जाता है कि भीड़भाड़ वाली जेलों में ठीक से देखभाल नहीं की जाती है.

इमेज स्रोत, AFP
1993 मुंबई धमाके के ट्रायल
आर्थर रोड जेल में 12 साल से भी अधिक समय से मुंबई बम धमाकों के मामले की सुनवाई चल रही है.
अभिनेता संजय दत्त, जो तब हिरासत में थे, आर्थर रोड जेल में ही रखे गए थे.
सुरक्षा कारणों से मुंबई बम धमाकों की सुनवाई जेल के भीतर ही बिठाई गई विशेष टाडा अदालत से शुरू हुई.
जस्टिस पी.डी. कोडे ने इस मामले में संजय दत्त समेत 100 अभियुक्तों को दोषी ठहराया था. ये सभी इसी आर्थर रोड जेल में क़ैद रखे गए थे.
बलात्कार के आरोप में गिरफ़्तार अभिनेता शाइनी आहूजा भी इसी जेल में बंद थे.

इमेज स्रोत, SABASSTIAN D'SOUZA
कसाब के लिए विशेष अदालत
2008 में मुंबई पर सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ. आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को गिरफ़्तार किया गया.
कसाब को आर्थर रोड जेल में बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया. कसाब के लिए यहां अति सुरक्षित बैरक बनाई गई थी. जेल में ही अदालत बनाई गई.
सुनवाई के लिए कसाब को उसके सेल से स्पेशल कोर्ट ले जाने के दरम्यान उसके भागने या जान से मारे जाने का ख़तरा था, इसलिए उसे सेल से सीधे अदालत जाने के लिए एक सुरंग तैयार की गई थी.
जब कसाब को फ़ांसी की सज़ा सुना दी गई तब उसे यहां से पुणे की यरवदा जेल भेज दिया गया.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
राजनेता और बड़े अधिकारी
महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार में मंत्री छगन भुजबल भी जब मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ़्तार किए गए थे तो उन्हें यहीं रखा गया था.
भ्रष्टाचार के आरोप में कुछ पुलिस और सरकारी अधिकारी भी बतौर अभियुक्त यहां रखे गए हैं.
आर्थर रोड जेल एक रिहाइशी इलाके में है इसलिए यहां सुरक्षा का मुद्दा अहम है.
लिहाजा सरकार ने इसके आसपास निर्माण को लेकर कुछ नियम बनाए हैं. इन नियमों में यह भी शामिल है कि जेल के पास की इमारतें कितनी ऊंची होगीं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















