आर्यन ख़ान-समीर वानखेड़े मामला: अब तक छुपे रहे किरण गोसावी का पहला इंटरव्यू

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- Author, मयंक भागवत
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
आर्यन ख़ान ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के स्वतंत्र गवाह किरण गोसावी पर जबरन वसूली का आरोप लगाया गया है.
इसी मामले में एक और स्वतंत्र गवाह प्रभाकर साईल ने गोसावी पर 25 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने का आरोप लगाया है.
किरण गोसावी आर्यन ख़ान ड्रग केस के सामने आने के बाद से ही लापता थे. बीबीसी ने किरण गोसावी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया.
बीबीसी ने इस बारे में महाराष्ट्र पुलिस से भी बात की. ये पूछे जाने पर कि किरण गोसावी अभी तक पुलिस हिरासत में क्यों नहीं हैं, पुलिस ने बताया, "किरण गोसावी ने अभी तक आत्मसमर्पण नहीं किया है. हम अलर्ट पर हैं. हम पुलिस स्टेशन और अदालत में भी अलर्ट पर हैं. उन्होंने कुछ मीडिया प्रतिष्ठानों को इंटरव्यू दिया है."
पुणे के पुलिस उपायुक्त प्रियंका नारनवरे ने कहा, "हम तलाश कर रहे हैं. लुक आउट नोटिस जारी किया गया है."
किरण गोसावी ने कैमरे पर बात करने से इनकार कर दिया, लेकिन आर्यन खान ड्रग्स मामले और उन पर लगे आरोपों के बारे में बीबीसी मराठी से फोन पर बात की.
उधर, प्रभाकर साईल के आरोपों के सामने आने के बाद एनसीबी ने समीर वानखेड़े के ख़िलाफ़ जांच शुरू कर दी है.

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सवाल: क्या प्रभाकर साईल ने आप पर कोई आरोप लगाया है?
किरण गोसावी का जवाब: यह प्रोपेगैंडा करने की एक कोशिश है. मेरे पास कुछ चीज़ें हैं. आप मुझसे यह सवाल पूछने के बजाय एनसीबी से ये सवाल पूछें. उन लोगों के कॉल विवरण या सीडीआर की जांच करें, जो इसमें शामिल थे.
सवाल: उनका आरोप है कि आप पूजा ददलानी से मिले थे?
जवाब: दो दिन पहले, मेरी होने वाली पत्नी के पास प्रभाकर साईल फोन आया था. वो पूछ रहा था कि पैसे दोगे या नहीं. जब मैं सरेंडर करने वाला था, तो उसने कहा कि मेरी बहन एक पुलिस अधिकारी है. मैं सारी सेटिंग करता हूं. मैंने कहा कि मैं लगातार धमकी भरे फोन कॉल्स के कारण महाराष्ट्र से बाहर हूं. मैंने कहा वकील रख लो, मैं सरेंडर करना चाहता हूं.
सवाल: क्या आप सरेंडर करने के लिए तैयार हैं?
जवाब: मैं सरेंडर करने को तैयार हूं. मुझे छह अक्टूबर को सरेंडर करना था लेकिन उस दिन मेरे पास फ़ोन आया कि हम देखेंगे कि सरेंडर के बाद क्या होगा. फिर किस पर भरोसा करूं?
सवाल: प्रभाकर साईल ने आरोप लगाया है कि समीर वानखेड़े को आठ करोड़ रुपये दिए जाने थे?
जवाब: बिल्कुल झूठ. यदि इस संबंध में कोई साक्ष्य है तो वे उसे पेश करें. मैं फांसी पर चढ़ने को तैयार हूं. लेकिन अगर उनके ख़िलाफ़ सबूत हैं तो उन्हें इसके लिए तैयार रहना चाहिए.

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सवाल: उन्होंने कहा है कि आप फ़ोन पर बात कर रहे थे, लोअर परेल में मिले थे. ये डील 25 करोड़ रुपये की थी.
जवाब: अगर मैंने कहा होता कि ये डील 500 करोड़ रुपये की है तो क्या आप मान जाते? वह इस मामले में पंच थे क्योंकि वह मेरे साथ थे. इसलिए उन्हें गवाह के रूप में लिया गया. फोन पर मिल रही धमकियों के कारण मैं महाराष्ट्र से बाहर हूं. तो इस कारण विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया है. मुझे नहीं पता कि प्रभाकर को क्या लालच दिया गया है. 24 तारीख को ये बात कैसे सामने आई?
सवाल: आप पर पहले भी आरोप लगा है लेकिन इसके बावजूद आप एनसीबी की कार्रवाई में शामिल थे. इसके कारण आप पर भी सवाल उठ रहे हैं.
जवाब: मेरे ख़िलाफ़ केस खत्म हो गया है. ये केस मेरे काम से जुड़ा और तकनीकी स्वरूप का था. ये मामला पुणे से जुड़ा है जिसमें एक व्यक्ति को मैंने मलेशिया भेजा था. वह कुछ मेडिकल कारणों से वापस आया गया था. उसने मुझसे मेडिकल प्रॉब्लम वाली बात छुपाई थी. उस केस में मलेशिया में मामला दर्ज होने वाला था. मैंने उसे बचाया. अब उस मामले को फिर से क्यों खोला गया? 6 अक्टूबर के बाद मेरे ख़िलाफ़ लुक आउट नोटिस क्यों जारी किया गया?
सवाल: आपने आत्मसमर्पण क्यों नहीं किया?
जवाब: मैं सरेंडर करने वाला था. मैं पुणे पहुंचा. लेकिन तभी मेरे पास फोन आया. आप के अंदर जाने के बाद हम क्या करते हैं, ये देख लेने की मुझे नदी गई. सभी धमकियां व्हाट्सएप कॉल पर मिली थीं. मेरे पास नंबर हैं. मैं सभी नंबर पेश करूंगा. मुझे छिपे हुए 22 दिन हो चुके हैं.
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सवाल: क्या आपको पंच के रूप में बुलाया गया था या आप गए थे?
जवाब: हम वहां जानकारी देने गए थे. बाद में शाम को हमें पंच के रूप में बुलाया गया. क्रूज़ टर्मिनस पर कुछ कागज़ात थे. मैंने उन्हें पढ़ा था. इसमें मुनमुन धमीचा, आर्यन और उनके मित्र के अलावा और भी दो-तीन नाम थे. जब वे एनसीबी ऑफिस आए तो उसमें 10 नाम थे. उस पर मेरे हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए थे.
सवाल: प्रभाकर साईल ने आरोप लगाया है कि आपने तस्वीरें भेजी थीं?
जवाब: हमें ख़बरी से टिप मिल रही थी. चूंकि प्रभाकर गेट पर थे, इसलिए मैं उन्हें फोटो भेज रहा था. उनसे कहा गया था कि अगर उन्होंने इनमें से किसी को देखा हो तो बताएं. ये सुरक्षा एजेंसियों का काम है लेकिन हम सिर्फ़ पता लगा रहे थे और लोगों को ढूंढ रहे थे.
सवाल: आप ने आर्यन के साथ सेल्फ़ी ली. उसका हाथ पकड़कर ले गए. आपको यह अधिकार किसने दिया?
जवाब: आर्यन को सेल्फ़ी लेते हुए गिरफ़्तार नहीं किया गया था. सेल्फ़ी लेना गलत था. मैं उसके लिए माफी माँगता हूँ. आर्यन मेरी कार से बाहर निकले. उसी समय उनका पैर फिसल गया था. उसने मेरा हाथ पकड़ कर सहारा लिया. उस समय तक, उन्हें और मुझे नहीं पता था कि उनके ख़िलाफ़ कोई आरोप है या नहीं. इसलिए उनके चेहरे को मीडिया से बचाने के लिए हम उनका हाथ पकड़कर ले गए.
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सवाल: आपने फ़ोन करके उनकी किससे बात करवाई?
जवाब: दरअसल, वीडियो लेने की इजाज़त नहीं थी. आर्यन ने मुझे एक नंबर देकर कहा कि मेरी घर पर बात करवा दें. उन्होंने मुझसे रोते हुए विनती की. उनका खाना आ गया था. रात के खाने से पहले उन्होंने कहा कि एक बार फ़ोन दे दीजिए. उन्हें अपने घरवालों या किसी और से बात करनी थी. इसलिए मैंने उन्हें फ़ोन दे दिया.
सवाल: प्रभाकर का आरोप है कि उन्हें कोरे कागज़ पर दस्तखत करने के लिए मजबूर किया गया और समीर वानखेड़े ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था.
जवाब: ऐसे कोरे कागज़ पर कोई हस्ताक्षर नहीं करेगा. मनीष भानुशाली और मैंने पंचनामा पढ़कर उस पर साइन किया.
सवाल: क्या आपको टिप मिली थी या केवल आपने जानकारी साझा की थी.
जवाब: मुझे मनीष भानुशाली ने बताया था. फिर हमने जाकर एनसीबी को बताया. एनसीबी को कुछ जानकारी थी. इस मामले के झूठे होने के जो भी आरोप हैं, वे निराधार हैं.

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सवाल: एनसीबी का कहना है कि आर्यन के पास से ड्रग्स जब्त नहीं किया गया था.
जवाब: कोर्ट में जो हुआ उसके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता.
सवाल: आप प्रभाकर साईल को कब से जानते हैं?
जवाब: मैं प्रभाकर को पिछले चार महीने से जानता हूं. वह मेरे पास काम मांगने आया था. पिछले 10-12 दिनों में मैंने उन्हें पैसे नहीं दिए तो हो सकता है कि इसलिए वे ऐसा आरोप लगा रहे हैं.
सवाल: आप पुलिसकर्मी नहीं हैं, तो आपकी कार पर पुलिस का सिम्बल कहां से आया?
जवाब: वह कार मेरी नहीं थी. पुलिस लिखा बोर्ड भी मेरा नहीं था. उस समय काफी चहल-पहल थी. मेरी एक पिस्टल वाली तस्वीर वायरल हुई है लेकिन मेरे पास कोई पिस्टल नहीं है. वो एक लाइटर है.
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