पीएम मोदी ने क्या अधूरे फ़तेहपुर मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण कर दिया? - रियलिटी चेक

नरेंद्र मोदी

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    • Author, अनंत झणाणे
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के एक दिन दौरे पर थे. इस दौरे में उन्होंने सिद्धार्थनगर के साथ उत्तर प्रदेश के आठ अन्य ज़िलों में नए मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन किया.

राज्य में चुनावी माहौल में भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए सवाल पूछा, "उत्तर प्रदेश के इतिहास में कभी एक साथ इतने मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण हुआ? पहले ऐसा क्यों नहीं होता था और अब ऐसा क्यों हो रहा है, इसका एक ही कारण है, राजनीतिक इच्छाशक्ति और राजनीतिक प्राथमिकता: प्रधानमंत्री श्री @narendramodi."

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ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर इसकी जानकारी दी कि वो सिद्धार्थनगर से नौ मेडिकल कॉलेजों का शुभारम्भ करने जा रहे हैं.

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लेकिन इन नौ मेडिकल कॉलेजों में फ़तेहपुर ज़िले के मेडिकल कॉलेज को लेकर विवाद शुरू हो गया है. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि आधी बनी इमारत होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन कर दिया गया. वहीं इस विद्यालय के प्रशासन का दावा है कि मेडिकल कॉलेज चलाने लायक सुविधा तैयार कर ली गई है.

दरअसल फ़तेहपुर के अमर शहीद जोधा सिंह अटैया ठाकुर दरियाँव सिंह चिकित्सा महाविद्यालय को 212 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है. कॉलेज के सामने लगे बोर्ड पर प्रोजेक्ट की जानकारी है जिसके मुताबिक इस मेडिकल कॉलेज के निर्माण का काम आठ मार्च 2019 को शुरू हुआ था और 07 मार्च 2020 को ख़त्म होना था, लेकिन अभी भी यहां निर्माण कार्य जारी है.

मेडिकल कॉलेज

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इसी बोर्ड पर यह भी जानकारी है कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण उत्तर प्रदेश जल निगम का कंस्ट्रक्शन एंड डिज़ाइन सर्विसेज़ विभाग करवा रहा था और ग्लोबल सेनेटरी इंफ़्रा प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी इसकी कंस्ट्रक्टर है.

मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण कार्यक्रम कवर करने जब स्थानीय मीडिया की टीम पहुँची तो यह नज़र आया कि कैंपस में ज़ोर-शोर से निर्माण का काम चल रहा है. ऐसे में यह सवाल उभरना स्वभाविक ही था कि क्या प्रधानमंत्री से इस मेडिकल कॉलेज का जल्दबाज़ी में उदघाटन करवा दिया गया?

बाहर से देखने पर मेडिकल कॉलेज की इमारत निर्माणाधीन लग रही है और उसकी बड़ी इमारतों पर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली बल्लियों को भाजपा के रंग के कपड़ों से सजाने की कोशिश भी की गयी थी.

बाहर से देखने पर मेडिकल कॉलेज की इमारत निर्माणाधीन लग रही है

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इमेज कैप्शन, बाहर से देखने पर मेडिकल कॉलेज की इमारत निर्माणाधीन लग रही है

भाजपा कार्यकर्ता से ही मिली निर्माणाधीन होने की जानकारी

दरअसल सबसे पहले इस मेडिकल कॉलेज के निर्माणाधीन होने की जानकारी फ़तेहपुर के किशन शुक्ला के एक ट्वीट से ही दुनिया को मिली. किशन शुक्ला की ट्विटर प्रोफ़ाइल के मुताबिक़ वह फ़तेहपुर से भाजपा युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष हैं.

अपने ट्वीट में किशन ने लिखा कि प्रदेश कार्यालय के निर्देश पर वह फ़तेहपुर मेडिकल कॉलेज का जायज़ा लेने पहुंचे और उन्हें मयंक नाम के एक इंजीनियर से "निर्माणाधीन कॉलेज" के बारे में जानकारी हासिल हुई. ट्वीट में किशन ने चार तस्वीरें लगाईं जिन्हें देख कर ऐसा लग रहा है कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण का कार्य अभी बाक़ी है.

भाजपा युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष किशन शुक्ला ने ट्वीट किया था जिसमें मेडिकल कॉलेज के निर्माणाधीन होने की जानकारी थी

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इमेज कैप्शन, भाजपा युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष किशन शुक्ला ने ट्वीट किया था जिसमें मेडिकल कॉलेज के निर्माणाधीन होने की जानकारी थी, हालांकि यह ट्वीट अब डिलीट हो चुका है

जब कॉलेज के अधूरे बने होने की बात सोशल मीडिया पर फैलने लगी और लोग सवाल उठाने लगे तो बाद में किशन शुक्ला ने मेडिकल कॉलेज के लैब, लाइब्रेरी और लेक्चर रूम की तस्वीरें भी ट्वीट कीं जो पूरी तरह बनी हुई दिख रही हैं.

निर्माण पूरा या अधूरा?

बीबीसी की टीम फ़तेहपुर शहर से आठ किलोमीटर दूर स्थित मेडिकल कॉलेज पहुँची और वहां निर्माणाधीन ढांचों और इमारतों की तस्वीरें लेने की कोशिश की तो कैंपस में तैनात गार्ड आकर कहने लगे कि तस्वीर लेना मना है.

मेडिकल कॉलेज परिसर में तैनात सुपरवाइज़र दिनेश कुमार सिंह ने बताया, "यहाँ पर मेडिकल कॉलेज बन रहा है और यह लगभत 80 प्रतिशत बन चुका है और काम पूरा होने में छह महीने का वक्त लग सकता है. सोमवार को इसका लोकार्पण हुआ है."

लोकार्पण के दूसरे दिन भी इमारतों पर और परिसर में कई मज़दूर काम करते नज़र आए और कुछ ने यह भी बताया कि अभी सिर्फ 50 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हुआ है. कई मज़दूर मंगलवार को भी सरिया काटते, पाइपिंग करते और पुताई करते नज़र आ रहे थे.

मेडिकल कॉलेज

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क्या कहना है फ़तेहपुर ज़िले के प्रभारी मंत्री का?

जब प्रधानमंत्री मोदी सिद्धार्थनगर से नौ मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण कर रहे थे तो फ़तेहपुर में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और ज़िला प्रभारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री मेडिकल कॉलेज में चल रहे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे.

निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के लोकार्पण सवाल पर उन्होंने कहा, "मेडिकल कॉलेज पूरी तरह खुल गया है, छोटे-मोटे काम जो बचे हुए हैं, वो भी धीरे-धीरे होते रहेंगे. घर में भी हम लोग मकान बना लेते हैं, उसमें प्रवेश कर जाते हैं, उसके बावजूद भी उसमें कुछ छोटे-मोटे काम, कहीं पाइप का, कहीं बिजली का, कहीं किसी और चीज़ का रह जाता है, वो होता रहता है बाद में."

मेडिकल कॉलेज

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रामनरेश अग्निहोत्री ने यह कहा, "मेडिकल कॉलेज चालू हो गया है. पेशंट भी बहुत पहुँच रहे हैं और जितने भी नौ मेडिकल कॉलेज खुले हैं वो सब चालू हैं. एडमिशन समय पर होगा और टाइम के मुताबिक ही सत्र चलेगा."

फ़तेहपुर के बिंदकी से भाजपा विधायक कारण सिंह पटेल भी मेडिकल कॉलेज के कार्यक्रम में शामिल हुए थे. उन्होंने इस मेडिकल कॉलेज के अधूरे निर्माण के बारे में कहा, "अभी उद्घाटन हुआ है, मरीज़ों के इलाज की भी व्यवस्था शुरू हो जाएगी. उसमे कोई संशय की बात नहीं है. उद्घाटन हो गया है. उद्घाटन के बाद इसी सत्र में एडमिशन चालू हो जाएगा और पूरी व्यवस्था कम्प्लीट है. किसी प्रकार की कमी नहीं है, थोड़ा बहुत है. उसमें तो कुछ है नहीं, वो पूरा ही हो चुका है."

मेडिकल कॉलेज

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क्या है फ़तेहपुर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सफ़ाई

फ़तेहपुर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर आरपी सिंह का कहना है कि, "मेडिकल कॉलेज की जो ज़रूरतें होती हैं वो फेज़-वाईज़ होती हैं. फ़र्स्ट ईयर में हमें केवल तीन डिपार्टमेंट चाहिए होते हैं - एनाटॉमी, फ़िजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री. उसके साथ लाइब्रेरी और लैब चाहिए. इसके अलावा छात्रों का छात्रावास ऑप्शनल है और एक चालू अस्पताल होना चाहिए. इसमें तो सरकार ने ज़िला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के लिए अधिगृहीत किया है. ज़िला अस्पताल को भी अपग्रेड करके मेडिकल कॉलेज का हिस्सा बनाने की योजना है."

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि पढ़ाई शुरू करने के लिए डिपार्टमेंट, लैब और लाइब्रेरी तैयार हैं

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इमेज कैप्शन, मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि पढ़ाई शुरू करने के लिए डिपार्टमेंट, लैब और लाइब्रेरी तैयार हैं

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल का मानना है कि कोर्स शुरू करने के लिए पूरे मेडिकल कॉलेज के बनने तक इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है.

डॉक्टर आरपी सिंह कहते हैं, "कोर्स शुरू करने के लिए हमारे तीनों डिपार्टमेंट एनाटॉमी, फ़िजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री पूरी तरह तैयार हैं. फ़र्स्ट ईयर के ब्लॉक बिल्डिंग के ग्राउंड और फ़र्स्ट फ़्लोर में हैं, और हमारा ग्राउंड और फ़र्स्ट फ्लोर दोनों तैयार है, जो हमारे वीडियो में देखा जा सकता है. बाकी सेकंड, थर्ड और फ़ोर्थ फ़्लोर, सेकंड और थर्ड ईयर में इस्तेमाल होंगे, और वो हमें अगले साल जुलाई-अगस्त से चाहिए होंगे. तो उनका काम अभी चल रहा है."

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आरपी सिंह इस मेडिकल कॉलेज को क्लीयरेंस की बात मिलने की जानकारी देने की प्रक्रिया के बारे में बताते हैं, "वीडियोग्राफ़ी और फ़ोटोग्राफ़ी देखने के बाद ही इसे क्लीयरेंस मिला है. यह बात सही है कि अभी पूरा 100 प्रतिशत तैयार नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जिस डिपार्टमेंट की हमें तीन साल बाद ज़रूरत हो तो तो उसकी वजह से कोर्स ही शुरू ना हो. अगर कोई कोर्स शुरू करने की सारी फ़ैसिलिटीज़ हैं तो फिर क्यों न कोर्स जल्द से जल्द शुरू किया जाए."

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर आरपी सिंह ने बीबीसी से कुछ वीडियो भी शेयर किए जिसमें लेक्चर रूम, लाइब्रेरी और लैब तैयार नज़र आते हैं. लेकिन मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आने वाले लोगों को फ़िलहाल लगभग सात किलोमीटर दूर ज़िला अस्पताल में इलाज के लिए जाना होगा.

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समाजवादी पार्टी ने बताया इसे "डबल धोखा"

यही वजह है कि चुनावी माहौल में विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा है. समाजवादी पार्टी ने अधूरे बने मेडिकल कॉलेज के लोकार्पण के लिए योगी सरकार को ट्विटर पर घेरने की कोशिश की. पार्टी ने अपने औपचारिक ट्विटर हैंडल से तंज़ कसा, "मेडिकल कॉलेज का काम अधूरा, फिर भी कर दिया लोकार्पण पूरा. यह है "डबल इंजन" भाजपा सरकार का जनता को समर्पित विकास कार्य! फ़तेहपुर मेडिकल कॉलेज 25% अधूरा होने के बावजूद प्रधानमंत्री जी से मुख्यमंत्री जी द्वारा इसका उद्घाटन कराया जाना "डबल धोखा" है. जनता देगी जवाब."

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पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी ट्विटर पर यह दोहराया है कि लोकार्पण से एक दिन पहले ही भाजपा कार्यकर्ता ख़ुद अधूरे बने मेडिकल कॉलेज का मुआयना करने गए थे और उन्होंने भी उसे निर्माणाधीन पाया और ट्विटर पर भी यह बात की.

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क्या कहना है फ़तेहपुर के नेताओं और निवासियों का

फ़तेहपुर से कांग्रेस के पूर्व संसद और कांग्रेस के प्रदेश सचिव राकेश सचान ने इसे जल्दबाज़ी बताते हुए कहा, "कॉलेज अभी निर्माणाधीन है, इतनी जल्दी क्या थी, जहाँ मरीज़ हों, जहाँ डॉक्टर हों, बाकायदा इलाज चल रहा हो वहां मेडिकल कॉलेज संचालित हो तब तो उद्घाटन समझ में आता है. इससे यह महसूस होता है कि भाजपा को यह महसूस हो गया है कि हम फ़ाइट में आ नहीं रहे हैं, इसलिए जो वो जल्दी-जल्दी कर सकते हैं वो कर रहे हैं."

मेडिकल कॉलेज

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फ़तेहपुर निवासी उमेश चंद्र मेडिकल कॉलेज बनाने से ख़ुश हैं और कहते हैं, "फ़तेहपुर ज़िले का सौभाग्य है कि मेडिकल कॉलेज मिल गया, इस बहाने से डॉक्टर आएंगे, बच्चों का ऐडमिशन होगा. आसपास का इकोसिस्टम मज़बूत होगा. लोगों के काम-धंधे बढ़ेंगे."

फ़तेहपुर से पूर्व ज़िला पंचायत सदस्य और स्थानीय समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह का कहना है, "अभी चलने की स्थिति में नहीं है और उसका इन्होंने लोकार्पण कर दिया. केवल चुनाव की वजह से ही यह सब हो रहा है. चुनाव सिर पर खड़ा है और यह चाहते हैं कि इसका लाभ उन्हें मिले."

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फ़तेहपुर के रहने वाले युवा राकेश कुमार का कहना है, "थोड़ी-सी सरकार की तरफ़ से जल्दबाज़ी की गयी है. अगर इसी को थोड़ा अच्छे से, पूरे तरीके से कम्पलीट करके सारी सुविधाओं के साथ चालू किया जाता तो और अच्छा रहता. लेकिन यह ज़िले के लिए बहुत अच्छी बात है. हम उम्मीद करते हैं कि जिन ग़रीबों को समस्याओं से जूझना पड़ता था और इलाज के लिए कानपुर आना पड़ता था उनका ज़िले में ही इलाज होगा और बेहतर इलाज होगा. इसके लिए हम चाहते हैं कि यह बिल्डिंग जल्दी तैयार हो."

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