भारत में कोरोना वैक्सीन क्या सभी वयस्कों के लिए है?

An elderly woman in Siliguri gets the Covid-19 vaccine

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इमेज कैप्शन, कोरोना वैक्सीन लगवातीं एक बुज़ुर्ग महिला
    • Author, श्रुति मेनन
    • पदनाम, बीबीसी रियलिटी चेक

भारत की वैक्सीन तैयार करने की क्षमता और वैक्सीन आपूर्ति को प्रभावित करने वाले दूसरे कारकों का हमने पता लगाने की कोशिश की है.

भारत सरकार ने 2021 के अंत तक सभी वयस्कों को वैक्सीन डोज़ मुहैया कराने का वादा किया हुआ है लेकिन सवाल यह है कि क्या उसके पास इतनी वैक्सीन डोज़ उपलब्ध होंगी.

भारत में वैक्सीन का अब तक कितना उत्पादन

भारत सरकार ने हाल ही में कोविशील्ड और कोवैक्सीन के उत्पादन को लेकर अलग-अलग जानकारी दी है.

भारत में कोविशील्ड का उत्पादन सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया और कोवैक्सीन का उत्पादन भारत बायोटेक कंपनी कर रही है.

20 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय संसद में एक सवाल के जवाब में कहा है कि कोविशील्ड का उत्पादन प्रति महीने 11 करोड़ डोज़ से बढ़ा कर 12 करोड़ डोज़ करने की योजना है.

लेकिन इस विषय पर पूछे एक दूसरे सवाल पर सरकार ने अनुमानित वैक्सीन उत्पादन को 13 करोड़ डोज़ बताया है.

जब हमलोगों ने इस बारे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया से जानकारी मांगी तो कंपनी ने बताया है कि जुलाई महीने में 11 करोड़ से 12 करोड़ डोज़ के बीच में कोविशील्ड वैक्सीन का उत्पादन हो रहा है और तुरंत इसे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है.

Serum Institute of India facility in Pune

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इमेज कैप्शन, वैक्सीन बनाने के लिए ख़ास किस्म के कच्चे माल की ज़रूरत होती है

इस साल की शुरुआत में जब बाइडन प्रशासन ने अमेरिकी कंपनियों को घरेलू ज़रूरतों पर ध्यान देने को कहा था तब भारत में कच्चे माल की कमी के चलते वैक्सीन उत्पादन प्रभावित हुआ था. हालांकि बाद में भारत में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए अमेरिका ने अपनी नीति में नरमी दिखाई.

कोवैक्सीन को लेकर भी सरकार ने अलग अलग आंकड़े दिए हैं. ये आंकड़े इतने अलग अलग हैं कि इसमें प्रति महीने एक करोड़ डोज़ से आने वाले महीनों में प्रति महीने 10 करोड़ डोज़ उत्पादन का अनुमान लगाया गया है.

इस बारे में हमने भारत बायोटैक से भी जानकारी मांगी है, लेकिन ख़बर लिखे जाने तक हमें कंपनी की ओर से कोई जानकारी नहीं मिली है, जानकारी मिलने पर हम स्टोरी अपडेट करेंगे.

मई महीने में सरकार ने अगस्त से दिसंबर तक के बीच 40 करोड़ कोवैक्सीन डोज़ मिलने की उम्मीद जताई थी.

लेकिन भारत बायोटैक अब तक जनवरी से जुलाई के बीच आठ करोड़ वैक्सीन डोज़ के ऑर्डर को उपलब्ध नहीं करा सकी है, 16 जुलाई तक कंपनी ने केवल साठ लाख वैक्सीन डोज़ उपलब्ध कराया है.

इन दोनों के अलावा भारत में बनने वाली दूसरी वैक्सीनों का उपयोग भी कोविड संक्रमण की रोकथाम में होना है, लेकिन उन वैक्सीनों को अभी तक मान्यता नहीं मिली है.

जो दूसरी वैक्सीन उपलब्ध हैं

भारत ने रूस में बनी स्पुतनिक V वैक्सीन के इस्तेमाल को अनुमति दी है, शुरुआती दौर में रूस ने भारत को इस वैक्सीन की 30 लाख डोज़ मिली है.

जुलाई या अगस्त महीने तक भारत में इसको तैयार करने की बात कही गई थी लेकिन रूसी कंपनी की ओर से दिए गए एक बयान के मुताबिक़ अब उम्मीद की जा रही है सितंबर महीने में यह तैयार हो पाएगी.

A volunteer receives the Covid-19 vaccine at a mock run in India's Karnataka

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एक अन्य वैक्सीन नोवावैक्स को अमेरिका में विकसित किया गया है, भारत में इसे कोवावैक्स नाम दिया गया है, इस वैक्सीन को भी सीरम इंस्टिट्यूट तैयार कर रही है, लेकिन अबे इसे मान्यता नहीं मिली है.

सीरम इंस्टीट्यूट ने ने बीबीसी को बताया है कि फ़िलहाल इस वैक्सीन की डोज़ तैयार करके जमा की जा रही है.

हालांकि भारत सरकार ने अगस्त से दिसंबर के बीच अपनी आपूर्ति वाले अनुमान में इस वैक्सीन को भी शामिल रखा है, तब तक इसे अनुमति मिलने की उम्मीद की जा रही है.

भारत ने अमेरिका में बनी मॉडर्ना वैक्सीन के इस्तेमाल को जून में ही मान्यता दे दी थी, लेकिन अब तक इस वैक्सीन कोई डोज़ भारत नहीं पहुंची है.

वहीं जॉनसन एंड जॉनसन और फ़ाइजर ने भारत में आपातकालीन परस्थितियों में इस्तेमाल की अनुमति के लिए आवेदन नहीं दिया है.

जून में जी7 सदस्य देशों और अमेरिका की ओर मदद के तौर मुहैया करायी जाने वाली वैक्सीन डोज़ का लाभ भारत को भी मिलना था.

लेकिन विदेशों में बनी वैक्सीन की उपलब्धता में क़ानूनी अड़चन है. विदेशी वैक्सीन निर्माता वैक्सीन के इस्तेमाल से होने वाले किसी नुकसान की स्थिति में क्षतिपूर्ति दावा से सुरक्षा चाहते हैं, यह भारत में अभी किसी वैक्सीन निर्माता को उपलब्ध नहीं है.

India vaccine dry run

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क्या लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत के पास पर्याप्त वैक्सीन है?

अभी ऐसी स्थिति नहीं दिख रही है, हालांकि स्थिति में बदलाव हो सकता है.

2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 90 से 95 करोड़ के बीच थी. अब तक इनमें से महज दस फ़ीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनो डोज़ मिल सकी है.

इसका मतलब यही है कि दिसंबर, 2021 तक सभी व्यस्कों को वैक्सीन देने के लिए अगले पाँच महीने तक भारत में प्रति महीने 29.2 करोड़ वैक्सीन डोज़ की ज़रूरत होगी.

भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा समय में भारत में प्रति माह 12 से 13 करोड़ वैक्सीन डोज़ तैयार करने की क्षमता है. आने वाले महीनों में वैक्सीन उत्पाद क्षमता बढ़ सकती है और चीज़ें बेहतर हो सकती हैं, विदेशों से भी वैक्सीन आ सकती है.

लेकिन अभी जितनी वैक्सीन की ज़रूरत है, भारत उससे काफी पीछे दिख रहा है. इसके अलावा भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कहा है कि अगले महीने से बच्चों का भी टीकारकरण शुरू होगा. इससे आपूर्ति की समस्या बढ़ेगी, कम नहीं होगी.

भारतीय वैक्सीनों का निर्यात?

पहले भारत अपने पड़ोसी देशों को वैक्सीन की आपूर्ति कर रहा था. ग्लोबल कोवैक्स स्कीम के तहत उसे ग़रीब देशों को भी वैक्सीन मुहैया करानी थी, लेकिन भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल महीने में ही यह बंद हो गया था.

Delivery of AstraZeneca vaccine produced in India, arriving in Bangladesh

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इमेज कैप्शन, भारत पहले लगातार वैक्सीन का निर्यात कर रहा था, लेकिन अप्रैल में उसे रोक दिया गया

नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका अब चीन में निर्मित वैक्सीन और दूसरे देशों की मदद पर निर्भर हैं.

कोवैक्स स्कीम ने बीबीसी को बताया कि इस अभियान के लोग भारत सरकार से संपर्क में हैं और निर्यात पर लगी रोक हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन यह कब शुरू होगा, इसको लेकर अब तक कोई सहमति नहीं बन सकी है.

सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया ने कहा है कि उसकी प्राथमिकता भारत की ज़रूरतों को पूरा करना है और इस साल के अंत तक वैक्सीन का निर्यात संभव नहीं लग रहा है.

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