आगरा में पुलिस हिरासत में सफ़ाईकर्मी की मौत, क्या है पूरा मामला?

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- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस हिरासत में एक सफ़ाई कर्मचारी की मौत का मामला सामने आया है. सफ़ाईकर्मी के परिजन ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज़ कराया है.
मुक़दमे में किसी को नामजद नहीं किया गया लेकिन पुलिस अधिकारियों के मुताबिक एक इंस्पेक्टर समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. इन पुलिसकर्मियों के नाम हैं: आनंद शाही (इंस्पेक्टर), योगेंद्र (सब इंस्पेक्टर), सत्यम (सिपाही), रूपेश (सिपाही) और महेंद्र (सिपाही).
इस मामले में विपक्ष सरकार पर हमलावर है और स्थानीय अधिकारी मरने वाले सफ़ाईकर्मी के परिजन को मनाने में जुटे हैं ताकि मामला तूल नहीं पकड़े.
पुलिस के मुताबिक ये केस आगरा के जगदीशपुरा थाने का है. बीते शनिवार को थाने के मालखाने से 25 लाख रुपये की चोरी हुई थी. इस चोरी की जाँच के दौरान पुलिस ने थाने में काम करने वाले सफ़ाईकर्मी अरुण वाल्मीकि को मंगलवार दोपहर चार बजे ताजगंज थाना क्षेत्र से हिरासत में लिया.
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पुलिस का दावा है कि सफ़ाईकर्मी से पूछताछ के बाद पुलिस ने 15 लाख रुपये से अधिक बरामद किए. पुलिस का दावा है कि बाक़ी रकम की बरामदगी के लिए उससे पूछताछ की जा रही थी.
पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान देर रात सफाईकर्मी की हालत बिगड़ गई.
आगरा के एसएसपी मुनिराज जी ने बताया, "ख़बर मिली कि अचानक उनकी हालात बिगड़ गई तो परिवार के साथ पुलिसकर्मी उनको हॉस्पीटल लेकर गए. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया."
उन्होंने आगे बताया, "वीडियोग्राफ़ी के साथ पोस्टमार्टम किया जाएगा. परिवार वालों ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कराई है. एसपी ईस्ट के नेतृत्व में जांच समिति घोषित कर दी गई है. उनके पोस्टमार्ट्म की रिपोर्ट आएगी और उस आधार पर हम इस मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे."

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पत्नी के आरोप
अरुण की पत्नी सोनम रोते हुए सवाल करती हैं कि अब उनके दो बच्चों की देखभाल कौन करेगा?
सोनम आरोप लगाती हैं, "पुलिस वालों ने उन्हें मार दिया. नमक-मिर्च सब उनके शरीर पर डाला हुआ था. मोटे-मोटे डंडे से मारते रहे. उन लोगों ने मार डाला."
अरुण की मां विमला देवी रोते बिलखते कहती हैं, "मेरे लाल को जिस पुलिस वाले ने मार डाला है, उसे मैं पहचान लूंगी."
पुलिस अरुण को जीवन ज्योति हॉस्पीटल लेकर गई, जो थाना क्षेत्र के पास ही पड़ता है. जगदीशपुरा में अरुण के परिवारवालों की शिकायत के आधार पर इस मामले में 302 के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है.
हालांकि यह मुक़दमा लिख दिया गया है, लेकिन उसमें किसी पुलिस वाले को नामज़द नहीं किया गया है.
पुलिस के मुताबिक विवेचना के दौरान परिवार वालों की पहचान के आधार पर इसमें पुलिस वाले को नामज़द किया जाएगा.

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पांच पुलिसकर्मी निलंबित
एसएसपी मुनिराज जी ने बताया, "परिवार वालों की शिकायत के बाद हमने इस घटनाक्रम में शामिल एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर और तीन कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है."
इस घटना की पूरी जानकारी देते हुए एडीजी आगरा जोन राजीव कृष्णा ने दी.
उन्होंने बताया, "थाना जगदीशपुरा में आज से तीन-दिन पहले घटना हुई थी, इसमें थाने के अंदर से मालखाने में से एक बॉक्स में से 25 लाख रुपये चोरी किये गए थे. उस चोरी की इन्वेस्टीगेशन में पुलिस को अरुण नामक एक व्यक्ति पर संदेह हुआ. वो थाने में सफ़ाईकर्मी था.''
राजीव कृष्णा ने बताया, ''पुलिस के मुताबिक़ अरुण को जब उसके घर पूछताछ के लिए टीम ले गयी तो वहां से करीब 15 लाख रुपये बरामद हुए. बरामदगी के बाद उसकी तबियत ख़राब हुई, और उसे हॉस्पिटल ले जाया गया. हॉस्पिटल पहुंचने से पहले अरुण की मौत हो गयी."

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तीन और लोगों से पूछताछ
इन लोगों की रिहाई से पहले उनके परिजनों ने पुलिस हिरासत के बारे में बताया.
पूरन देवी ने बताया, "पुलिस ने हमारे दो बेगुनाह बच्चे को भी पूछताछ के लिए उठा लिया गया है. मेरे एक बेटे को पुलिस घर से ले गयी और दूसरा बेटा होटल से काम करके लौट रहा था तो पुलिया से उठा ले गयी. अरुण हमारी ही बस्ती का था, लेकिन सफ़ाईकर्मी से पुलिस रूम का ताला कैसे टूट सकता है. इसलिए हमें तो यक़ीन नहीं हो रहा है, पुलिस पर."
वहीं अरुण की एक अन्य पड़ोसी राधा ने बताया, "पुलिस वाले ने उनको मार दिया है. मेरे आदमी को भी पुलिस उठा कर ले गए हैं. वे अरुण के दोस्त थे."
परिवार को आश्वासन
इस मामले में अरुण के साथ जगदीशपुरा इलाके के तीन अन्य स्थानीय लोगों को भी हिरासत में लिया गया था, जिसके चलते स्थानीय स्तर पर लोगों में बेहद रोष दिखा. हालांकि इन तीन लोगों को पूछताछ के बाद रिहा कर दिया गया है.
आगरा के ज़िलाधिकारी और पुलिस प्रशासन अरुण के परिवार वालों से बात करके माहौल को शांत रखने की कोशिश कर रहे हैं. उनकी कोशिश है कि मामला तूल न पकड़े.
हालांकि अरुण के भाई सोनू नरवाल ने आगरा ज़िलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह से मुलाकात के बाद कहा, "परिवार को एक एक सरकारी नौकरी, और अरुण बच्चे के लिए व्यवस्था की जाएगी. पुलिस ने 302 का मुक़दमा लगाया है. मैं करवाई से संतुष्ट हूँ. बहु के लिए सरकारी नौकरी चाहिए, फिर वो अपनी व्यवस्था करेगी."
वहीं दूसरी ओर अरुण का शव बुधवार को घर लाया गया है और वाल्मीकि समाज के सैंकड़ों लोग उनके घर पर मौजूद हैं. पुलिस ने एहतियातन ने घर के आसपास दो किलोमीटर इलाके में बैरिकेडिंग कर दी है.
आगरा उत्तर प्रदेश में दलित बहुल्य इलाका है और ऐसे में विधानसभा चुनाव को नज़दीक देखते हुए अरुण की मौत पर राजनीति भी तेज़ हो रही है.

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विपक्ष के सरकार से सवाल
उत्तर प्रदेश की कांग्रेस प्रभारी और महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर लिखा, "किसी को पुलिस कस्टडी में पीट पीटकर मार देना कहां का न्याय है."
वो लखनऊ से अगरा के लिए रवाना हुईं. पहले पुलिस ने उन्हें धारा 144 का हवाल देकर आगरा एक्सप्रेस वे पर चढ़ने से रोक दिया और प्रियंका गांधी वहीं धरने पर बैठ गई. बाद में उन्हें आगरा जाने की अनुमति दे दी गई.
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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है, "भाजपा सरकार में पुलिस खुद अपराध कर रही है तो फिर अपराध कैसे रुकेगा."
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पिछले महीने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के एक होटल में पुलिस पर कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता की पीट पीट कर हत्या करने का आरोप लगा. मनीष की पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही थी.
गोरखपुर मामले में पुलिस वालों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया गया.
बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता से मिले और उन्हें सरकारी नौकरी और मुआवज़ा देने का एलान हुआ. कारोबारी मनीष की हत्या के मामले में छह पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी हो चुकी है.
(साथ में आगरा से नसीम अहमद )
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