हाथरस मामला: अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर, अंतरराष्ट्रीय साज़िश का दावा

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हाथरस में एक दलित महिला के साथ कथित रूप से बलात्कार और फिर हत्या किए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जाँच के आदेश दिए हैं.
स्थानीय पुलिस और प्रशासन के गैर-ज़िम्मेदाराना रवैये की बात सामने आने के बाद राज्य सरकार ने कई अधिकारियों को निलंबित किया है.
लेकिन अब तक विवादों में आने वाले ज़िला अधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की गई है.
ऐसे में विपक्षी दल उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साध रहे हैं.
कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी से लेकर तमाम दूसरे नेता योगी आदित्यनाथ के इस्तीफ़े की माँग कर चुके हैं.
इसी बीच हाथरस के चंदपा थाने में एक नई एफ़आईआर दर्ज की गई है जिसमें कुछ अज्ञात व्यक्तियों के ख़िलाफ़ राजद्रोह जैसी धाराएं लगाई गई हैं.
उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा है कि उत्तर प्रदेश में जातिगत दंगे भड़काने और योगी सरकार की छवि ख़राब करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय साजिश रची जा रही है.
लेकिन इस मामले में अब तक बहुत कुछ ऐसा हो चुका है जिसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.
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शुरुआती दिनों में क्या क्या हुआ?
हाथरस के चंदपा थानाक्षेत्र में दाखिल शिकायत में पीड़ित पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि बूलगढ़ी गाँव में 14 सितंबर के दिन सुबह लगभग साढ़े नौ बजे पीड़िता पर संदीप नाम के युवक ने हमला किया.
घटना के बाद पीड़िता के भाई ने चंदपा कोतवाली में जाकर हस्तलिखित शिकायत दर्ज कराई जिसमें मुख्य अभियोगी संदीप के नाम का ज़िक्र था.
इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने एससी/एसटी एक्ट और धारा 307 के तहत एफ़आईआर दर्ज कर ली.
इसी दिन पीड़िता को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में शाम चार बजे एडमिट कराया गया.
इस मामले में पहली गिरफ़्तारी घटना के पाँच दिन बाद 19 सितंबर को हुई.
हाथरस के एसडीएम प्रेम प्रकाश मीणा ने बीबीसी संवाददाता अनंत प्रकाश के साथ बातचीत में स्वीकार किया कि एक अभियोगी फरार हो गया था जिसे पकड़ने में समय लगा लेकिन बाकी तीन अभियोगियों को तुरंत पकड़ लिया गया था.
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इलाज़ के दौरान क्या क्या हुआ
इस मामले में पीड़िता की रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है.
पीड़िता का परिवार शुरुआत में उसे लेकर स्थानीय अस्पताल पहुंचा था जिसके बाद पीड़िता को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज कॉलेज भेज दिया गया.
मेडिकल कॉलेज में 22 तारीख़ को पीड़िता को होश आया तब उसने अपने साथ मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अपने साथ गैंगरेप होने की बात कही.
लेकिन पीड़िता की स्थिति में सुधार न होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई.
पीड़िता की मौत के बाद सफ़दरजंग अस्पताल की प्रवक्ता ने कहा था, "20 वर्ष की महिला 28 सितंबर को साढ़े तीन बजे नए इमरजेंसी ब्लॉक में न्यूरो सर्जरी के तहत दाख़िल हुई थी. उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से रेफ़र किया गया था. भर्ती के समय उनकी स्थिति बहुत नाज़ुक थी. उन्हें सर्वाइकल स्पाइन इंजरी, क्वाड्रीप्लीजिया और सेप्टीसीमिया था. भरसक प्रयास और इलाज के बावजूद उनका कल 29 सितंबर को सुबह 6.25 बजे देहांत हो गया."
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रेप को लेकर विवाद
इस मामले में पुलिस फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट का दावा कर रही है कि एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के साथ बलात्कार होने की बात सामने नहीं आई है.
उत्तर प्रदेश पुलिस के एडीजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस बारे में सूचना दी कि एफएसएल रिपोर्ट में स्पर्म होने की पुष्टि नहीं की है.
लेकिन जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एक अधिकारी ने इस दावे को निराधार बताया है.
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अधिकारी डॉ. अज़ीम मलिक ने कहा, "महिला के साथ कथित रूप से रेप होने के 11 दिन बाद सैंपल लिए गए थे. जबकि सरकारी दिशानिर्देश स्पष्ट रूप से कहते हैं कि फॉरेंसिक सबूत घटना के सिर्फ 96 घंटे तक हासिल किए जा सकते हैं. ये रिपोर्ट इस मामले में रेप की पुष्टि नहीं कर सकती."
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राजनीतिक स्तर पर अब तक क्या हुआ?
इस मामले में शुरुआत से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश सरकार पर अभियोगियों को बचाने का आरोप लगाया जा रहा है.
मृत युवती के पार्थिव शरीर के कथित रूप से जबरन अंतिम संस्कार के बाद से विपक्षी दलों ने यूपी सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं.
और हाथरस के गाँव में राजनेताओं का पहुँचना जारी है. राहुल गाँधी को शुरुआत में प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार से नहीं मिलने दिया गया.
लेकिन इसके तीन अक्टूबर को राहुल गाँधी समेत अन्य नेताओं को भी पीड़ित परिवार से मिलने की इजाज़त दे दी गई.
और अब राज्य सरकार की ओर से एक नई एफ़आईआर दाखिल कराई गई है.
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एफ़आईआर में दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साजिश रची जा रही है जिससे योगी सरकार की छवि ख़राब की जा सके और प्रदेश में जातिगत दंगे भड़काए जा सकें.
इस एफ़आईआर में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है.
लेकिन अब तक इस मामले में किसी व्यक्ति की गिरफ़्तारी होने की आधिकारिक सूचना नहीं आई है.
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