बांग्लादेश में दुर्गा पूजा पंडालों पर हुए हमलों की तैयारी पहले से थी: बांग्लादेश के गृह मंत्री - प्रेस रिव्यू

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बांग्लादेश के गृह मंत्री ने कहा कि दुर्गा पूजा पंडालों पर हुए हमले पूर्व नियोजत थे यानी उनकी पहले से तैयारी कर ली गई थी. ये हमले देश में सामुदायिक सद्भाव को चोट पहुंचाने के मक़सद से किए गए थे.
अंग्रेज़ी अख़ाबर हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक गृह मंत्री अस्दुज़्जमां ख़ान ने रविवार को कहा, "ऐसा लगता है कि इसे एक निहित समूह ने भड़काया था. सिर्फ़ कोमिल्ला में ही नहीं बल्कि रामु और नासिरनगर में सांप्रदायिक हिंसा के ज़रिए देश को अस्थिर करने की कोशिश की गई."
कोमिल्ला में हुई घटना के कारणों को लेकर उन्होंने कहा, "जब हमारे पास सारे सबूत होंगे तो हम उन्हें सार्वजनिक करेंगे और जो भी इसमें शामिल हैं उन्हें ऐसी सज़ा दी जाएगी जो उदाहरण बने."
बांग्लादेश में शुक्रवार को क़ुरान के कथित अपमान को लेकर दुर्गा पूजा पंडालों और हिंदू मंदिरों पर हमले किए गए. इस्कॉन मंदिर में भी तोड़फोड़ की गई.
इसके बाद देश में कुछ इलाक़ों में हिंसा भी भड़क उठी और हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया.
चांदपुर, चिटगांव, गाज़ीपुर, बंदरबान और मौलवीबाज़ार में हिंसा हुई जिसमें कुछ लोगों की जान भी चली गई.
इन हमलों के बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने सख़्त चेतावनी देते हुए कहा था कि ''कोमिल्ला में दुर्गा पूजा स्थल और हिन्दू मंदिरों पर हमला करने वाले बचेंगे नहीं. कोमिल्ला में हुए हमले की जाँच होगी और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा.''
जातिगत समीकरण साधने में जुटी बीजेपी

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जातिगत समीकरणों को देखते हुए बीजेपी ने ओबीसी समुदाय की अलग-अलग जातियों से संपर्क अभियान शुरू कर दिया है.
इसके तहत रविवार को 'सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन' की पहली सभा का आयोजन किया गया.
इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रजापति समाज को संबोधित किया.
बीजेपी नेताओं ने अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पार्टी 31 अक्टूबर तक ऐसे 27 सम्मेलन करने वाली है.
ये सम्मेलन ऐसे समय पर हो रहे हैं जब विपक्षी समाजवादी पार्टी विभिन्न समुदायों से जुड़ने के लिए यात्रा निकाल रही है. वहीं, बहुजन समाज पार्टी ब्राह्मण वोटों को ध्यान में रखकर सम्मेलन कर रही है.
रविवार के सम्मेलन में योगी आदित्यनाथ ने कुम्हारों के आर्थिक विकास के लिए किए गए सरकार के प्रयासों पर बात की.
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि दिवाली पर अयोध्या में नौ लाख दिये जलाए जाएंगे जिन्हें सरकार इलाक़े के कुम्हारों से ख़रीदेगी.
कुम्हारों की मदद के लिए बनाए गए माटी कला बोर्ड का ज़िक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, "पहले मूर्तियां चीन में बनाई जाती थीं. चीन एक नास्तिक देश है लेकिन उसने लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनानी शुरू कीं और उन्हें महंगे दामों पर बेचा. हमारे प्रजापति समाज के लोग बिना काम के बैठे रहे. अब हम चीन से मूर्तियां नहीं ख़रीदेंगे, हम उन्हें ख़ुद बनाएंगे."
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बीजेपी के पिछड़ी जाति से आने वाले कई नेताओं ने भी इस सभा को संबोधित किया. इनमें प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष लोकेश कुमार प्रजापति शामिल थे.
सम्मेलन की प्रभारी और भाजपा की राज्य महासचिव प्रियंका सिंह रावत ने कहा, "ये सम्मेलन विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों तक पहुंचने के लिए आयोजित किए जाएंगे. ये कार्यक्रम जाति केंद्रित नहीं हैं."
हालांकि, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र कनौजिया ने अख़बार को बताया कि इस तरह के सम्मेलन 19 अक्टूबर से सात अनुसूचित जाति समूहों- पासी, कनौजिया, वाल्मीकि, कोरी, कठेरिया, सोनकर और जाटव के लिए आयोजित होंगे.
उन्होंने बताया, "ये सातों अनुसूचित जातियों में प्रमुख जातियां हैं. कई अन्य जातियां भी हैं और उन्हें भी इन आयोजनों में आमंत्रित किया जाएगा."

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देशभर में किसानों का रेल रोको आंदोलन
केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों के विरोध में कई महीनों से आंदोलन कर रहे किसान सोमवार को रेल रोको आंदोलन करेंगे.
भारतीय किसान यूनियन के मुताबिक़ किसान तीन कृषि क़ानूनों को रद्द करने, एमएसपी पर फ़सलों की ख़रीद की गारंटी का क़ानून बनवाने और लखीमपुर खीरी हत्याकांड में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर रेल रोको आंदोलन करेंगे.
पहले से घोषित कार्यक्रम के तहत 18 अक्टूबर को रेल सेवाओं को छह घंटों तक बाधित किया जाएगा.
किसान नेताओं ने आंदोलन शांतिपूर्ण तरीक़े से करने की अपील की है. भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने दैनिक अख़बार अमर उजाला से कहा कि इसके लिए सभी ज़िलों में कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है. वहीं, राकेश बैंस ने बताया कि रेल रोको आंदोलन के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं.
भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने न्यूज़ एजेंसी एएनाई से कहा, "सहन करने की भी एक सीमा होती है. हमारे धैर्य की परीक्षा मत लो. हालांकि, मैं हमारे किसान भाइयों से कहना चाहता हूं कि हिंसा ना करें. सरकार के पास अभी इस मुद्दे को सुलझाने का समय है."

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मुंबई में कोरोना से एक भी मौत नहीं
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में ख़बर दी गई है कि मार्च 2020 में कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से मुंबई में पहली बार कोरोना से कोई मौत नहीं हुई है.
रविवार को शहर में कोरोना के 367 नए मामले दर्ज किए गए, लेकिन एक भी मौत का मामला सामने नहीं आया.
राज्य में कुल मामलों की संख्या साढ़े सात लाख से ऊपर पहुंच गई है. वहीं, शहर में 16 हज़ार से ज़्यादा लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है.
लेकिन, मुंबई में हालात सुधरते नज़र आ रहे हैं और 97 प्रतिशत रिकवरी रेट के साथ सात लाख से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं.
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