केरल: बाढ़ में मरने वालों की संख्या 26 हुई, कई लापता

केरल में बारिश

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    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

देश के दक्षिणी राज्य केरल में बारिश के कहर से मरने वालों की संख्या 26 हो गई है.

राजस्व अधिकारियों के मुताबिक 16 अक्टूबर को कोट्टायम और इडुक्की ज़िलों में बारिश में मारे गए 24 लोगों में से अब भी इडुक्की में दो और कोट्टायम में एक शव की तलाश जारी है.

कोट्टायम ज़िले में बड़े स्तर पर चल रहे बचाव कार्यों के बीच पुलिस किसी शख़्स का सिर्फ़ पैर मिलने से हैरान है. उस शख़्स के लिए गुमशुदा होने की कोई शिकायत भी नहीं की गई है. कोट्टायम केरल के भारी बारिश से सबसे ज़्यादा प्रभावित ज़िलों में से एक है.बचावकर्मी पलापल्ली पंचायत में भूस्खलन में मारे गए लोगों के शवों की तलाश कर रहे थे. इस बीच उन्हें एक 14 साल के लड़के एलन जॉबी का शव मिला जिसके अंग कटे हुए नहीं थे. लेकिन, उसके साथ ही बचावकर्मियों को ''एक किशोर का पैर" भी मिला.

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कोट्टायम की पुलिस अधीक्षक डी शिल्पा ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हम नहीं जानते कि वो पैर किसका है. हम देख रहे हैं कि क्या इडुक्की से कोई यहां लाया गया है."कोट्टायम मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने इस बात की पुष्टि की कि दूसरे लड़के के अंग कटे नहीं हैं. हालांकि, पोस्टमार्टम के लिए लाते समय ''चेहरा कुछ ख़राब हो गया है.''

जिस शख़्स का पैर मिला उसकी पहचान करने के लिए अस्पताल डीएनए टेस्ट के लिए पुलिस के निर्देशों का इंतज़ार कर रहा है. पुलिस डीएनए टेस्ट कराने से पहले अपनी जांच के नतीजों का इंतजार कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैर किस शरीर का है. डॉक्टर रेनजिन ने कहा, "डीएनए टेस्ट के नतीजे आने में लगभग दो या तीन दिन लगेंगे."

इस बीच प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राज्य में आई इस आपदा पर ट्वीट किए हैं.

पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, ''केरल के मुख्यमंत्री श्री पिनराई विजयन से बात की और केरल में भारी बारिश और भूस्खलन से पैदा हुए हालात पर चर्चा की. अधिकारी लोग घायलों और प्रभावितों की मदद के लिए जमीन पर काम कर रहे हैं. मैं सभी के सुख-सलामती की प्रार्थना करता हूं.''

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उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ''यह दुख की बात है कि केरल की भारी बारिश और भूस्खलन से कई लोगों की मौत हो गई. शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं.''

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बांधों को खोलने पर फ़ैसला

इस बीच राज्य सरकार ने राज्य में विभिन्न बांधों को खोलने का फ़ैसला विशेषज्ञ समिति पर छोड़ने का निर्णय किया है. साल 2018 में भारी बारिश के कारण केरल के 14 में से 13 ज़िलों में बाढ़ आ गई थी. तब ये विवाद शुरू हुआ था कि निचले इलाक़ों में रहने वाले लोगों को बताए बिना बांध खोल दिए गए थे.मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मंत्रियों और अधिकारियों की एक बैठक में कहा कि विशेषज्ञ समिति तय करेगी कि संबंधित बांधों में पानी की मात्रा के आधार पर कौन-सा बांध खोला जाना चाहिए.मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बयान में कहा गया है कि बांधों के खुलने के कुछ घंटे पहले ज़िला कलेक्टरों को सूचित किया जाएगा ताकि स्थानीय लोगों को वहां से हटने के लिए पर्याप्त समय मिले.''

भीषण बाढ़ से जूझ रहे केरल में कई बाँधों में लगातार बारिश की वजह से जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है.

पहले से ही राज्य में बाढ़ की वजह से भारी नुकसान हो चुका है और कई लोगों की जान भी गई है. अब लगातार हो रही बारिश ने केरल के कई बाँधों का जलस्तर लगातार ख़तरनाक होता जा रहा है.

एशिया के सबसे ऊंचे इडुक्की डैम का जलस्तर इस वक्त 2,396.96 फ़ुट है. इडुक्की में ऑरेंज एलर्ट जारी कर दिया गया है. 2403 फ़ुट पर डैम पूरी तरह से भर जाएगा.

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'अलेप्पी की स्थिति चिंताजनक'

राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "अलेप्पी की स्थिति चिंताजनक है. यह हर तरफ़ से पानी से घिरा हुआ है. हालांकि पूरे राज्य में बारिश का असर काफी कम हो गया है."

कुट्टिकल में फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए सेना के मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप (एमईजी) को तैनात किया गया था. असल में कल अरब सागर में कम दबाव बनने से कोट्टायम ज़िले में 'बादल फटने की दो या तीन घटना हुई', जिससे वहां सबसे ज्यादा घर ढहे और भूस्खलन हुआ.

नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया, "अभी तक कोट्टायम, इडुक्की और पतनमतिट्टा ज़िले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. अलेप्पी अभी पानी से घिरा है, क्योंकि यह ढलाई वाला इलाक़ा है. इसलिए यहां से होकर इडुक्की और कोट्टायम का सारा पानी नीचे बह रहा है. अलेप्पी से पानी अरब सागर में चला जाता है."

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फिर बारिश होने की चेतावनी

राज्य में राहत शिविरों की संख्या 105 से बढ़कर 108 हो गई है और 6,000 से अधिक लोगों को खाना, कपड़ा और बिस्तर उपलब्ध कराया जा रहा है. सरकार ने उन लोगों को वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है जिनके घर और फ़सलें बर्बाद हो गई हैं.

सबरीमाला में भगवान अयप्पा की तीर्थयात्रा को इस बार रद्द कर दिया गया है क्योंकि निलक्कल और पेरुन्थेनारुवी क्षेत्र में रविवार को 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश हुई है. केरल में गंभीर स्थिति में बनी हुई है क्योंकि मौसम विभाग ने 20 अक्टूबर से तीन या चार दिनों के लिए भारी बारिश की चेतावनी दी है.

इससे पहले केरल में अगस्त 2018 में भी भारी बारिश के चलते बाढ़ आई थी. और तब राज्य के 14 में से 13 ज़िले बुरी तरह प्रभावित हुए, जिससे लगभग 500 लोग मारे गए थे.

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