क्वाड से चिंतित चीन को भारत और ऑस्ट्रेलिया ने यूं दिया जवाब

क्वाड बैठक में शामिल हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया के विदेश एवं रक्षा मंत्री

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भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बीते शनिवार क्वाड से जुड़ी चीन की आलोचना को ख़ारिज करते हुए कहा है कि ये ज़रूरी है कि वास्तविकता को ग़लत ढंग से पेश न किया जाए.

जयशंकर ने ये बात भारत और ऑस्ट्रेलिया के विदेश एवं रक्षा मंत्रियों के बीच हुई बैठक के बाद एक प्रेस वार्ता के दौरान कही.

इस प्रेस वार्ता में ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मैरिस पैन, रक्षा मंत्री पीटर डटेन और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया.

बता दें कि इससे पहले चीन ने ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, भारत और जापान के संगठन क्वाड को एशियाई देशों के नेटो संगठन की संज्ञा देते हुए इसकी आलोचना की थी.

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बीती 13 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि "हम सभी जानते हैं कि क्वाड किस तरह का तंत्र है. एक अलग गुट बनाने, चीन को एक चुनौती के रूप में पेश करने, क्षेत्र के देशों और चीन के बीच कलह पैदा करने के कुछ देशों के प्रयासों का चीन विरोध करता है."

एक सवाल के जवाब में उन्होंने ये भी कहा था कि "जहां तक क्वाड का संबंध है, मुझे लगता है कि भारत इस तंत्र की मंशा को हमसे बेहतर जानता है. क्या इसका इरादा चीन के खिलाफ एक छोटे-से गुट को खड़ा करना नहीं है?"

इसके अलावा चीन अलग-अलग मौकों पर इस संगठन को लेकर स्पष्ट शब्दों में आलोचना करता रहा है.

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क्या बोले एस. जयशंकर

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, इस प्रेस वार्ता में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने चीन द्वारा दी गयी क्वाड की परिभाषा को ख़ारिज किया.

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को जवाब देते हुए कहा कि ये बेहद अहम है कि वास्तविकता को ग़लत ढंग से पेश न किया जाए, और ये समूह इन देशों और वैश्विक कल्याण में काम करने का मंच है.

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि नेटो एक शीत युद्ध से जुड़ा टर्म है जो कि इतिहास की ओर देखता है. वहीं, क्वाड भविष्य में झांकता है, ये भूमंडलीकरण को दर्शाता है और देशों के एक साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत को सामने रखता है."

मोदी, जिनपिंग

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इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि क्वाड वैक्सीन, आपूर्ति श्रंखला (सप्लाई चेन) और शिक्षा जैसे मुद्दों पर आधारित था.

क्वाड की नेटो से तुलना पर जयशंकर ने कहा, "मैं ऐसे मुद्दों और नेटो या उस जैसी किसी अन्य संस्था के बीच किसी तरह का संबंध नहीं पाता हूं. ऐसे में मुझे लगता है कि ये बेहद अहम है कि वास्तविकता को ग़लत ढंग से पेश न किया जाए."

बैठक के बाद जयशंकर ने ये भी कहा कि इस बैठक में अफ़ग़ानिस्तान पर विशेष रूप से चर्चा की गयी और दोनों पक्ष इस बात पर राज़ी हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपने रुख में एकजुट रहने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रुख का निर्धारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव के 30 अगस्त को लिए गए प्रस्ताव के आधार पर होना चाहिए जिसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं हो. और, यूएनएससी प्रस्ताव 1267 के तहत आतंकी ठहराए गए व्यक्तियों एवं संगठनों के लिए भी न हो.

ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा?

ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मैरिस पैन ने एस जयशंकर की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने संबंधों को ऊर्जा प्रदान की है, ऐसे में दोनों देशों के पास क्वाड जैसे छोटे समूहों एवं पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एवं दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान जैसे क्षेत्रीय मंचों के ज़रिए साथ काम करने का अवसर भी है.

उन्होंने कहा कि "हमारा वैक्सीन, जलवायु परिवर्तन और अहम तकनीक आदि को लेकर एक सकारात्मक एवं व्यावहरिक उद्देश्य है. इसके साथ ही हम कोविड महामारी से जुड़े दुष्प्रचारों से निपटने में लगे हैं."

ऑस्ट्रेलियाई विदेश एवं रक्षा मंत्री ने अपनी इस बैठक के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाक़ात की.

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ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पीएम मोदी से बात करती हुईं

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काबुल में सरकार गठन पर बोले जयशंकर

इसके साथ ही एस जयशंकर ने काबुल में तालिबानी नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन पर अपनी पहली टिप्पणी दी है.

जयशंकर ने कहा कि अंतरिम सरकार के गठन के दौरान इसके समावेशी होने, महिलाओं एवं अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार, अफ़ग़ान नागरिकों के यात्रा करने, मानवीय मदद पहुंचाने से जुड़ी चिंताएं थीं. "ऐसे में, ये एक बदलती हुई स्थिति थी."

बांग्लादेश और चीन भी हुए थे आमने-सामने

बता दें कि इससे पहले चीन और बांग्लादेश के बीच क्वाड को लेकर एक विवाद ने जन्म ले लिया था.

ढाका में चीन के राजदूत ली जिमिंग ने बांग्लादेश को अमेरिका के नेतृत्व वाले क्वाड गठबंधन में शामिल होने के खिलाफ आगाह करते हुए कहा था कि बीजिंग विरोधी "क्लब" में ढाका की भागीदारी के वजह से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को "काफी नुक़सान" होगा.

बांग्लादेश के डिप्लोमैटिक कॉरेस्पोंडेट्स एसोसिएशन की तरफ से आयोजित एक वर्चुअल बैठक में ली ने कहा था, "ज़ाहिर है, बांग्लादेश के लिए चार देशों के इस छोटे से क्लब (क्वाड) में भाग लेना अच्छा नहीं होगा क्योंकि यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों को काफी नुकसान पहुँचाएगा."

चीनी राजदूत की टिप्पणी को "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण" और "आक्रामक" बताते हुए बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ एके अब्दुल मोमेन ने कहा था, "हम एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य हैं. हम अपनी विदेश नीति खुद तय करते हैं."

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