BBC IMPACT: भारत में फंसे चीनी सैनिक पर गंभीर हुआ चीन
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में बीते 54 साल से फंसे पूर्व चीनी सैनिक वांग छी के मामले पर चीनी विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है. इसको लेकर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत स्थित चीनी राजदूत से संपर्क किया है.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कैंग ने कहा, "हम वांग छी को चीन लाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं और इस बाबत भारत स्थित दूतावास के संपर्क में हैं."
इस बीच वांग छी के बेटे विष्णु ने कहा कि उन्हें केवल आश्वासन दिया जा रहा है. हालांकि विष्णु को भारत सरकार की तरफ से जिला कलेक्टर के दफ्तर से बुलावा आया है.
बीबीसी से बातचीत में विष्णु ने कहा, "वे लोग वास्तव में केवल उम्मीदें दे रहे हैं, कोई नतीजा नहीं. मेरे पिता के चीन जा पाने की कोई तारीख नहीं बताई जा रही है. मेरे पिता 77 साल के हो चुके हैं. उनकी कब मौत हो जाएगी. क्या पता. ."
चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत में चीनी दूतावास हाल के वर्षो में इस बात की कोशिश करता रहा है कि वांग छी चीन में अपने परिवार से मिलने आ सकें. साथ ही भारत पर इस बात के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है कि वो उनके भारत से बाहर जाने के लिए जरूरी दस्तावेज़ मुहैया कराए.
लू कैंग के मुताबिक चीनी दूतावास ने 2013 में वांग छी को 10 साल के लिए पासपोर्ट मुहैया कराया और उन्हें खर्च चलाने के लिए कुछ पैसे भी दिए जाते हैं.
बीबीसी ने भारत के मध्य प्रदेश के तिरोडी ज़िले में रह रहे वांग छी की दर्द भरी कहानी को अपने वैश्विक प्लेटफ़ॉर्म पर रखा था, जिसे भारत से लेकर चीन तक की मीडिया ने प्रकाशित किया.
इन सबका असर ये हुआ कि चीनी अधिकारी हरकत में आए हैं. लू कैंग ने ये भी कहा, "भारत और चीन की संयुक्त कोशिशों और वांग छी की इच्छा को देखते हुए इस मामले को जल्द ही संतोषजनक ढंग से निपटा लिया जाएगा."

भारत स्थित चीन के राजदूत लूओ ज़ाओही ने भी वांग छी से फ़ोन पर बात कर उन्हें इस दिशा में की जा रही कोशिशों के बारे में बताया है. इससे पहले भारत स्थित चीनी दूतावास के अधिकारियों ने वांग छी से तिरोड़ी में मुलाकात कर उन्हें मदद करने का भरोसा दिलाया था.
भारत-चीन लड़ाई के दौरान वांग छी रास्ता भटक कर भारत पंहुच गए. वे गिरफ़्तार हुए, उन पर मुक़दमा चला, उन्हें सज़ा हुई. सज़ा पूरी होने के बाद वे यहीं बस गए, भारतीय महिला से शादी की और अब अपने भरे पूरे परिवार के साथ रहते हैं.
पूर्व चीनी सैनिक का कहना था, "चीनी दूतावास के अधिकारी मेरी खोज ख़बर लेने, मेरा हाल जानने के लिए मेरे घर आए थे. उन्होंने कहा कि वे मुझे लेकर काफ़ी फ़िक्रमंद हैं. वे भारत सरकार से बात करेंगे. यदि भारत सरकार ने चीन जाने की इजाज़त दे दी और उससे जुड़े काग़ज़ात दे दिए तो वे मुझे चीन भेज देंगे."
उन्होंने उम्मीद जताई कि वे ज़ल्द ही चीन जा सकेंगे.

चीनी दूतावास के काउंसलर यान शियाओचे जब वांग छी से मिलने उनके घर गए तो उनके साथ दूतावास के कई दूसरे कर्मचारी और चीनी मीडिया के कुछ पत्रकार भी थे.
कांउसलर अपने साथ चीनी नव वर्ष के मौके पर उपहार के रूप में तरह तरह के खाने पीने की चीजें और कपड़े वगैरह भी ले गए थे.
दूतावास के एक दूसरे अधिकारी ने कहा, "भारत में इतने साल रहते हुए वांग छी को स्वादिष्ट चीनी खाना पाने में काफ़ी दिक़्क़तें हुई होंगी. इसलिए, हम उनके लिए ये खाना भी लेते आए".
उन्होंने वहां वांग छी के परिवार के सभी सदस्यों से मुलाक़ात की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाई.
शियाओचे ने बीबीसी से कहा कि भारत और चीन के बीच बेहद अच्छे रिश्ते हैं और दोनों देश मिल कर इस मामले को निपटा लेंगे.
चीनी अधिकारी वांग छी के घर पंहुचे तो वहां मजमा लग गया. आस पड़ोस के काफ़ी लोग इकट्ठा हो गए.
उन लोगों ने इस बात पर खुशी जताई कि कई साल बाद ही सही, लेकिन चीन ने वांग छी की खोज ख़बर ली.
वहां तरह तरह की अफ़वाहें भी उड़ने लगीं. कुछ लोग यह भी कहने लगे कि वांग छी को लाखों रुपए मिले हैं और वे अब अपनी बची खुची ज़िंदगी मजे से काट सकेंगे.
शियाओचे ने वांग छी को पड़ोसियों से उनका इतने लंबे समय तक ख़्याल रखने के लिए धन्यवाद कहा.
वांग छी की पत्नी सुशीला और उनके बेटे विष्णु ने भी चीनी अधिकारियों के उनके घर जा कर हाल चाल पूछने पर खुशी जताई.















