मुस्लिम नेताओं को कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ एक स्पष्ट स्टैंड लेना चाहिएः मोहन भागवत- प्रेस रिव्यू

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत

इमेज स्रोत, ANI

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि मुस्लिम नेताओं को कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ एक स्पष्ट रवैया अपनाना चाहिए. मोहन भागवत पुणे की एक संस्था 'ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पॉलिसी फ़ाउंडेशन' की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, "ये एक ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत में इस्लाम आक्रमणकारियों के साथ आया और ये ज़रूरी है कि इसे इसी तरह से कहा जाना चाहिए. मुस्लिम समाज के समझदार नेताओं को कट्टरपंथ का विरोध करना ही होगा. उन्हें कट्टरपंथी लोगों के ख़िलाफ़ स्पष्ट रूप से बोलने की ज़रूरत है. इस काम में लंबे समय तक काम करने की ज़रूरत पड़ेगी और धीरज रखना होगा. ये हम सब के लिए एक लंबा और मुश्किल इम्तिहान होगा. हम इसे जितना जल्द शुरू करेंगे, समाज को उतना कम नुक़सान होगा."

'ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पॉलिसी फ़ाउंडेशन' की इस मीटिंग का विषय था 'नेशन फ़र्स्ट, नेशन एबव ऑल' (राष्ट्र सबसे पहले, राष्ट्र सबसे ऊपर) और इसके श्रोताओं में मुख्यतः कश्मीरी छात्र, डिफ़ेंस के रिटायर्ड अधिकारी और आरएसएस के सदस्य शामिल थे.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ये मीटिंग ऐसे समय में हुई है जब देश में इस पर बहस चल रही है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी पर भारतीय मुसलमानों को किस तरह से और क्या प्रतिक्रिया देनी चाहिए.

संघ और तालिबान की तुलना करने वाले कवि और गीतकार जावेद अख़्तर की टिप्पणी को लेकर पहले ही विवाद पैदा हो गया है. मुंबई में एक स्थानीय भाजपा नेता ने मांग की है कि जावेद अख़्तर अपनी टिप्पणी पर माफ़ी मांगें.

सुप्रीम कोर्ट

इमेज स्रोत, Getty Images

मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट की वॉर्निंग

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर देश के अलग ट्राइब्यूनल्स में खाली पड़े 250 पदों को जल्द नहीं भरा गया तो उसके ख़िलाफ़ अदालत की मानहानि की कार्यवाही शुरू की जाएगी.

कोलकाता से छपने वाले टेलीग्राफ़ अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, चीफ़ जस्टिस एन वी रमन्ना की अगुवाई वाले स्पेशल बेंच ने कहा कि देश की सबसे बड़ी अदालत को इज़्ज़त देने में केंद्र कोताही बरत रहा है और वो सुप्रीम कोर्ट के 'धैर्य की परीक्षा' ले रहा है.

कोर्ट ने कहा, "इन ट्राइब्यूनल्स में नियुक्ति करने के बजाय सरकार नए क़ानून लेकर आ रही है जो और कुछ नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ख़ारिज किए जा चुके क़ानूनों की नकल हैं."

पिछले महीने संसद में आनन-फ़ानन में पेश किए गए एक क़ानून के ज़रिये अलग-अलग ट्राइब्यूनल्स में अर्ध-न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति और उन्हें हटाने का अधिकार केंद्र को देने का प्रावधान रखा गया है.

ट्राइब्यूनल्स या अर्ध न्यायिक संस्थाएं जैसे नेशनल कन्ज़्यूम डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन, नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल, इनकम टैक्स ऐपेलेट ट्राइब्यूनल और नेशनल कंपनी लॉ ऐपेलेट ट्राइब्यूनल में रिटायर्ड जज नियुक्त किए जाते हैं ताकि विषय विशेष से जुड़े मुद्दों को लेकर नियमित अदालतों पर काम का दबाव कम किया जा सके.

नीतीश कुमार

इमेज स्रोत, ANI

जाति जनगणना की मांग ज़ोर पकड़ रही है: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि देश के अन्य राज्यों के कई राजनीतिक दलों ने जाति के आधार पर जनगणना की मांग तेज़ कर दी है और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ़ैसला लेना है.

इकोनॉमिक टाइम्स पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ नीतीश कुमार ने उन संभावनाओं को भी ख़ारिज किया है जिनमें ये कहा जा रहा है कि जाति के आधार पर जनगणना कराने से सामाजिक तनाव बढ़ेगा.

नीतीश कुमार ने पत्रकारों से कहा, "हम हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी से इस मुद्दे को लेकर मिले थे. बिहार के सभी राजनीतिक दलों के नेता इस बात पर एकमत हैं कि पूरे देश में जाति के आधार पर जनगणना कराई जानी चाहिए क्योंकि इससे सभी को फ़ायदा होगा. उन्होंने सब की बात ध्यानपूर्वक सुनी. अब उन्हें इस पर फ़ैसला लेना है."

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार की 10 राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल की नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ 23 अगस्त को इस सिलसिले में मुलाकात हुई थी.

भारत में आख़िरी बार जाति के आधार पर जनगणना अंग्रेज़ों के शासनकाल में हुई थी.

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज

केरलः 11 लोगों में निपाह के लक्षण

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा है कि निपाह वायरस से संक्रमण के कारण मरने वाले 12 साल के लड़के के संपर्क में 251 लोग आए थे जिनमें 38 लोगों को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में क्वारंटीन में रखा गया है.

केरल से छपने वाले मातृभूमि अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार इनमें 11 लोगों में निपाह संक्रमण के लक्षण नोटिस किए गए हैं.

राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि पुणे स्थित एनआईवी को जांच के लिए आठ सैंपल्स भेजे गए हैं.

जिस 12 वर्षीय लड़के की मौत हुई है, उसके संपर्क में आने वाले 251 लोगों में 129 स्वास्थ्य कर्मी थे. 54 लोग हाई रिस्क कैटगिरी में हैं और इन 54 लोगों में 30 हेल्थ वर्कर हैं. जिन लोगों में लक्षण पाए गए हैं, उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है.

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन हालात में कोझिकोड में कोविड वैक्सीन का अभियान दो दिन के लिए रोक दिया गया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)