पीएम केयर्स फ़ंड: सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी क्यों नहीं थम रहे सवाल

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- Author, प्रवीण शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
प्रधानमंत्री केयर्स फ़ंड को लेकर विपक्ष और एक्टिविस्ट्स की ओर से सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का एक अहम फ़ैसला आया.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि प्राइम मिनिस्टर्स सिटीज़न असिस्टेंटस एंड रिलीफ़ इन इमर्जेंसी सिचुएशंस (पीएम केयर्स) फ़ंड को नेशनल डिज़ास्टर रिलीफ़ फ़ंड (एनडीआरएफ़) में ट्रांसफ़र करने की कोई ज़रूरत नहीं है.
एक एनजीओ सेंटर फ़ॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशन की दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए सर्वोच्च अदालत ने कहा कि पीएम केयर्स फ़ंड के पैसे को एनडीआरएफ़ में ट्रांसफ़र करने का आदेश नहीं दिया जा सकता है.
एनजीओ ने कोरोना वायरस महामारी के चलते फ़ंड्स को ट्रांसफ़र करने का निर्देश सरकार को देने की मांग की थी. याचिका में पीएम केयर्स फ़ंड पर सवाल उठाते हुए कहा गया था कि केंद्र पीएम केयर्स फ़ंड में अब तक आए पैसे के बारे में जानकारी देने से बच रही है.
फ़ैसले पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही को तगड़ा झटका देने वाला है.
फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि सर्वोच्च अदालत के पास इस फ़ंड में पारदर्शिता लाने का मौक़ा था "जिसके अपने अस्पष्ट और संदेहास्पद नियम" हैं.

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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने अपने फ़ैसले में कहा है कि एनडीआरएफ़ में हमेशा से स्वैच्छिक योगदान दिया जा सकता है क्योंकि डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट में इसके लिए संवैधानिक रोक नहीं है.
बीजेपी की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, बीजेपी इस फैसले के बाद कांग्रेस पर हमलावर हो गई है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा है कि पीएम केयर्स फ़ंड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला राहुल गांधी और उनके "किराए पर सामाजिक मसलों को उठाने वाले एक्टिविस्ट्स के समूह" के ग़लत इरादों को एक तगड़ा झटका बताया है.
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, "पीएम केयर्स फ़ंड में कानूनी अनिवार्यताओं और पैसों के पारदर्शी प्रबंधन के लिहाज से पारदर्शिता एकदम स्पष्ट है. पीएम केयर्स फंड को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में बिना वजह निशाना बनाया गया है."
उन्होंने कहा, "राहुल गांधी अपने सलाहकारों की राय के आधार पर ऐसा करते रहे हैं. राहुल गांधी ने लगातार अपने बयानों से अलग-अलग मोर्चों पर देश को कमज़ोर किया है."
रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि पीएम केयर्स फ़ंड को चलाने में कानून का पालन किया गया है. उन्होंने कहा कि फ़ंड ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अब तक 3,100 करोड़ रुपये का योगदान किया है. उन्होंने कहा कि इस 3,100 करोड़ रुपये की रकम में से 2,000 करोड़ रुपये वेंटीलेटर्स के लिए, 1,000 करोड़ रुपये प्रवासी मजदूरों के लिए और 100 करोड़ रुपये वैक्सीन विकसित करने के लिए दिए गए हैं.
'सुप्रीम कोर्ट ही कुछ न करे तो आम आदमी क्या करेगा'
पीएम केयर्स फ़ंड की नींव रखे जाने के साथ ही इस पर विवाद शुरू हो गए थे. विपक्षी पार्टियां और एक्टिविस्ट्स लगातार इस फ़ंड की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने बीबीसी को बताया, "डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट के सेक्शन 46 में साफ़ लिखा है कि आपदा के वक्त कोई भी पैसा आता है तो वह एनडीआरएफ़ में आता है. इसलिए किसी नए फ़ंड को बनाने की कोई ज़रूरत ही नहीं थी."
वे कहते हैं, "एनडीआरएफ की सीएजी ऑडिट कर सकता है. इसमें आरटीआई प्रभावी होती है. लेकिन, पीएम केयर्स फ़ंड का न तो सीएजी से ऑडिट हो सकता है और न ही इसमें आरटीआई के जरिए जानकारियां मांगी जा सकती हैं."
वे कहते हैं कि सरकार इसकी ट्रस्ट डीड भी नहीं दिखा रही है. ऐसा क्यों है.
प्रशांत भूषण कहते हैं कि इस फ़ंड के पीछे सरकार की मंशा समझ नहीं आती. इस पैसे का कैसे इस्तेमाल होना है इसका कुछ पता नहीं है.
मंगलवार के फैसले पर भूषण कहते हैं, "अब अगर सुप्रीम कोर्ट ही कुछ न करे तो आम आदमी क्या कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट का काम ही यह है कि वह सरकार की जवाबदेही तय करे."
पहले भी दाख़िल हो चुकी है एक पीआईएल
पहले भी पीएम केयर्स फ़ंड को लेकर पीआईएल दाखिल की गई हैं. इस वक्त भी एक याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है.
सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट, शाश्वत आनंद ने अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर पीएम केयर्स फंड को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल को विद्ड्रॉ करा दिया था.
वे कहते हैं कि आज जो सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है उसमें केवल यह मांग की गई थी कि इस फंड का पैसा एनडीआरएफ में ट्रांसफ़र किया जाए. इस याचिका में इस फ़ंड को असंवैधानिक घोषित करने की मांग नहीं की गई थी, बल्कि इसमें केवल सरकार की मंशा पर सवाल उठाया गया था.
शाश्वत आनंद कहते हैं, "पीएम केयर्स की सारी जानकारियां वेबसाइट पर डाली जाएं. इसकी ट्रस्ट डीड को सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए."
वे कहते हैं कि इस फ़ंड का ऑडिट सीएजी से कराइए.
शाश्वत कहते हैं, "हमने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जो याचिका दायर की है कि उसमें हमने न केवल पीएम केयर्स को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है, बल्कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ़) को भी असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है."
वे कहते हैं कि पीएम केयर्स फ़ंड का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाना चाहिए. हालांकि, पीएमएनआरएफ़ का पूरा डेटा साइट पर पड़ा है.
शाश्वत कहते हैं कि पीएम केयर्स ट्रस्ट एक सरकारी ट्रस्ट है. वे कहते हैं, "पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री की हैसियत से यह फंड बनाया है."
वे कहते हैं, "इस तरह का ट्रस्ट बना ही नहीं सकते हैं. इस तरह का फंड केवल कानून बनाकर ही बनाया जा सकता है. इसे सरकार ने बिना कानून के बनाया है. इस तरह से पीएम केयर्स फ़ंड गैरकानूनी है."
उका कहना है कि 'अगर यह फ़ंड कानून लाकर बनाया गया होता तो यह सीएजी की ऑडिट के दायरे में आ जाता. इसीलिए कानून को बायपास करके इस फ़ंड को बनाया गया है.'
लेकिन, पीएम केयर्स के पैसे को एनडीआरएफ़ में ट्रांसफ़र करने की मांग क्यों की गई थी, इससे क्या फ़र्क पड़ता?

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शाश्वत कहते हैं, "एनडीआरएफ़ पर आरटीआई लागू होती है. सीएजी इसे ऑडिट करता है. साथ ही इसमें वार्षिक रिपोर्ट का प्रावधान है. यह सरकार की जवाबदेही का, आम लोगों के पैसे का मसला है." वे कहते हैं कि जनता के पैसे की जवाबदेही होनी चाहिए."
"इस फ़ंड का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है. अधिकारी ग़लत इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें कोई चेक नहीं है. एनडीआरएफ़ के पैसों के साथ ऐसा नहीं हो सकता है."
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