दीक्षा शिंदे के नासा पैनलिस्ट बनने की रिपोर्ट का सच क्या है?- फ़ैक्ट चेक

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- Author, कीर्ति दुबे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बीते सप्ताह 19 अगस्त को समाचार एजेंसी एएनआई ने सिलसिलेवार ट्वीट करके दावा किया कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद की रहने वाली 14 साल की दीक्षा शिंदे अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के एमएसआई फ़ेलोशिप के वर्चुअल पैनल के लिए बतौर पैनलिस्ट चुनी गई हैं.
दीक्षा शिंदे ने एएनआई की रिपोर्ट में ये भी कहा कि ''उनकी 'ब्लैक होल और गॉड' थ्योरी को नासा ने मंज़ूरी दी है और ये मंज़ूरी लागातार तीन बार रिजेक्ट किए जाने के बाद मिली है. नासा ने मुझे वेबसाइट के लिए ऑर्टिकल लिखने के लिए कहा है.''
देखते ही देखते कई न्यूज़ वेबसाइट्स पर 10वीं की छात्र दीक्षा शिंदे की उपलब्धियों की कहानी छा गई. और इन मीडिया रिपोर्ट्स का सोर्स था एनएनआई का ट्वीट और तस्वीरें. हालाँकि एएनआई ने अब अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है और न्यूज़ रिपोर्ट वेबसाइट से हटा ली है.
अपने ट्वीट में एएनआई ने दीक्षा के बयान, उसकी तस्वीर और नासा के एक कथित सर्टिफ़िकेट की तस्वीर भी छापी थी.
सर्टिफिकेट पर लिखा था- 'नासा प्रपोज़ल रिसर्च 2020, दीक्षा शिंदे को परफ़ेक्ट रिसर्च प्रपोज़ल के लिए बेहतरीन कोशिश किए जाने के लिए ये अवॉर्ड दिया जा रहा है.'
यहाँ सर्टिफ़िकेट पर सीईओ और प्रेसीडेंट के तौर पर जिम ब्राइडेंसटाइन का नाम लिखा है और डिपार्टमेंट चेयर के तौर पर जेम्स फ्रेडरिक का नाम लिखा गया है.

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जब इस खबर को लेकर एएनआई पर सवाल उठे तो एजेंसी की एडिटर इन चीफ़ स्मिता प्रकाश ने ट्वीट करके कहा, '' ये फ़ेक स्टोरी नहीं है, हम अपनी कहानी के साथ अभी भी खड़े हैं.''
हालाँकि अब उन्होंने भी अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है.
नासा ने बीबीसी से क्या कहा?
बीबीसी ने 20 अगस्त को इस मामले पर नासा से एक इमेल के ज़रिए संपर्क किया.
26 अगस्त को नासा ने अपने जवाब में हमें बताया, "मई, 2021 में नासा ने एक थर्ड पार्टी सर्विस के ज़रिए एक्सपर्ट पैनलिस्ट के लिए आवेदन मंगाए थे, ताकि ये पैनलिस्ट नासा की फ़ेलोशिप के लिए आए आवेदन का रिव्यू कर सकें. दीक्षा शिंदे ने अपने बैकग्राउंड को लेकर ग़लत जानकारी दी थी. इस वक़्त पैनलिस्ट के लिए आवेदन करने वालों के बैकग्राउंड की जाँच की प्रक्रिया जारी है. ना ही दीक्षा शिंदे नासा से जुड़ी हुई हैं और ना ही हमने उन्हें कोई फ़ेलोशिप दी है.''
''ये फ़ेलोशिप केवल अमेरिकी नागरिकों के लिए है. नासा ने शिंदे की ओर से कोई भी साइंस पेपर को एक्सेप्ट नहीं किया है और ना ही प्रशस्ति पत्र दिया है. ऐसा कोई भी दावा कि नासा उनकी अमेरिका यात्रा का ख़र्च वहन कर रहा है, ये भी पूरी तरह ग़लत है.''

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फ़ेक सर्टिफ़िकेट पर नासा के पूर्व एडमिनिस्ट्रेटर का नाम
एएनआई पर शिंदे का सर्टिफ़िकेट शेयर किया गया था, उस पर सीईओ और प्रेसीडेंट के तौर पर जिम ब्राइडेंसटाइन का नाम है. जैसे ही हमने ये नाम गूगल पर सर्च किया हमें नासा की वेबसाइट का एक पेज का लिंक मिला.
नासा की वेबसाइट के मुताबिक़ जेम्स फ्रेडरिक 'जिम' ब्राइडेंसटाइन स्पेस एजेंसी के 13 वें एडमिनिस्ट्रेटर थे. जिनका चयन ट्रंप प्रशासन के दौरान 23 अप्रैल 2018 को हुआ था और 20 जनवरी 2021 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
पहली बात- जेम्स नासा के सीईओ या प्रेसीडेंट नहीं पूर्व एडमिनिस्ट्रेटर हैं. जिनका कार्यकाल इस साल की शुरुआत में ही ख़त्म हो गया.
दूसरी बात- जेम्स फ्रेडरिक 'जिम' ब्राइडेंसटाइन एक ही शख्स का नाम है, जिसे शिंदे के फ़ेक सर्टिफिकेट पर दो अलग-अलग लोगों के नाम की तरह इस्तेमाल किया.
नासा की फ़ेलोशिप के नियम
नासा की माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशन फ़ेलोशिप को भरने के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं. इसमें केवल अमेरिकी नागरिक ही आवेदन कर सकते हैं. जिन लोगों ने विज्ञान, गणित, तकनीक जैसे विषयों में ग्रेजुएशन किया है और इस साल 1 सितंबर से मास्टर्स या रिसर्च प्रोग्राम में दाखिला ले चुके हों, वहीं लोग इस फ़ेलोशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं.
ज़ाहिर है इस लिहाज से भी दीक्षा शिंदे इस फ़ेलोशिप के लिए फ़िट नहीं बैठती. ऐसे में वो इस आवेदन को रिव्यू करने वाली पैनल का हिस्सा कैसे हो सकती थीं.
इस तरह समाचार एजेंसी एएनआई पर आई स्टोरी ग़लत साबित हुई, जिसे कई मीडिया संस्थानों ने हूबहू प्रकाशित कर दिया था.
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