असम मिज़ोरम सीमा पर एक तरफ़ बंकर तो दूसरी तरफ़ पुलिस चौकियां -प्रेस रिव्यू

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भारत के पूर्वोत्तर में असम और मिज़ोरम के बीच जारी सीमा विवाद सोमवार को काचर में हुई हिंसक घटना के बाद चौथे दिन भी जारी रहा.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ करीमगंज ज़िले की बराक वैली में दोनों राज्यों की सीमा पर संदिग्ध मिज़ो लोगों ने बंकर बना रखे हैं और दूसरी तरफ़ असम ने कथित तौर पर बड़ी संख्या राज्य पुलिस को वहां तैनात कर दिया है.
इस बीच मिज़ोरम दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार को तीन बार अपना राजनीतिक संदेश भेज चुका है. विवादित क्षेत्र में असम की पुलिस चौकियों की तादाद बढ़ाए जाने के बाद मिज़ोरम ने केंद्र को सीमा विवाद भड़कने को लेकर आगाह किया है. विवादित क्षेत्र फ़िलहाल केंद्रीय रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स के जवानों की निगरानी में है.
अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ गुरुवार शाम को असम ने दावा किया कि करीमगंज ज़िले में स्थित रताबाड़ी के भुबीरबंद इलाके में 'कथित मिज़ो घुसपैठियों ने बंकर बना' लिए हैं. कुछ साल पहले मिज़ोरम पर भुबीरबंद में बड़े इलाके को अपने नियंत्रण में लेने का आरोप लगाया गया था.
करीमगंज़ के एसपी पद्मनाभ बरुआ ने कहा, "फ़िलहाल हालात नियंत्रण में है. हम इस बार कोई रिस्क नहीं लेने जा रहे हैं. परेशान होने की कोई बात नहीं है."

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पांच सौ से अधिक लोगों ने पेगासस मामले में सीजेआई को लिखी चिट्ठी
देश की सिविल सोसायटी के 500 से अधिक लोगों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना को एक खुला ख़त लिखकर पेगासस विवाद मामले पर केंद्र सरकार से जवाब मांगने के लिए दख़ल देने की मांग की है.
कोलकाता से छपने वाले टेलीग्राफ़ अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस चिट्ठी पर दस्तख़त करने वालों ने चीफ़ जस्टिस रमन्ना के उस हालिया बयान पर भरोसा जताया है जिसमें उन्होंने कहा था कि "लोग जानते हैं कि जब कुछ ग़लत होगा तो न्यायपालिका उनका साथ देगी."
इस साझा चिट्ठी में कहा गया है कि जजों, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों की इसराइली स्पाईवेयर की मदद से कथित जासूसी नागरिकों की निजता, जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों पर गंभीर हमला है. चिट्ठी में कई और सवाल भी उठाए गए हैं.
"सुप्रीम कोर्ट के पास शक्तियां हैं और ये उसका कर्तव्य भी है कि वो हमारी तरफ़ से ये सवाल पूछे. जैसा कि आपने हाल ही में एक मौके पर कहा था, 'लोगों को भरोसा रहता है कि न्यायपालिका उन्हें इंसाफ़ और राहत दिलाएगी. वे जानते हैं कि जब कुछ ग़लत होगा, न्यायपालिका उनका साथ देगी. भारत का सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़े लोकतंत्र का अभिभावक' है."
"हम उम्मीद करते हैं कि आपका कार्यालय बिना समय गंवाए इस मामले का संज्ञान लेगा और हमारे अधिकारों और स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए सवालों के तयशुदा वक़्त के भीतर जवाब मांगे जाएंगे."
"पेगासस प्रोजेक्ट और जो बातें अब तक सार्वजनिक हुई हैं, वो संवैधानिक प्राधिकरणों की साख को लेकर चिंता पैदा करती हैं और इसमें सुप्रीम कोर्ट की आज़ादी भी शामिल है."
चिट्ठी पर दस्तखत करने वालों में अरुणा रॉय, अंजलि भारद्वाज, कविता श्रीवास्तव, तीस्ता सेतलवाड़, हर्ष मंदर, वृंदा ग्रोवर, कल्पना कन्नाबिरान, झुमा सेना, अपर्णा चंद्र, प्रतीक्षा बख़्शी, ज़ोया हसन, नीरजा गोपाल जयाल, उत्सा पटनायक और अरुंधति रॉय जैसे नाम शामिल हैं.

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तमिलनाडु में मीडिया के ख़िलाफ़ मानहानि के मुक़दमे वापस लिए गए
चेन्नई से छपने वाले डेक्कन क्रॉनिकल अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को ये आदेश दिया कि मीडिया आउटलेट्स के ख़िलाफ़ दायर किए गए 90 से अधिक मानहानि के मुक़दमे वापस लिए जाएंगे.
साल 2012 से 2021 के बीच दायर किए गए ये मुक़दमे तमिलनाडु की पिछली राज्य सरकारों ने ही शुरू किए थे.
ये मुक़दमे अंग्रेज़ी और तमिल भाषा में छपने वाले अख़बारों, तमिल पत्रिकाओं, अंग्रेज़ी और तमिल में छपने वाली पत्रिकाओं के ख़िलाफ़ दायर किए गए थे.
इसमें मीडिया आउटलेट्स के संपादकीय स्टाफ़, प्रकाशक और मीडिया इंटरव्यू के मेहमानों को भी पार्टी बनाया गया था.
द्रमुक ने अपने चुनावी घोषणापत्र में ये वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आएगी तो ये मुक़दमे वापस लिए जाएंगे.

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कर्नाटक में भाजपा को संघ का सुझाव
कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी को ये सुझाव दिया है कि वे विवादास्पद नेताओं को बासवराज बोम्मई के मंत्रिमंडल में शामिल न करें.
दक्षिण भारत से छपने वाले अंग्रेज़ी अख़बार डेक्कन हेराल्ड ने बीजेपी सूत्रों के हवाले से कहा है कि संघ का एतराज उन विवादास्पद नेताओं को लेकर है जिन्होंने हाल के समय में कोर्ट से ये इंजक्शन ऑर्डर हासिल किया है कि मीडिया उनके ख़िलाफ़ कुछ न लिख पाए.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं ने कथित तौर पर अपने सुझाव में कहा है कि ऐसे विवादास्पद विधायक जो चाहे बीजेपी के हों या अन्य पार्टियों से आए हों, उन्हें मंत्रिमंडल में नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने कर्नाटक की भाजपा सरकार की छवि ख़राब की है.
अख़बार ने एक बीजेपी नेता के हवाले से लिखा है कि संघ के नेताओं ने पार्टी को इस बात से भी आगाह किया है कि अगर 'दाग़ी' छवि वाले नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया तो इससे राज्य के लोगों के बीच ग़लत संदेश जाएगा क्योंकि दो साल के बाद पार्टी को फिर से विधानसभा चुनाओं का सामना करना है.
कर्नाटक में कथित सेक्स सीडी वाली घटना के सामने आने के बाद और ऑपरेशन कमल के तहत अन्य पार्टियों से भाजपा में शामिल होने वाले कई नेताओं ने कोर्ट से ये आदेश हासिल किया था कि मीडिया उनके ख़िलाफ़ कोई ऐसा लेख न लिख पाए जिससे उनकी मानहानि होती हो.
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