जम्मू-कश्मीर के नेताओं को क्यों बुला रहे पीएम मोदी? महबूबा और फ़ारूक़ को भी निमंत्रण

मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नई दिल्ली आवास पर 24 जून को एक बैठक के लिए जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं को निमंत्रण दिया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया है कि केंद्रीय गृह सचिव ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों फ़ारूक़ अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती समेत कई नेताओं से बैठक को लेकर बात की है.

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पीटीआई के मुताबिक़, फ़ोन पर उन्हें यह निमंत्रण दिया गया है और अधिकारियों ने समाचार एजेंसी से पुष्टि की है कि सभी 14 नेताओं को मुलाक़ात से पहले कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है.

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कहा जा रहा है कि भविष्य में जम्मू-कश्मीर से जुड़े फ़ैसले के संबंध में इस बैठक में चर्चा की जाएगी.

पाँच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म किए जाने के बाद से यह इस तरह की पहली बैठक होगी.

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पीएम की अगुआई वाली इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह समेत अन्य केंद्रीय मंत्री भी शामिल होंगे.

मोदी सरकार का नरम रवैया?

मोदी और शाह

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अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, जिन 14 नेताओं को बातचीत का निमंत्रण दिया गया है. उनमें पीडीपी की महबूबा मुफ़्ती के अलावा, नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फ़ारूक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, पीपल्स कॉन्फ़्रेंस के सज्जाद लोन और मुज़फ़्फ़र हुसैन बेग, सीपीएम के एमवाई तारिगामी, कांग्रेस के जीए मीर और ग़ुलाम नबी आज़ाद, जेके अपनी पार्टी के अल्ताफ़ बुख़ारी शामिल हैं.

वहीं, जम्मू के नेताओं को भी इस बैठक में शामिल होने का न्योता दिया गया है, जिनमें निर्मल सिंह, रविंद्र रैना, भीम सिंह, कविंद्र गुप्ता और तारा चंद शामिल हैं.

दूसरी ओर ऐसा माना जा रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार अब कश्मीर को लेकर नरम रवैया अपना रही है.

गुपकार बैठक

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कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद कई राजनेताओं को हिरासत में रखा गया था जिन्हें बाद में धीरे-धीरे रिहा कर दिया गया था लेकिन अभी भी कुछ नेता नज़रबंद हैं.

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने शनिवार को ट्वीट करके बताया कि 'पीडीपी के सरताज मदनी को छह महीने तक 'ग़लत तरीक़े' से हिरासत में रखने के बाद आख़िरकार रिहा कर दिया गया है.'

उन्होंने लिखा, "अब समय आ गया है कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर के अंदर और बाहर जेलों में सड़ रहे राजनीतिक क़ैदियों और अन्य क़ैदियों को रिहा करे. एक प्रचंड महामारी उन्हें रिहा करने का पर्याप्त कारण होनी चाहिए थी."

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पाँच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 समाप्त किए जाने के बाद पीडीपी के वरिष्ठ नेता और महबूबा मुफ़्ती के चाचा सरताज मदनी को दो बार नज़रबंद किया जा चुका है.

बैठक में शामिल होने से पहले बैठक

ऐसा माना जा रहा है कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक से पहले विभिन्न दल अपनी-अपनी बैठक करने के साथ-साथ पीपल्स अलायंस फ़ोर गुपकार डिक्लेरेशन (PAGD) की बैठक में भी इसको लेकर अंतिम फ़ैसला लेंगे.

कश्मीर के विभिन्न दलों का गठबंधन गुपकार डिक्लेरेशन जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को बहाल करने के लिए बना था, जिसके अध्यक्ष नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख फ़ारूक़ अब्दुल्ला हैं.

गुपकार बैठक

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, गुपकार गठबंधन की बैठक आने वाले गुरुवार को होगी जबकि विभिन्न दल अगले कुछ दिनों में इस पर चर्चा करने जा रहे हैं.

पीडीपी के प्रवक्ता सुहैल बुख़ारी ने कहा है कि पीएम की बैठक में शामिल होने का फ़ैसला पार्टी की बैठक में लिया जाएगा लेकिन अभी केवल फ़ोन कॉल आया है और आधिकारिक निमंत्रण का इंतज़ार है.

सीपीएम नेता एमवाई तारिगामी ने इंडियन एक्सप्रेस से पुष्टि की है कि उन्हें केंद्रीय गृह सचिव का फ़ोन कॉल आया था और '24 जून को तीन बजे पीएम के साथ बैठक होगी.'

तारिगामी को कहा गया, "प्रधानमंत्री राजनीतिक नेतृत्व के साथ जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा करना चाहते हैं."

किस चीज़ पर चर्चा हो सकती है?

मोदी और महबूबा

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भारत के साथ-साथ पाकिस्तान के कई मीडिया हलकों में काफ़ी अरसे से जम्मू-कश्मीर को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं.

कभी यह कहा गया कि जम्मू-कश्मीर को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटा जा रहा है तो कभी यह अनुमान लगाया कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने जा रही है. लेकिन इन सब बातों पर अब विराम लगता दिख रहा है.

श्रीनगर में बीबीसी के सहयोगी पत्रकार माजिद जहांगीर का कहना है कि मोदी सरकार राज्य के नेताओं के साथ आगे की राजनीति प्रक्रिया को लेकर चर्चा कर सकती है.

उनका कहना है कि यह एक तरह से राज्य में राजनीतिक ख़ामोशी को तोड़ने की कोशिश है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश भी दिया जाएगा.

कश्मीर

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विशेष राज्य का दर्जा छीने जाने के बाद अब तक केवल ज़िला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनाव हुए हैं और अब पीएम मोदी के नेतृत्व में होने वाली बैठक को विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तौर पर देखा जा रहा है ताकि सीटों के परिसीमन समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सके.

पाकिस्तानी मीडिया में अलग ही चर्चा

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अख़बार लिखता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने पर चर्चा हो सकती है.

वहीं अख़बार आगे लिखता है कि पाकिस्तान ने इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर 'विवादित क्षेत्र को बाँटने और जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आ रही रिपोर्ट को लेकर चिंता जताई थी.'

पाकिस्तान अनुमान लगा रहा है कि मोदी सरकार कश्मीर में कुछ ऐसे बदलाव कर सकती है जिससे भारत-पाकिस्तान के बीच नया तनाव पैदा हो सकता है.

शाह महमूद क़ुरैशी

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विदेश मंत्री क़ुरैशी की मांग

वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने एकबार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि भारत कश्मीर में 'अवैध क़दम उठा सकता है.'

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान ने सख़्ती से भारत के 5 अगस्त 2019 की कार्रवाई का विरोध किया है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत इसे हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है.

बयान में आगे कहा गया है कि भारत के किसी भी ऐसे क़दम को जो भारत प्रशासित कश्मीर की जनसांख्यिकीय संरचना को बदले, कश्मीरियों की अलग पहचान को और कमज़ोर करे उसके विरोध को लेकर हमारा दृढ़ संकल्प है.

इसमें यह भी कहा गया कि भारत के संभावित क़दम को लेकर सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र महासचिव को अवगत कराया जा रहा है.

बयान में कहा गया है कि 'कश्मीर में डोमिसाइल नियम और ज़मीन के क़ानूनों को बदलकर भारत का उद्देश्य कश्मीरियों को अपनी ही ज़मीन पर अल्पसंख्यक बनाने का है. विदेश मंत्री ने कहा कि इस तरह की भारतीय कार्रवाई नई जनसांख्यिकीय वास्तविकता लेकर आएगी जो कि यूएन चार्टर के तहत अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है.'

विदेश मंत्री क़ुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वो भारत को 'अवैध कार्रवाइयां' करने से रोके.

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