जम्मू कश्मीर के लोगों और फ़लस्तीनियों को फ़ैसला लेने का अधिकार मिले: शाह महमूद क़ुरैशी- उर्दू प्रेस

कुरैशी, इराक़ में

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कु़रैशी ने कहा है कि शांति के लिए दक्षिण एशिया में कश्मीर और मध्यपूर्व में फ़लस्तीनी मसले का हल ज़रूरी है. शाह महमूद क़ुरैशी इन दिनों इराक़ के दौरे पर हैं.

अख़बार जंग के अनुसार इराक़ के विदेश मंत्री फ़व्वाद हुसैन से मुलाक़ात के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान शाह महमूद क़ुरैशी ने यह बातें कहीं.

क़ुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान दक्षिण एशिया में अमन चाहता है, इस क्षेत्र की जनता को ग़रीबी से बाहर निकालने के लिए शांति स्थापित होना बहुत ज़रूरी है.

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में भी शांति बहाली के लिए ज़रूरी है कि शांति प्रक्रिया आगे बढ़े. कु़रैशी ने इराक़ी प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा काज़मी और राष्ट्रपति बरहाम सालेह से भी मुलाक़ात की.

शाह महमूद क़ुरैशी और वोल्कान बोज़्किर

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कश्मीर का मसला कुछ दिनों पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोज़्किर के पाकिस्तान दौरे में भी उठाया था.

वोल्कान बोज़्किर इसी हफ़्ते पाकिस्तान आए थे. गुरुवार (27 मई) को इस्लामाबाद में बोज़्किर से मुलाक़ात के बाद उन्होंने एक साथ पत्रकारों से बातचीत की थी.

इस दौरान कु़रैशी ने कहा था, "जम्मू-कश्मीर और फ़लस्तीनी इलाक़े में समानता है. दोनों जगह के नागरिकों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है. हमारी माँग है कि दोनों जगह के नागरिकों को ख़ुद अपना फ़ैसला लेने का अधिकार मिले. दोनों मामलों में संयुक्त राष्ट्र को बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका अदा करनी चाहिए."

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार वोल्कान बोज़्किर ने इस्लामाबाद में नेशनल डीफ़ेंस यूनिवर्सिटी में अपने भाषण के दौरान कहा, "कश्मीर की समस्या भी उतनी ही पुरानी है जितना पुराना फ़लस्तीनियों का मसला है. पाकिस्तान और भारत समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के रास्ते पर चलें."

अख़बार के अनुसार बोज़्किर ने कहा, "मध्यपूर्व में अमन की बहाली तक संयुक्त राष्ट्र महासभा आराम से नहीं बैठेगी. मुझे जम्मू-कश्मीर की स्थिति की भी अच्छे से जानकारी है. मुझे इसका अंदाज़ा है कि एक आम पाकिस्तानी कश्मीर के हवाले से क्या महसूस करता होगा जब फ़लस्तीनियों के हवाले से उसकी भावना इतनी तीव्र है."

बोज़्किर ने कहा कि दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और ख़ुशहाली का सारा दारोमदार भारत और पाकिस्तान के संबंधों की बहाली पर है, इसके लिए ज़रूरी है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीर की समस्या का हल निकाला जाए.

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पाकिस्तान में विपक्षी नेता

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चार जुलाई से इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन

पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियों के समूह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ एक बार फिर पाकिस्तान भर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पत्रकारों से बात करते हुए पीडीएम के प्रमुख मौलान फ़ज़लुर्रहमान ने कहा कि इमरान सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन की शुरुआत चार जुलाई को स्वात में एक जलसे से होगी.

उन्होंने कहा कि उसके बाद कराची और राजधानी इस्लामाबाद में भी जलसे किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार के ख़िलाफ़ क़ानूनी तौर पर भी लड़ाई जारी रहेगी.

मौलाना ने कहा कि विपक्षी पार्टियां सरकार की तरफ़ से तय किए गए वोटिंग मशीन से चुनाव कराने के फ़ैसले का विरोध करती हैं.

प्रेसवार्ता के दौरान उनके साथ पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के अध्यक्ष शाहबाज़ शरीफ़ भी थे. मौलाना ने कहा कि अब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, पीडीएम का हिस्सा नहीं है लेकिन अगर वो वापस शामिल होना चाहती है तो वो उसका इंतज़ार करेंगे.

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अख़बार दुनिया के अनुसार इस अवसर पर शाहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि एक पार्टी (पीपीपी) को आठ पार्टियों के आगे सरेंडर कर देना चाहिए. शाहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि पीपीपी के मामले में पीडीएम में जो भी फ़ैसला होगा वो सबके राय मशविरे से होगा और इस बारे में उनकी कोई निजी राय नहीं है.

दरअसल कुछ मुद्दों पर मुस्लिम लीग और पीपीपी में मतभेद पैदा हो गए थे और पीडीएम ने पीपीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. मुस्लिम लीग की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने कहा है कि पहले पीपीपी शो कॉज़ नोटिस का जवाब दे उसके बाद ही उनकी पीडीएम में वापसी पर बात होगी.

कोरोना

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कोरोना: पाकिस्तान में B.1.617 वैरिएंट का पहला मामला सामने आया

अख़बार जंग के अनुसार कोरोना वायरस के B.1.617 वेरिएंट का पहला मामला पाकिस्तान में पाया गया है. वायरस का ये वैरिएंट पहले भारत में पाया गया था और अब दुनिया के कई देशों में फैल चुका है.

अख़बार के अनुसार मीडिया में इस वैरिएंट को भारतीय वैरिएंट कहा जा रहा था. जिसके बाद भारत सरकार ने मीडिया से कहा है कि वो इसे भारतीय वैरिएंट न कहें.

पाकिस्तान में कोरोना पर क़ाबू पाने के लिए बनाई गई संस्था नेशनल कमांड एंड ऑपरेशन सेंटर (एनसीओसी) के प्रमुख असद उमर ने बताया है कि रविवार से 30 साल से अधिक उम्र के लोगों को वॉक-इन वैक्सीनेशन लगाने का फ़ैसला किया गया है.

उन्होंने बताया कि फ़ाइज़र वैक्सीन की पहली खेप पाकिस्तान पहुँच गई है. संयुक्त राष्ट्र की कोवैक्स योजना के तहत यह वैक्सीन पाकिस्तान को मिली है. इससे पहले उसे एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन भी मिली थी.

पाकिस्तान में अब तक 50 लाख से ज़्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है.

एनसीओसी के अनुसार पाकिस्तान में अब तक कोरोना से 20 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. अब तक संक्रमितों की संख्या नौ लाख 13 हज़ार से ज़्यादा हो गई है जिनमें से एक्टिव मामले क़रीब 59 हज़ार हैं और उनमें से चार हज़ार मरीज़ों की हालत गंभीर है.

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान को कोरोना से मुक़ाबला करने के लिए अब तक तीन अरब नौ करोड़ डॉलर का फ़ंड मिल चुका है.

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