नरेंद्र मोदी और उद्धव ठाकरे की मुलाक़ात के क्या हैं तीन मायने

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- Author, नीलेश धोत्रे
- पदनाम, बीबीसी मराठी
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को उप मुख्यमंत्री अजित पवार और कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की.
इस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मराठा आरक्षण कोटे पर रोक के फ़ैसले और महाराष्ट्र से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की. ठाकरे ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने 12 मांगें रखी हैं.
कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ठाकरे ने प्रधानमंत्री से अकेले में मिलने के लिए 10 मिनट मांगे थे जिसे मान लिया गया और दोनों अलग से भी मिले.
इस पर मुख्यमंत्री ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान कहा, "हम शायद राजनीतिक रूप से साथ न हों लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संबंध टूट चुके हैं. मैं नवाज़ शरीफ़ से मिलने नहीं गया था. अगर मैं उनसे अलग से व्यक्तिगत तौर पर मिला तो इसमें कुछ ग़लत नहीं है."

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"प्रधानमंत्री ने सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया है. केंद्र के पास लंबित मुद्दों पर उनके द्वारा सकारात्मक निर्णय लेने की उम्मीद है. मैं प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं. इस बैठक का कोई राजनीतिक मक़सद नहीं था. मैं और मेरे सहयोगी संतुष्ट हैं."
समझा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे और नरेंद्र मोदी की इस मुलाक़ात के तीन बड़े राजनीतिक निहितार्थ हैं.
1. मराठा आरक्षण का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने पाँच मई को मराठा आरक्षण को रद्द कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि संविधान के 102वें संशोधन के बाद राज्यों को ऐसा आरक्षण देने का अधिकार नहीं है.
उसके बाद से महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार यह कह रही है कि केंद्र सरकार आरक्षण दे सकती है. इस बीच, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 13 मई को अपील दायर करते हुए कहा कि 102वें संशोधन के अनुसार राज्यों को आरक्षण देने का अधिकार है.

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याचिका दायर करने के बाद केंद्र ने एक बार फिर मराठा आरक्षण पर गेंद राज्य के पाले में डाल दी.
ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने यह मांग रख दी है कि केंद्र आरक्षण की 50 फ़ीसदी की सीमा में संशोधन करे.
उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 15 (4) और 16 (4) में संशोधन करना चाहिए ताकि मराठा समुदाय को शिक्षा और रोज़गार में आरक्षण मिल सके."
2. ओबीसी और अनुसूचित जाति के आरक्षण का मुद्दा
ओबीसी समुदाय को राज्य में पंचायती राज चुनाव में आरक्षण दिया जाता था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी रोक लगा दी है.
राज्य सरकार का कहना है कि इसके कारण ग्राम पंचायतों और नगर निकायों की 56,000 सीटों पर असर पड़ेगा.

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कोर्ट का कहना था कि ओबीसी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण देने से पहले जनसंख्या के आँकड़ों की ज़रूरत थी.
हालांकि, उद्धव ठाकरे ने मांग की है कि 2021 की जनगणना में ओबीसी समुदाय को भी शामिल किया जाए ताकि इस मुद्दे को हमेशा के लिए सुलझाया जा सके.
इसके बाद उद्धव ठाकरे सरकार ओबीसी आरक्षण को लेकर भी नरेंद्र मोदी सरकार पर उंगली उठाने लगी.
उद्धव ठाकरे ने पिछड़ी जातियों को तरक्की में आरक्षण के महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार से कहा है कि वह पूरे देश के लिए एक सी नीति बनाए.
'मोदी-ठाकरे के संबंध न टूटने वाले'
उद्धव ठाकरे ने मोदी के सामने जो 12 माँगें रखीं उनमें से 11 मुद्दे सीधे जनता से जुड़े हुए थे लेकिन 12वां मुद्दा सीधे सत्तारुढ़ महाविकास गठबंधन से जुड़ा हुआ है.

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ठाकरे ने विधान परिषद में 12 सदस्यों को राज्यपाल की ओर से नामित ना करने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने मांग की है कि मोदी इसे लेकर राज्यपाल को निर्देश दें.
शिवसेना इसको लेकर पिछले कई महीनों से लगातार राज्यपाल की आलोचना कर रही है. उद्धव ठाकरे यह संदेश देना चाहते हैं कि शिवसेना ही यह सबकुछ कर रही है. इसका मतलब है कि उनके और नरेंद्र मोदी के संबंध बहुत मज़बूत हैं.
इसी बीच गठबंधन में भी काफ़ी उठापटक देखी जा चुकी है. शरद पवार ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाक़ात की है. इसी बीच कांग्रेस भी कई दफ़ा शिवसेना पर हमलवार रही है और शिवसेना ने भी कई कांग्रेस नेताओं को सीधा निशाना बनाया है.
इसके परिणामस्वरूप कई बार ऐसी अफ़वाहें भी सामने आई हैं कि राज्य सरकार गिर जाएगी.

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उद्धव ठाकरे हमेश गृह मंत्री अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस की आलोचना करते रहे हैं लेकिन कभी भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना नहीं बनाया है.
लोकसत्ता मीडिया समूह की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने सीधे फडणवीस की आलोचना की लेकिन उन्होंने मोदी के बारे में अच्छी बात कही.
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान उन्होंने 102वें संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने और सभी को मुफ़्ता कोरोना टीकाकरण करने की प्रधानमंत्री की घोषणा के लिए धन्यवाद किया.
मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उद्धव ठाकरे की मोदी से दूसरी मुलाक़ात थी. दोनों की पहली बार मुलाक़ात पिछले साल 21 फ़रवरी को हुई थी लेकिन इस डेढ़ साल के दौरान काफ़ी राजनीति हो चुकी है.
पिछली मुलाक़ात में उनके साथ उनके बेटे आदित्य ठाकरे थे जबकि इस बार अजित पवार और अशोक चव्हाण थे.
दूसरी मुलाक़ात के दौरान वो गठबंधन के एक नेता के तौर पर दिखे और साथ ही उन्होंने मोदी से निजी तौर पर भी बात की.
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