कोरोनाः इन सात राज्यों में कम हो रहे हैं मामले - प्रेस रिव्यू

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के मामलों में मामूली कमी देखी जा रही है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार इन राज्यों में रोज़ाना आने वाले मामलं में थोड़ी कमी हुई है जिससे थोड़ी उम्मीद जगी है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में रोज़ाना दर्ज किए जाने वाले मामलों का आंकड़ा 30 अप्रैल को चार लाख के पार पहुंचने के बाद एक और रविवार, दो मई को रोज़ाना संक्रमितों की संख्या 392,488 और 3,68,147 रही.
अख़बार के अनुसार महाराष्ट्र के 12 जिलों में में बीते 15 दिनों में नए मामलों कमी देखी जा रही है. हालांकि मंत्रालय का कहना है कि राज्य सरकार के लगाए प्रतिबंधों के कारण मामलों में कमी आई है लेकिन ये केवल शुरूआती दौर है, आगे भी सरकार को संभल कर कदम उठाने होंगे.
कम होते आँकड़ों के पीछे क्या है कारण?
आंकड़ों में कमी के बारे में इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि इसके पीछे कारण रविवार को हुई कम टेस्टिंग हो सकती है.
अख़बार लिखता है कि रविवार को केवल 15 लाख सैंपल्स की जांच हुई थी जबकि आम दिनों में 18 से 19 लाख सैंपल्स की जांच की जाती है. रविवार से पहले दो दिनों में यामी 30 अप्रैल और एक मई को 19 लाख से अधिक सैंपल्स की जांच की गई थी.
अख़बार लिखता है कि चूंकि रविवार को अपेक्षाकृत कम टेस्ट होते हैं और टेस्ट के नतीजे एक दिन बाद आते हैं, तो इसका असर सोमवार को जारी किए जाने वाले आंकड़ों पर दिखता है. अख़बार का कहना है कि कई महीनों से सोमवार को आंकड़े सप्ताह के दूसरे दिनों के मुक़ाबले कम ही होते हैं.
हालांकि अख़बार लिखता है कि इस बार लगातार दो दिन रोज़ाना संक्रमितों की संख्या वाले आंकड़े कम होते दिखे हैं जो बीते कई सप्ताह से नहीं हुआ था. लेकिन आने वाले दिनों में ये कमी जारी रहेगी या नहीं इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता.
दिल्ली में ऑक्सीजन की सप्लाई का स्तर बुरा, टैंकर भी नहीं

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कोरोना के कहर से जूझ रही राजधानी दिल्ली के लिए न तो केंद्र सरकार मांग के अनुसार 700 मीट्रिक टन के मेडिकल ऑक्सीजन दे पा रही है और न ही ऑक्सीजन अबाध सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार क्रायोजेनिक टैंकर उपलब्ध करा पा रही है. ऑक्सीजन के लिए गुहार लगाते अस्पतालों वाली राजधानी के सामने कोरोना महामारी के दौर में ये दो बड़ी चुनौतियां हैं.
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि तीन मई की मध्यरात्रि तक वो दिल्ली को आवंटन केो अनुसार ऑक्सीजन पहुंचाए. लेकिन सोमवार देर शाम तक इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि ऑक्सीजन पहुंचेगा या नहीं.
दिल्ली मे केंद्र सरकार से रोज़ाना 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की थी. सरकार ने पहले दिल्ली के लिए रोज़ाना 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का आवंटन किया था. बाद में महामारी की स्थिति देखते हुए इसे पहले 490 और फिर रोज़ाना 590 मैट्रिक टन किया गया था.
एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से अख़बार लिखता है कि दिल्ली सरकार के बैंकॉक से 18 क्रायोजेनिक टैंकर और फ्रांस से 21 ऑक्सीजन जेनरेटर आयात करने की योजना में भी "तकनीकी और प्रशासनिक" कारणों से देरी हो रही है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 27 अप्रैल को कहा था कि 28 अप्रैल को क्रायोजेनिक टैंकर दिल्ली पहुंचना शुरू होंगे. लेकिन ये अब तक नहीं पहुंचे हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मीडिया को रिपोर्ट करने से रोका नहीं जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अदालत में चल रही कार्यवाहियों के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों पर रिपोर्ट करने से न तो वो मीडिया को रोक सकता है और न ही सवाल न पूछें कह कर उच्च न्यायालयों का मनोबल गिरा सकता है.
अख़बार जनसत्ता में छपी एक ख़बर के अनुसार कोर्ट ने उच्च न्यायालय और मीडिया, दोनों को 'लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ' बताया और कहा कि संवाद मुक्त रूप से होना चाहिए.
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने अदालती कार्यवाही में की गई टिप्पणियों को रिपोर्ट करने से मीडिया को रोकने की गुज़ारिश वाली चुनाव आयोग की याचिका को 'बेहद अस्वाभाविक' करार दिया.
कोर्ट ने कहा कि जज जब सुनवाई के दौरान कुछ कहते हैं तो उनका मकसद व्यापक सार्वजनिक हित सुनिश्चित करना होता है. ऐसे में आयोग को मद्रास हाई कोर्ट जज की टिप्पणी को सही नज़रिए से देखना चाहिए.
अख़बार के अनुसार कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि "आयोग अनुभवी संवैधानिक निकाय है जिसके पास देश में मुक्त एवं निष्पक्ष चनाव करवाने की ज़िम्मेदारी है. आयोग को टिप्पणियों से परेशान नहीं होना चाहिए."
कोर्ट चुनाव आयोग की एक याचिका की सुनवाई कर रही थी. आयोग का कहना था कि बीते सप्ताह मद्रास हाई कोर्ट ने को विड-19 महामारी के दौरान चुनावी रैलियों को इजाज़त देने के लिए चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि "चुनाव आयोग के अधिकारियों पर हत्या का आरोप लगाया जाना चाहिए."
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणियों पर उन्हें गंभीर आपत्ति है. हाई कोर्ट की टिप्पणी पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार बहस हुई कि आयोग हत्यारा है.
इस मामले में कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.
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