कोरोना: जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल जैसे हालात क्या दिल्ली के अधिकतर अस्पतालों में हैं?

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- Author, ज़ुबैर अहमद और विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत की राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से हाहाकार मचा हुआ है और इसका अंत कब होगा ये पता नहीं है.
अस्पताल के भीतर और बाहर कोरोना वायरस के मरीज़ ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं और हर तरफ़ डर फैला हुआ है.
अस्पताल ऑक्सीजन के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं, अदालत, मीडिया का दरवाज़ा खटखटा रहे हैं.
उधर, जिनके प्रियजनों के जीवन की डोर ऑक्सीजन सिलेंडर की डोर से बंधी है, वो पैसे की परवाह न करते हुए ब्लैक मार्केट के चक्कर काट रहे हैं.
देश और दिल्ली में लगातार बिगड़ती स्थिति
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में बीते चौबीस घंटों में कोरोना संक्रमण के 3,46,756 मामले दर्ज किए गए और 2,624 लोगों की मौत हुई है.
दिल्ली में भी हर दिन मरने वालों का आंकड़ा 300 के पार चला गया है.
ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क की को-कन्वीनर मालिनी आयसोला के मुताबिक़, बहुत सारी मौतों के बारे में तो हमें पता भी नहीं है और अब छोटे अस्पतालों में भी मरीज़ों की मौत होने लगी है.
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वो पूछती हैं, "संकट के इस समय में आधिकारिक प्रतिक्रिया कहां है? सरकार ने इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन की सारी सप्लाई को इधर मोड़ने को कहा है लेकिन वो ऑक्सीजन कहां है? इसे पहुंचने में कितना वक़्त लगेगा?"
शुक्रवार रात दिल्ली के रोहिणी स्थित जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 20 मरीज़ों की मौत हो गई.

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भारतीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जयपुर गोल्डन अस्पताल में मरने वालों में ज़्यादातर कोविड-19 के मरीज़ थे जो अस्पताल की क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती थे.
अस्पताल के दीप बलूजा के मीडिया में दिए गए बयान के मुताबिक़, जब अस्पताल के पास लिक्विड ऑक्सीजन का स्टॉक ख़त्म हो गया तब मेन गैस पाइपलाइन से लगे ऑक्सीजन सिलेंडर का सहारा लिया गया लेकिन वहां लो प्रेशर की वजह से मरीज़ों की मौत हो गई.
दर-बदर भटकते मरीज़ों के परिजन
रिचाली अवस्थी की जेठानी सीमा अवस्थी भी मरने वालों में थीं. सीमा अवस्थी रोहिणी सेक्टर-24 के इंडियन स्कूल की प्रिंसिपल थीं.
बीबीसी से बातचीत में रिचाली ने कहा सीमा सिंगल पैरेंट थीं और उनकी मौत से समाज ने एक काबिल व्यक्ति को खो दिया.
उन्होंने कहा, "कल शाम को जब मैं यहां आई तो मुझे बताया गया कि उनकी हालत बेहतर हो रही है. मेरी व्हाट्सऐप पर उनसे बात होती थी. वो मैसेज का बहुत जल्दी जवाब दे रही थीं."
बीबीसी से बातचीत में रोते बिलखते एक व्यक्ति ने बताया कि उनके दो भाई भी अस्पताल में एडमिट हैं और उनका ऑक्सीजन लेवल 50 से भी कम हो गया था.
उनके मुताबिक़, उन्हें अस्पताल की तरफ़ से फ़ोन आया कि ऑक्सीजन ख़त्म हो गई है और वो ऑक्सीजन का इंतज़ाम कर लें. ऐसे में वो एक बीमार दोस्त के पिताजी के घर से ऑक्सीजन का सिलेंडर उठाकर लाए. इस बीच जयपुर गोल्डन में ऑक्सीजन का टैंक पहुंच चुका था.
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इसी अस्पताल में 55 साल की नंदिनी राय भी 19 अप्रैल से एडमिट हैं. वो जयपुर गोल्डन अस्पताल के सर्जिकल इंटेंसिव केयर यूनिट में हैं.
उनके बेटे पंकज राय को अस्पताल ने ऑक्सीजन का इंतज़ाम करने के लिए कहा है, और वो ऑक्सीजन सिलेंडर, ए या एबी पॉज़िटिव प्लाज़्मा और रेमडेसवीयर के लिए दिल्ली के चक्कर लगा रहे हैं.
परिजनों के आरोप

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उन्होंने बताया, "डॉक्टर ने ऑक्सीजन का इंतज़ाम करने के लिए कहा है, नहीं तो उन्हें बचाना मुश्किल हो जाएगा."
बीबीसी से उनकी ये बातचीत जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सीजन टैंकर पहुंचने से पहले हुई.
उन्होंने कहा, "जिन लोगों की मौत हुई वो वेंटिलेटर पर थे. मम्मी वेंटिलेटर पर नहीं थीं. उनका ऑक्सीजन लेवल कम कर दिया है क्योंकि ऑक्सीजन है नहीं. ऑक्सीजन कम होगा तो उन्हें बचाना मुश्किल हो जाएगा. सरकार तो सिर्फ राजनीति कर रही है."
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बीबीसी से बातचीत में एक अन्य महिला ने आरोप लगाया कि उनके पति दिल्ली के एक अस्पताल में 15 अप्रैल से भर्ती हैं, और अस्पताल की ओर से काग़ज़ात पर हस्ताक्षर कराए गए हैं जिसमें लिखा था कि अगर ऑक्सीजन की कमी से मरीज़ को कोई परेशानी होती है तो इसकी ज़िम्मेदारी अस्पताल पर होगी.
अस्पताल की ओर से इस आरोप पर अभी तक कोई जवाब नहीं मिल पाया है.
जयपुर गोल्डन अस्पताल के बाहर अफ़रातफ़री थी. एक व्यक्ति के मुताबिक अस्पताल में रात में ही ऑक्सीजन ख़त्म हो गई थी और जब उन्हें इस बात का पता सुबह चला तो वो दौड़े-दौड़े आए.
बीबीसी जब गंगाराम अस्पताल के बाहर पहुंचा तो वहां नॉन कोविड मरीज़ दिखे जिन्हें इलाज की ज़रूरत थी.
एम्स अस्पताल के बाहर रिश्तेदार मंडरा रहे थे और खाना बना रहे थे. उन्होंने कहा कि उनके परिवार वाले अस्पताल में हैं और उन्हें भीतर नहीं जाने दिया जा रहा है.
दूसरे अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की भारी किल्लत
दोपहर क़रीब एक बजे बीबीसी को फ़ोर्टिस अस्पताल की ओर से कहा गया कि फ़ोर्टिस शालिमार बाग़ में ऑक्सीजन सप्लाई ख़त्म हो रही है और उनके मरीज़ बैक-अप सिस्टम पर हैं जो अगले दो तीन घंटे चलेगा.
अस्पताल का कहना है, हमने सभी अधिकारियों को इस बारे में सूचना दे दी थी और सुबह से सप्लाई का इंतज़ार कर रहे हैं.
अस्पताल ने कहा कि स्थिति सुधरने तक वो नए एडमिशन और ईआर सुविधाओं को बंद कर रहे हैं और भर्ती मरीज़ों की देखभाल की सभी कोशिशें जारी हैं.
बत्रा, मूलचंद, सरोज अस्पताल जैसे कई अस्पताल ऑक्सीजन की कमी की गुहार लगा रहे हैं.
ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क की को-कन्वीनर मालिनी आयसोला के मुताबिक़, एक बड़ा संकट लोगों के घरों में हैं जहां मरीज़ों की मौत हो रही है.
मालिनी के मुताबिक़, दिल्ली के अस्पतालों में बेड उपलब्ध न होने की वजह से कोविड के मरीज़ घरों में रहकर ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतज़ाम करने को मजबूर हैं और ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक में मिल रहे हैं.
यानी घरों में बीमार लोगों के पास न तो ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध है, और न परिवार को पता कि है कि मरीज़ की ऐसी स्थिति में कैसे स्थिर कैसे रखा जाए.
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