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कोरोना वायरस: एक डबल म्यूटेंट और 771 वैरिएंट मिले, बढ़ी चिंता
भारत में कोरोना वायरस का एक 'डबल म्यूटेंट वैरिएंट' और 771 नए वैरिएंट्स मिले हैं. देश के 18 राज्यों के 10,787 नमूनों में कुल 771 वैरिएंट्स मिले हैं.
इनमें 736 ब्रिटेन के, 34 दक्षिण अफ़्रीका के और एक ब्राज़ील का वैरिएंट है.
नेशनल सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के निदेशक सुजीत कुमार ने बताया कि जिन राज्यों में संक्रमण के मामले बढ़े हैं, वहाँ अलग म्यूटेशन प्रोफ़ाइल का पता चला है.
वायरस का यह म्यूटेशन क़रीब 15 से 20 फ़ीसदी नमूनों में पाया गया है जबकि यह चिंता पैदा करने वाली पहले की किस्मों से मेल नहीं खाता.
हालाँकि बताया गया है कि वायरस की यह नई किस्म शरीर के इम्यून सिस्टम से बचकर संक्रामकता को बढ़ाता है.
यह रिपोर्ट अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रमुखता से छपी है.
'सुनिश्चित करें कि कुंभ कोरोना फैलने का कारण न बने'
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अधिकारियों ने कोरोना के मामले में जो दिशानिर्देष दिए हैं उनका सख़्ती से पालन किया जाए ताकि हरिद्वार में शुरू होने वाला कुम्भ मेला कोरोना फैलने का कारण ना बन जाए.
अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को इस बात पर ज़ोर देना होगा कि किसी भी तीर्थयात्री को कोरोना निगेटिव सर्टिफ़िकेट के बग़ैर हरिद्वार कुम्भ मेले की जगह में दाख़िल नहीं होने दिया जाए.
चीफ़ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान और जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की बेंच ने कहा, ''इस बात के साफ़ संकेत हैं कि हम ऐसे फ़ेज़ में दाख़िल होने जा रहे हैं जब देश को एक बार फिर कोरोना महामारी का सामना करना पड़ेगा. इसलिए राज्य सरकार को सतर्क रहने की ज़रूरत है और उसे सुनिश्चित करना होगा कि कुभ्म मेला महामारी फैलने की वजह ना बन जाए."ॉ
प्रिया रमानी के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट पहुँचे एमजे अकबर
अमर उजाला के अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री और पत्रकार एमजे अकबर प्रिया रमानी के ख़िलाफ़ दायर आपराधिक मानहानि मामले में निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचे हैं.
हाईकोर्ट में गुरुवार को उनकी अपील पर सुनवाई हो सकती है.
पत्रकार प्रिया रमानी ने अकबर के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. अकबर ने रमानी के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का केस किया था. लेकिन निचली अदालत ने रमानी को बेगुनाह क़रार दिया था.
अब अकबर उसी फ़ैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचे हैं.
रमानी के सामने आने के बाद कई और महिलाओं ने अकबर के ख़िलाफ़ इस तरह के आरोप लगाए थे और उस समय अकबर को मंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
चुनावी बॉन्ड्स के दुरुपयोग पर चिंतित सुप्रीम कोर्ट
दैनिक हिंदुस्तान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड्स के संभावित दुरुपयोग पर अपनी चिंता जताई है.
बुधवार को सर्वोच्च अदालत ने चार राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले नए चुनावी बॉन्ड्स की बिक्री पर रोक लगाने वाली याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.
लेकिन याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने इन बॉन्ड्स के संभावित दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से इसकी जाँट को कहा है.
बुधवार को सुनवाई के दौरान बेंच ने पूछा कि अगर किसी राजनीतिक दल को 100 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड्स मिलते हैं तो इस पर नियंत्रण कैसे रहेगा कि इनका इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडे से बाहर के कामों और ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों के लिए नहीं होगा?
मामले में केंद्र का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि 2018 में चुनावी बॉन्ड योजना की शुरुआत के बाद से चुनावी चंदे में कालेधन के इस्तेमाल पर रोक लगी है क्योंकि इसके लिए किसी प्रकार की नकदी नहीं ली जा रही. ये बॉन्ड्स केवल डिमांड ड्राफ़्ट या चेक के ज़रिये ख़रीदे जा सकते हैं.
वहीं चुनाव आयोग ने कहा कि उसने इन बॉन्ड्स का विरोध नहीं किया है, लेकिन इसमें गोपनीयता को लेकर चिंता जताई थी.
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