विदेश मंत्री जयशंकर बोले, लोकतंत्र पर हमें किसी का सर्टिफ़िकेट नहीं चाहिए

Dr. S. Jaishankar

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भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा है कि 'देश में लोकतंत्र की स्थिति पर हमें किसी के सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत नहीं है.'

इंडिया टुडे से बातचीत में भारतीय विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रंटफुट पर आकर नेतृत्व करते हैं. उन्होंने इसी क्रम में जर्मनी की एंगेला मर्केल का भी नाम लिया.

उनसे पूछा गया था कि 'कई हालिया रिपोर्ट्स में यह कहा गया कि नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से भारत में लोकतंत्र कमज़ोर हुआ है. क्या यह भारत की छवि के लिए चुनौती है?'

इसके जवाब में डॉ जयशंकर ने कहा, "आप जिन रिपोर्ट्स की बात कर रहे हैं, उनमें लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) और निरंकुश शासन (ऑटोक्रेसी) का ज़िक्र किया गया, पर ये डेमोक्रेसी या ऑटोक्रेसी की बात नहीं, बल्कि ये हिपोक्रेसी (पाखंड) है. ये वो लोग हैं जिनके हिसाब से चीज़ें नहीं होतीं, तो उनके पेट में दर्द होने लगता है."

"इन लोगों ने ख़ुद को दुनिया का कस्टोडियन (संरक्षक) बना लिया है और चंद लोगों की नियुक्तियाँ कर दी हैं. उन्हें परेशानी होने लगती है कि इंडिया में कोई है, जो उनके अप्रूवल का इंतज़ार नहीं कर रहा, वो उनके बनाए खेल को उनके हिसाब से नहीं खेल रहा. इन लोगों ने ख़ुद के ही मानदंड बनाए हुए हैं और वो अपने हिसाब से फ़ैसले सुनाते रहते हैं, जैसे कि ये कोई 'ग्लोबल एक्सरसाइज़' हो."

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'हाँ, हम राष्ट्रवादी हैं'

डॉ एस जयशंकर ने कहा, "वो हमें हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी कहते हैं. हाँ, हम हैं राष्ट्रवादी पार्टी, हमने 70 देशों को कोविड वैक्सीन दी है, और जो ख़ुद को अंतरराष्ट्रीयवाद के पैरोकार बताते हैं, उन्होंने कितने देशों को वैक्सीन पहुँचाई हैं? वो बताएं ज़रा. कितने हैं जिन्होंने कहा कि कोविड वैक्सीन की जितनी ज़रूरत हमारे लोगों को है, उतनी ही ज़रूरत बाकी देशों को भी है. तब ये कहाँ चले जाते हैं."

विदेश मंत्री ने कहा, "हमारी भी आस्थाएं हैं, मान्यताएं हैं, हमारे मूल्य हैं, लेकिन हम अपने हाथ में धार्मिक पुस्तक लेकर पद की शपथ नहीं लेते. सोचिए ऐसा किस देश में होता है? इसलिए मेरा मानना है कि इन मामलों में हमें ख़ुद को आश्वस्त करने की ज़रूरत है. हमें देश में लोकतंत्र की स्थिति पर किसी के सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत नहीं है, ख़ासतौर पर उन लोगों से तो बिल्कुल भी नहीं, जिनका स्पष्ट रूप से एक एजेंडा है."

भारतीय जनता पार्टी ने डॉ एस जयशंकर के इस बयान को पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शेयर किया है.

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फ़्रीडम हाउस की रिपोर्ट

कुछ दिन पहले ही, वॉशिंगटन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक फ़्रीडम हाउस ने अपनी 2021 की रिपोर्ट में भारत के फ़्रीडम स्कोर को घटा दिया था.

इस रिपोर्ट में भारत का दर्जा पिछले साल के 'फ़्री' यानी स्वतंत्र से 'पार्टली फ़्री' यानी आंशिक रूप से स्वतंत्र कर दिया गया है.

भारत के बारे में संस्थान ने कहा कि 'भारत में एक बहुदलीय लोकतंत्र है, बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी हिन्दू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार ने भेदभाव वाली नीतियों और मुस्लिम आबादी को प्रभावित करने वाली बढ़ती हिंसा की अगुवाई की है.'

रिपोर्ट में कहा गया कि "भारत का संविधान नागरिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है जिसमें अभिव्यक्ति की आज़ादी और धार्मिक आज़ादी शामिल हैं. लेकिन, पत्रकारों, ग़ैर-सरकारी संगठनों और सरकार की आलोचना करने वाले अन्य लोगों को परेशान किए जाने की घटनाओं में मोदी शासन में बहुत इज़ाफ़ा हुआ है."

डॉ एस जयशंकर के जवाब को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है.

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'भारत विरोधी एजेंडे का एक हिस्सा'

उनसे पहले, संघ के विचारक और बीजेपी के राज्यसभा सांसद प्रोफ़ेसर राकेश सिन्हा ने इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी.

उन्होंने कहा था, "ये साम्राज्यवादी हथकंडा है. देश में भौगोलिक साम्राज्यवाद चला गया है, लेकिन वैचारिक साम्राज्यवाद जारी है. भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद लोग पूरी स्वतंत्रता के साथ सरकार की नीतियों की, न्यायपालिका की आलोचना कर पा रहे हैं."

"लेकिन, पश्चिम की एक ताक़त है जो भारत को अपने ढंग से परिभाषित करना चाहती है. इसलिए रिपोर्ट पूरी तरह से भारत विरोधी एजेंडे का एक हिस्सा है. उनकी दृष्टि कितनी बाधित है इसी से पता चलता है कि प्रतिदिन भारत के सैकड़ों टीवी चैनलों पर स्वतंत्र डिबेट होती हैं, अख़बारों पर कोई नियंत्रण नहीं है. सोशल मीडिया पर पूरी छूट है. यदि यह आज़ादी नहीं है तो और क्या है."

मोदी

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मोदी की तारीफ़

इस इंटरव्यू में विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने 'भारतीय लोकतंत्र की वैश्विक रैंकिंग में गिरावट' के अलावा पॉप सिंगर रिहाना और पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग की टिप्पणी से लेकर चीन, क्वॉड और श्रीलंका तक पर बात की.

उन्होंने पीएम मोदी को 'एक मज़बूत नेता' बताया. उन्होंने कहा, "वे फ़्रंटफ़ुट पर आकर नेतृत्व करते हैं और यह बहुत ज़रूरी है."

चीन के साथ लंबे चले सीमा-विवाद पर विदेश मंत्री ने कहा, "ये समय काफ़ी मुश्किल रहा. चीन के साथ अब भी मसला सुलझना बाकी है और अभी बात चल ही रही है. अगर देश की संप्रभुता और अखंडता को कोई चुनौती देता है और आप सरकार का हिस्सा हैं तो आप उसका सामना करते हैं. हम देखते हैं कि इसके जवाब में क्या कर सकते हैं. पिछले पाँच सालों में हमने सीमा पर आधारभूत संरचना को मज़बूत किया है. 2020 में हमने सीमा पर जैसे मुक़ाबला किया, वो पाँच साल पहले संभव नहीं था क्योंकि हम हथियार के मामले में मज़बूत नहीं थे. हमने रफ़ाल भी ख़रीद लिया. हमने परिस्थिति को आत्म-विश्वास के साथ हैंडल किया. राजनीतिक नेतृत्व से हमें पूरा समर्थन मिला. भारत जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे चुनौतियाँ भी आती रहेंगी. वो चाहे पड़ोस से आयें या कहीं और से. मुश्किलें आगे भी हैं."

उन्होंने कहा, "चीन के साथ रिश्ते तभी सामान्य रह सकते हैं जब सीमा पर शांति रहेगी. उन्होंने कहा कि सीमा पर तनाव के साथ रिश्ते सामान्य नहीं रह सकते. जब चीन दोस्ती का हाथ बढ़ाएगा तो हम भी दोस्ती का हाथ बढ़ाएंगे लेकिन अगर वो बंदूक आगे करेंगे तो हम भी उसी तरह जवाब देंगे."

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क्वॉड पर क्या बोले जयशंकर?

'क्वॉड देशों' की पहली बैठक पर विदेश मंत्री बोले, "क्वॉड के अपने उद्देश्य हैं और ये सकारात्मक हैं. जाहिर है कि हम लोकतांत्रिक, बहुसांस्कृतिक और एक जैसी सोच वाले देशों के साथ ही काम करना चाहेंगे."

उन्होंने कहा, "चीन के साथ सीमा-विवाद से पहले, साल 2017 और 2019 में भी क्वॉड की बैठक हुई थी."

क्या पॉप सिंगर रिहाना और पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के ट्वीट पर भारत ने ओवर-रिएक्ट किया? इस सवाल के जवाब में डॉक्टर जयशंकर ने कहा, "यह कोई व्यक्तिगत मामला नहीं था. भारतीय दूतावास के बाहर सोशल मीडिया पर प्रदर्शन की बात कही जा रही थी. ये कोई मासूमियत से भरी हरक़त नहीं थी. दूतावास की जिम्मेदारी हमारी है. लंदन में भारतीय उच्चायोग पर हमला हुआ. क्या आपको अंदाज़ा है कि हमले के दौरान उच्चायोग के भीतर जो मौजूद होते हैं, उन पर क्या गुज़रती है? आप दिल्ली में बैठकर इसे महसूस नहीं कर सकते. हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने दूतावासों को सुरक्षित रखें. हमारे लोगों की सुरक्षा ख़तरे में आएगी तो हम चुप नहीं बैठेंगे."

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