म्यूचुअल फ़ंड: महिलाएं छोटे-छोटे निवेश से कर सकती हैं बड़ी कमाई

महिला

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    • Author, कमलेश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

घरेलू महिलाओं के पास भले ही कहीं से अपनी तनख्वाह नहीं आती लेकिन कुल कमाई में घर खर्च को मैनेज कर बचत करना वो बखूबी जानती हैं.

वो भी अपनी छोटी-छोटी बचत को बैंक में रखकर, कमिटी में डालकर या घर में ही जमा करके उसे एक बड़ी रकम बनाना चाहती हैं ताकि वो आगे चलकर उनके काम आ सके.

इस तरह उन्हें अपने हाथ में आर्थिक ताकत का भी अनुभव होता. वो अपने ऊपर खर्च कर सकती हैं या मुश्किल वक़्त में परिवार के लिए ढाल बन सकती हैं.

इन्हीं छोटी-छोटी बचतों को निवेश करने का एक और बेहतर तरीका है जिसे म्यूचुअल फंड कहते हैं.

जिस तरह हर महीने एक तय रकम आप कमिटी में डालती हैं उसी तरह म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के ज़रिए एक तय रकम निवेश कर सकती हैं जो आपको और बेहतर नतीजे देता है.

आपको विज्ञापनों को देखकर ऐसा लग सकता है जैसे कि म्यूचुअल फंड उन्हीं के लिए है जिनके पास बहुत बड़ी बचत होती है और जो मार्केट की जानकारी रखते हैं.

लेकिन, ऐसा नहीं है. अगर आप इसे अच्छी तरह समझ लें तो इसे भी निवेश के एक विकल्प के तौर पर देख सकती हैं. इसलिए आइए म्यूचुअल फंड और एसआईपी को और बेहतर तरीके से समझने की कोशिश करते हैं.

क्या है म्यूचुअल फंड

म्यूचुअल फंड

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म्यूचुअल फंड में दिन, महीने या साल के आधार पर कुछ पैसे निवेश करने के लिए डालते हैं.

उन पैसों को म्यूचुअल फंड बेचने वाली कंपनियां अलग-अलग जगह निवेश करती हैं और फिर जो रिटर्न आता है वो आपको देती हैं. अगर आपने ब्याज वाली स्कीम में निवेश किया है तो आपको ब्याज भी मिलता है.

लेकिन, आपके पैसे को व्यक्तिगत तौर पर निवेश नहीं किया जाता. इसका एक साझा फंड बनाया जाता है.

म्यूचुअल फंड में निवेश करनी वाली कंपनियों को ऐसेट मैनेजमेंट कंपनियां (एएमसी) कहते हैं.

एएमसी कई निवेशकों के फंड को मिलाकर एक साझा फंड बनाती हैं. इसमें एक जैसी ज़रूरत और रुचि रखने वाले निवेशकों के पैसे को एकसाथ रखकर अलग-अलग निवेश किया जाता है. इस फंड को एक फंड मैनेजर संभालता है. आपके बताए अनुसार वह फंड को निवेश करता है.

जैसे एक निवेशक के पास 500 रुपये हैं, दूसरे के पास पांच लाख और तीसरे के पास पांच करोड़ रुपये हैं और तीनों ही एक तरह का निवेश करना चाहते हैं. ऐसे में फंड मैनेजर इस पूरे पैसे को एक साथ अलग-अलग जगह निवेश कर देता है.

लेकिन, इससे मिलने वाला रिटर्न व्यक्तिगत तौर पर दिया जाता है. इसमें पैसों के बदले पैसा ही मिलता है कोई इंश्योरेंस, मेडिक्लेम या कुछ और नहीं.

रुपये

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अगर आपके पास निवेश करने के लिए एक हज़ार रुपये हैं तो आप म्यूचुअल फंड कंपनी से संपर्क करेंगे और उस पैसे को म्यूचुअल फंड में लगाएंगे.

म्यूचुअल फंड में कई तरह से निवेश होता है. आप अपनी ज़रूरत के अनुसार स्कीम चुन सकते हैं. अगर आपको जानकारी नहीं है तो म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर की मदद भी ले सकते हैं.

इसमें एनएवी सिस्टम के तहत रिटर्न मिलता है. कंपनियां उस दिन के जो ख़र्चे हैं उसको काटकर एनएवी घोषित करती हैं और आपको पैसे देती हैं.

बहुत छोटी शुरुआत

म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए किसी बड़ी रकम की ज़रूरत नहीं है. आप 500 रुपये से भी शुरुआत कर सकते हैं.

नोट और सिक्के

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जैसे कमिटी में एक-दो हज़ार रुपये देते हैं. वैसे ही यहां भी पैसा निवेश कर सकती हैं. वो हर दिन, हर महीने, तिमाही, छमाही, साल में एक बार या जीवन में एक बार भी म्यूचुअल फंड में पैसा जमा कर सकती हैं.

आरडी इंवेस्टमेंट के डायरेक्टर राजेश रोशन कहते हैं, “अमूमन घरेलू या कम वेतन वाली महिलाएं छोटी-छोटी बचत कर पाती हैं. कमिटी में 12 महीने एक हज़ार रुपये देने पर भी आपको 12 हज़ार ही मिलते हैं. पैसा बढ़कर नहीं मिलता. जबकि म्यूचुअल फंड में पैसे पर ब्याज भी मिल सकता है.”

“वहीं, अगर बोली वाली कमिटी है तो जो पैसा बोली के बाद हर महीने की कमिटी से बचता है उसे भी म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं. इस तरह म्यूचुअल फंड उसी बचत को और बढ़ा देता है. इसमें सेविंग बैंक अकाउंट से भी बेहतर रिटर्न मिलते हैं.”

राजेश रोशन कहते हैं कि ये सिर्फ़ घरेलू महिलाओं के लिए ही नहीं है बल्कि कामकाजी महिलाएं भी इसमें दिलचस्पी ले रही हैं. वो अपने पैसे को मैनेज करने के लिए किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं और डिस्ट्रीब्यूटर व फंड मैनेजर इसमें उनकी मदद करते हैं. महिलाएं अपने रिटायरमेंट के बाद के समय को लेकर भी निवेश कर रही हैं.

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वहीं, चार्टर्ड अकाउंटेंट रचना रानाडे कहती हैं, “आप कब तक एक ही तरह के साधनों में निवेश कर सकते हैं. जैसे एफडी में जितनी ब्याज दर मिलती है उतनी दर से महंगाई भी बढ़ जाती है तो आपका फायदा क्या हुआ. लेकिन, म्यूचुअल फंड इससे ज़्यादा रिटर्न देता है. हालांकि, इसमें जितना लाभ, उतना जोखिम, को भी ध्यान में रखकर निवेश करना चाहिए.”

म्यूचुअल फंड कंपनियों भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के दिशानिर्देशों के मुताबिक ही काम करती हैं. ये सभी कंपनियां प्राइवेट होती हैं.

म्यूचुअल फंड मुख्यता तीन तरह के होते हैं यानी एसेट के आधार पर बने इन तीन प्रकारों में आप पैसा निवेश कर सकते हैं.

शेयर मार्केट

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इक्विटी म्यूचुअल फंड

इसमें शेयर बाज़ार में निवेश किया जाता है और उसमें आए उतार-चढ़ाव के हिसाब से आपको रिटर्न मिलता है.

इसमें जोखिम जितना ज़्यादा है उतना ही लाभ भी है. इसलिए इसे लंबे समय के निवेश का बेहतर विकल्प माना जाता है. अगर आपको तुरंत अपनी बचत का पैसा नहीं चाहिए तो आप पांच-छह सालों के लिए इसमें निवेश कर सकते हैं.

आपके मन में ये भी सवाल होगा कि आप चाहें तो सीधे शेयर बाज़ार में पैसा लगा सकते हैं तो म्यूचुअल फंड कंपनी की ज़रूरत क्या है.

लेकिन, म्यूचुअल फंड सीधा शेयर मार्केट में निवेश करने से थोड़ा अलग है. अगर आपके पास निवेश के लिए बहुत कम पैसे हैं तो आप बड़ी कंपनियों के शेयर नहीं खरीद सकते जो ज़्यादा सुरक्षित माने जाते हैं.

वहीं, म्यूचुअल फंड के ज़रिए आप ऐसा कर सकते हैं क्योंकि इसमें आपका पैसा अकेले नहीं बल्कि एक बड़े फंड में मिलकर इस्तेमाल हो रहा है.

म्यूचुअल फंड

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डेट म्यूचुअल फंड

इनमें बॉन्‍ड, गवर्नमेंट सिक्योरिटी, ट्रेज़री बिल और नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर आदि में निवेश किया जाता है.

इसमें शॉर्ट से लेकर लॉन्ग टर्म तक के निवेश के विकल्प हैं. शॉर्ट टर्म के निवेश में एक दिन के लिए भी निवेश कर सकते हैं. इसमें एक दिन का ब्याज़ मिल जाता है. इसे ओवरनाइट फंड कहते हैं.

डेट म्यूचुअल फंड में लाभ बहुत ज़्यादा नहीं होता लेकिन जोखिम भी कम होता है. इसमें एक फिक्स रिटर्न होता है. लेकिन, इसमें भी पैसों के नुक़सान का जोखिम ज़रूर होता है.

अगर लंबे समय के लिए निवेश करना है तो आप इक्विटी फंड में निवेश कर सकते हैं लेकिन कम समय और सुरक्षित निवेश के लिए डेट फंड ज़्यादा बेहतर विकल्प है.

रचना रानाडे बताती हैं, “टैक्स बचत के लिए भी म्यूचुअल फंड में निवेश किया जा सकता है. इसे टैक्स सेवर फंड कहते हैं. ये इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड होता है यानी इसमें न्यूनतम 65 प्रतिशत पैसा इक्विटी फंड में लगेगा और बचा हुआ 35 प्रतिशत डेट फंड में निवेश किया जाएगा. इसमें लॉक इन पीरियड तीन साल होना जरूरी है. लेकिन, कहां कितना निवेश होगा इसकी चिंता निवेशक को करने की ज़रूरत नहीं है. ये सब फंड मैनेजर देखेगा.”

नोट

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हाइब्रिड म्यूचुअल फंड

ये इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड का मिश्रण होता है. इसमें दोनों तरह से निवेश किया जा सकता है.

अगर आप चाहते हैं कि आपके कुछ पैसे शेयर और कुछ बॉन्ड्स में लगाए जाएं तो आप हाइब्रिड म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं.

इसमें जोखिम और रिटर्न इक्विटी म्यूचुअल फंड से कम और डेट म्यूचुअल फंड से ज़्यादा होते हैं.

म्यूचुअल फंड के ज़रिए गोल्ड फंड में भी निवेश किया जाता है. गोल्ड फंड में सोने के अलग-अलग प्रारूपों में निवेश होता है. ये फिजिकल गोल्ड में या सोने का खनन करने वाली कंपनियों के शेयर में हो सकता है.

शेयर मार्केट

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क्या होती है एसआईपी

म्यूचुअल फंड को लेकर आपने सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) शब्द के बारे में भी सुना होगा.

एसआईपी एक प्लान है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति किसी म्यूचुअल फंड में नियमित अंतरालों पर एक तय रकम निवेश कर सकते हैं.

कोई महिला अगर एक हज़ार रुपये बचा लेती है और उसे लगता है कि बच्चों की पढ़ाई में आगे चलकर मदद करूंगी या वो हर तीन साल में ज़ेवर या कोई बड़ा सामान खरीदना चाहती है. ऐसे में वो सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान के ज़रिए पैसे निवेश करके उन्हें बढ़ा सकती है.

म्यूचुअल फंड की कुछ खास बातें

इनवेस्टमेंट एक्सपर्ट्स म्यूचुअल फंड के बारे में कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें बताते हैं-

  • म्यूचुअल फंड में बहुत लचीलापन होता है. आपने इक्विटी में पैसा लगाया है लेकिन बाद में आप उसे डेट में भी लगा सकते हैं. अगर आपके पास 2000 रुपये हैं तो आप 500 के हिसाब से चार म्यूचुअल फंड ले सकते हैं और पूरे 2000 का एक म्यूचुअल फंड भी ले सकते हैं.
  • म्यूचुअल फंड का फायदा ये होता है कि अलग-अलग फंड में निवेश करने से आपको नुक़सान होने का डर कम होता है.
  • निवेश से पहले कुछ बातों का ध्यान ज़रूर रखें. आपके पास निवेश के लिए कितना पैसा है और आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं. समय को आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि आपको उसे पैसे की कितने दिनों में, महीनों में या सालों में ज़रूरत है.
  • आप कुछ ऐप्स के ज़रिए भी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं.

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