कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी इंदौर की जेल से रिहा हुए

कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी इंदौर की जेल से रिहा हुए

इमेज स्रोत, FACEBOOK/MUNAWAR FARUQUI

कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी को शनिवार देर रात इंदौर की जेल से रिहा कर दिया गया.

दिल्ली में मुनव्वर फ़ारूक़ी की लीगल टीम से जुड़े अधिवक्ता केशवम चौधरी ने बीबीसी से बातचीत में फ़ारूक़ी की रिहाई की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि कड़ी कोशिशों के बाद मुनव्वर फ़ारूक़ी की रिहाई हो गई है.

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मुनव्वर फ़ारूक़ी को रात 12 बजे रिहा किया गया. फ़ारूक़ी का परिवार और अधिवक्ता इंदौर में जेल के बाहर उनकी रिहाई का काफ़ी देर से इंतज़ार कर रहे थे. उन्हें उम्मीद थी कि रात साढ़े आठ बजे तक उन्हें रिहा कर दिया जाएगा.

लेकिन फिर उनके वकील अंशुमान श्रीवास्तव ने कहा कि मुनव्वर फ़ारूक़ी की रिहाई आज नहीं होगी. लाइव लॉ के मुताबिक़, जेल प्रशासन का कहना था कि उत्तर प्रदेश में दर्ज मामलों के लंबित वारंट पर और अधिक स्पष्टता की ज़रूरत है.

दरअसल उन पर उत्तर प्रदेश में भी मुक़दमा दर्ज किया गया है और यूपी पुलिस भी उनकी हिरासत चाहती है. उत्तर प्रदेश की तरफ़ से उनका प्रॉडक्शन वारंट इंदौर जेल भेजा गया था.

हालांकि अधिवक्ता केशवम चौधरी ने बीबीसी से कहा है, "सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्रॉडक्शन वारंट पर स्टे है."

फ़ारूक़ी की रिहाई के बाद केशवम चौधरी ने कहा, "मुनव्वर फ़ारूक़ी को ज़मानत देने और प्रोडक्शन वारंट पर स्टे लगाने के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद, जेल प्रशासन इलाहाबाद कोर्ट का आदेश मांग रहा था. आख़िर में उन्हें समझ में आ गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश स्पष्ट है और इसका किसी भी तरह का उल्लंघन अवमानना के समान होगा. आख़िरकर जेल प्रशासन ने मुनव्वर फ़ारूक़ी को रिहा कर दिया."

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क्या है पूरा मामला?

कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी को 1 जनवरी को इंदौर पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. उनके अलावा चार अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. इन सभी पर हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी का आरोप लगाया गया था.

मुनव्वर फ़ारूक़ी इंदौर के मुनरो कैफ़े में अपना कार्यक्रम करने के लिये आये थे. उसी दौरान हिंदू रक्षक संगठन के नेताओं ने वहां पहुंच कर हंगामा कर दिया.

आयोजक और कॉमेडियन को उसके बाद थाने ले जाया गया. तभी से मुनव्वर फ़ारूक़ी जेल में हैं और कई बार उन्होंने ज़मानत के लिये आवदेन किया है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बैंच ने उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए कहा था, "ऐसे लोगों को बख़्शा नहीं जाना चाहिए."

निचली अदालतों से बेल की अर्जी खारिज होने के बाद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से उन्हें अंतरिम ज़मानत मिली थी.

रिहाई में देरी पर सवाल उठाते हुए शनिवार शाम को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने ट्वीट किया था कि उन्हें अब तक रिहा क्यों नहीं किया गया है?

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