बजट 2021 में आपके लिए क्या-क्या है?

इमेज स्रोत, DIBYANGSHU SARKAR/AFP via Getty Images
- Author, डी के मिश्रा
- पदनाम, टैक्स विशेषज्ञ और अर्थव्यवस्था के जानकार
पहले से सब जानते थे कि ये इस सदी का अनोखा बजट होगा. संकट से जूझ रही देश की अर्थव्यवस्था को इस बजट से ढेरों उम्मीदें थीं.
सवाल थे कि आर्थिक गतिविधियों को एक बार फिर पटरी पर कैसे लाया जाएगा? संसाधनों और जीडीपी कम होने को देखते हुए और राजकोषीय घाटे के बीच संतुलन बनाकर कैसे कोई बोल्ड कदम लिया जाएगा?
ज़्यादातर अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि ये एक बोल्ड बजट होना चाहिए, खपत पर ख़ास तौर से ध्यान होना चाहिए, खर्च पर विशेष ध्यान होना चाहिए और ज़्यादा से ज़्यादा पैसों का आवंटन किया जाए, चाहे उसके लिए कर्ज़ या घाटे की सीमा का उल्लंघन करना पड़े. उन्हें ये भी अपेक्षा थी कि रोज़गार बढ़ाने के लिए और अर्थव्यवस्था को तेज़ गति देने के लिए सरकार को एक साहसिक कदम लेना पड़ेगा.
इस परिप्रेक्ष्य में इस बजट को देखा जा रहा था और वित्त मंत्री ने उसी के अनुसार सोमवार को ये बजट पेश किया.
उन्होंने पूरी तरह से ध्यान रखा कि पिछले वर्षों में जैसे अर्थव्यवस्था के लिए प्रोत्साहन पैकेज दिया था, उसकी वजह से राजकोषीय घाटा 9.5% हो गया था, जो कि उम्मीद की जा रही थी कि 3.5% के भीतर रहेगा. उन्होंने देश में ज़्यादा पैसा डाला, कर्ज़ लेकर और अन्य तरीक़ों से पैसा डाला, जिससे अर्थव्यवस्था में दोबारा गति आए.
साथ ही अगले वर्ष यानी वित्त वर्ष 2021-22, जिसके लिए आम बजट पेश किया गया है, उसमें उन्होंने 6.8% के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है. ज़्यादातर अर्थशास्त्री यही कह रहे थे कि शायद ये 5 से 5.5% के बीच में रहेगा. लेकिन उसके भी ऊपर जाकर 6.8% रखना एक बहुत सहासिक कदम है और इसके दूरगामी परिणाम होंगे. अर्थव्यवस्था पर ज़्यादा कर्ज़ और ज़्यादा ब्याज़ का बोझ पड़ सकता है.
लेकिन ये एक रणनीति होती है कि जब सिस्टम में ज़्यादा धन डाला जाता है और ख़ास तौर से पूंजीगत निवेश में ज़्यादा धन डाला जाता है तो इससे देश को लाभ होता है. रोज़गार सेक्टर में लाभ होता है और जीडीपी ग्रोथ भी तेज़ी से ऊपर जाती है, जिसकी तरफ ये प्रयास किए गए हैं.

इमेज स्रोत, SEETU TIWARI
किसानों के लिए बजट कैसा है?
हर बजट में देखा गया है कि किसानों के लिए कुछ अच्छा किया जाता है और सरकार ने बार-बार कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हम हर कदम उठाएंगे.
सरकार की ओर से कृषि सुधार के लिए लाए गए क़ानूनों से किसान नाखुश हैं और संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन जहां तक कृषि सेक्टर में सरकार की तरफ से प्रयास हैं या किसानों को लाभ देने की बात है, सरकार इसके लिए निरंतर कर रही है.
इस बजट में जिस तरह से एमएसपी बढ़ाकर उत्पादन लागत का 1.5 गुना किया गया. किसानों को राहत देने के लिए इसे गेंहू, धान, कॉटन आदि में बढ़ाया गया है. उनकी मूलभूत सुविधाएं बढ़ाई गई हैं. इस बार किसान क्रेडिट स्कीम में 16 लाख 50 हज़ार करोड़ आवंटित किया गया है, जो पिछली बार 15 लाख करोड़ था. उसे 10 प्रतिशत और बढ़ाया गया है.
साथ ही में गांव-गांव में तरह-तरह की स्कीम, चाहे उनके स्वास्थ्य से जुड़ी हो, चाहे सड़क से जुड़ी हो, चाहे उन्हें पानी देने की बात हो, चाहे बीज देने की बात हो, सरकार निरंतर किसानों के लिए एक के बाद एक कदम उठा रही है.
सरकार ने पीएम किसान स्कीम शुरू की गई. उन्हें राहत दी गई और लगातार दी जा रही है. उनकी फसल में भी अगर कुछ समस्या है तो बीमा के ज़रिए उनको कवर किया गया और रियायती दर पर कृषि के कर्ज़ की सीमा बढ़ाई गई है या ज़्यादा आवंटन किया गया है.
इससे उन्हें कृषि करने में सुविधा होगी और जिस तरह से कृषि का क्षेत्र पूरी जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा यानी 20 प्रतिशत हिस्सा होने की तरफ बढ़ रहा है, तो इस तरह के निवेश उसमें और बल देंगे और उम्मीद की जाती है कृषि क्षेत्र से आय और बढ़ जाएगी और साथ ही किसानों की भी आय दोगुनी होने की तरफ जल्दी जाएगी.

इमेज स्रोत, Tuul & Bruno Morandi
महिलाओं को बजट में क्या मिला?
पिछले वर्ष सरकार की जो ढेर सारी योजनाएं चल रही थीं, इस वर्ष भी उसे जारी रखा गया है.
महिलाओं को पिछली बार कुछ विशेष सुविधाएं दी गई थी. इस साल सरकार का कुल मिलाकर ये प्रयास है कि वो हर सेक्टर को, चाहे वो शिक्षा क्षेत्र हो, स्वास्थ्य हो, बुनियादी ढांचे को बढ़ाने की बात हो या फिर उन्हें मूलभूत सुविधाएं देने की बात हो, सभी क्षेत्र में ओवरऑल बढ़ोतरी की गई है.
कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाने के लिए अच्छी-खासी बढ़ोतरी की गई है. और ख़ास तौर से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी. जो बजट पिछली बार एक लाख करोड़ के नीचे आवंटित था, इस बार उसे बढ़ाकर दो लाख 23 हज़ार 846 करोड़ कर दिया गया है.
इसका मतलब कोविड महामारी में सरकार ने देखा कि हेल्थ के सेक्टर में बहुत काम किया जाना है, जिससे महिलाएं भी लाभांवित होंगी.
इसी तरह से महिलाओं को लाभ देने के लिए जो योजनाएं पहले से चल रही हैं. जैसे उज्जवला योजना, जिसका लाभ लेने वाले 8 करोड़ परिवारों की संख्या को 9 करोड़ तक कर दिया गया है, इसमें एक करोड़ का इज़ाफा किया गया है, ताकि महिलाओं को उज्जवला योजना में फायदा मिले.

मध्यवर्ग के लिए बजट में क्या सौगात?
सरकार कहती है कि मध्मवर्ग अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है और उन्हीं के टैक्स देने से देश आगे चल रहा है. सरकार ने इस बार बताया कि टैक्स देने वालों की संख्या 6.80 करोड़ हो गई है.
बजट से मध्यवर्ग को अपेक्षा और अकांशा दोनों होती हैं. मध्यम वर्ग हमेशा सोचता है कि उनके लिए कुछ रियायत बढ़े, उनके पास डिस्पोज़ेबल इनकम हो या उनकी निवेश की सीमाएं बढ़े या टैक्स का बोझ कम हो.
ख़ास तौर से इस महामारी के चलते एक उम्मीद बनी थी, जिसमें लोग सोच रहे थे कि एटीसी रिबेट बढ़ेगी, स्टैंडर्ड डिडिक्शन बढ़ेगा या इंश्योरेंस सेक्टर में मेडिक्लेम की रिबेट बढ़ेगी या इस साल हाउसिंग सेक्टर में बढ़ेगी. इस तरह की उम्मीद लगाई गई थी.
मौजूदा बजट में सरकार ने टैक्स स्लैब को यथावत रखा है. उन्होंने कहा कि वो कोई नया कर नहीं लगा रहे हैं. इसका मतलब जो कर पिछले साल प्रस्तावित थे, वही चालू रहेंगे, ऐसा लग रहा है.
लेकिन पारदर्शिता और सहूलियत देने के लिए कि आप ईमानदार टैक्सपेयर हैं तो आपको ज़्यादा दिक्कत ना हो, इसके लिए बहुत सारी योजनाएं सरकार की ओर से लाई गई हैं. परेशानी रहित एसेसमेंट या टैक्स पेमेंट के ढांचे को बेहतर किया गया है. जिससे आपका रिटर्न जल्दी से प्रोसेस हो जाए, रिफंड आपको समय से मिल जाए.
इसके अलावा इस बार दो अतिरिक्त चीज़ की गई है. पहले होता था कि अगर कोई कमी पाई गई तो छह साल तक आपके पुराने केस खोले जा सकते थे. अब 50 लाख से ज़्यादा आय वाले या 10 लाख से ज़्यादा टैक्स की चोरी करने वाले को इसमें लिया जाएगा.

इमेज स्रोत, Image Source
अप्रत्यक्ष कर में जीएसटी को लेकर सरकार ने ज़रूर बहुत-सी सुविधाओं की चर्चा की क्योंकि जीएसटी अलग से डील होता है तो उन्होंने कहा कि जीएसटी में हमने रिटर्न भरने की प्रक्रिया सरल की है, रिटर्न भरना आसान किया है, तिमाही सिस्टम कर दिया, थ्रैश होल्ड भी लिमिट बढ़ा दी. जीएसटी में व्यवस्था के साथ-साथ सरकार ने बताया है कि किस तरह से जीएसटी में कर चोरी रोककर जीएसटी का कलेक्शन बढ़ाया गया है.
सरकार ने एक तरह से ढांचागत बदलावों पर बहुत ध्यान दिया है, पारदर्शित पर ध्यान दिया है और सरलीकरण करने की तरफ ज़्यादा उनका रुझान रहा. टैक्स को उन्होंने यथावत रखा कि टैक्स में कोई बदलाव नहीं करेंगे.
वरिष्ठ नागरिकों को भी सरकार ने एक छोटी-सी राहत दी, जिसे कई लोग अच्छा कह रहे हैं. सरकार ने कहा है कि अगर 75 साल से ऊपर के लोगों की आय सिर्फ पेंशन या इंटरेस्ट से है तो उनको रिटर्न भरने की ज़रूरत नहीं होगी. बल्कि जिस बैंक के ज़रिए उनकी पेमेंट जा रही है वही टैक्स काटना भी सुनिश्चित करेगा (अगर टैक्स बनता है तो). नहीं तो उन्हें कोई फॉर्मेलिटी करने की ज़रूरत नहीं है.

कौन-सी उम्मीदें थी जो पूरी नहीं हुईं?
अर्थशास्त्री को तौर पर हम ये देखना चाह रहे थे कि बजट तीन-चार मुख्य बिंदुओं पर ज़रूर केंद्रित हो.
पहला मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर. जब तक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बहुत तेज़ी से नहीं बढ़ेगा या अपेक्षा के हिसाब से नहीं बढ़ेगा तो रोज़गार नहीं बढ़ेगा, क्योंकि रोज़गार उसी से जुड़ा है.
रोज़गार पहले से प्रभावित रहा है और कोविड-19 महामारी के बाद और स्थिति बिगड़ी है. दिसंबर में बेरोज़गारी का रेश्यो 10 प्रतिशत तक चला गया. जिसे लेकर सरकार भी चिंतित है और देश भी. बहुत लोग बेरोज़गार हुए और बेरोज़गारी की समस्या गांव से हटकर शहर तक आ गई. अर्बन सेक्टर में भी बहुत लोग बेरोज़गार हुए.
इसलिए हम उम्मीद कर रहे थे कि सरकार साहसिक कदम लेगी, भले ही राजकोषीय घाटे में जोखिम लेना पड़े, लेकिन ज़्यादा पैसा सिस्टम में डाले. कर्ज़ लेकर डाले, विनिवेश करके डाले, कैपिटल एक्सपेंडिचर की तरफ ज़्यादा ध्यान दे.

हमने देखा कि कई वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी में कम की गई है. स्टील, सोना-चांदी, बहुत सी चीज़ों में रेट कम किया जा रहा है. मकसद यही है कि उन सेक्टरों में हमारे यहां ज़्यादा मैन्युफैक्चरिंग हो. हमारे लोग ज़्यादा मैन्युफैक्चरिंग में जाएं और स्टार्टअप के लिए भी सीमाएं और बढ़ाई गई हैं.
साथ ही छोटी कंपनियों की परिभाषाओं में कपंनी एक्ट में परिवर्तन कर दिया गया. उनको एक और बड़ा रूप दिया गया ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग यहां आएं, बिज़नेस सेटअप करें, कम फॉर्मेलिटी और कम परेशानियों के साथ व्यवसाय करें. चाहे वो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का हो, चाहे सर्विस सेक्टर का हो.
साथ ही कृषि सुविधाओं के साथ कोई समझौता ना करके किसानों की आय बढ़ाने का वादा पूरा करें, हेल्थ सेक्टर में भी बजट बढ़ाया गया, शिक्षा के क्षेत्र में पिछली बार भी खर्च बढ़ाया गया, इस बार भी बढ़ाया गया है. खास तौर से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ज़ोर दिया गया.
साथ ही टैक्स को और सरल बनाने के लिए उन्होंने ऑडिट की सामीएं भी बढ़ा दी, बोला कि अगर आप डिजिटल तरीके से अपना व्यवसाय करते हैं तो आपको 10 करोड़ तक का टर्नओवर होने पर आपको ऑडिट कराने की ज़रूरत नहीं होगी.

इमेज स्रोत, EPA
ये बजट इनकम टैक्स को देखते हुए बहुत उम्मीदों के मुताबिक़ तो नहीं था. हम लोगों को भी लग रहा था कि सरकार के पास बहुत कुछ करने के लिए स्कोप नहीं था क्योंकि इस महामारी को ध्यान में रखते हुए सरकार देखेगी कि ज़्यादा से ज़्यादा आम लोगों को रोज़गार दिया जाए, देश को आत्मनिर्भर बनाया जाए, किसानों की आय बढ़ाई जाए, स्वास्थ्य के ऊपर ज़्यादा ज़ोर दिया जाए, चीज़ों का सरलीकरण किया जाए और बिज़नेस करने को आसान बनाया जाए.
इन सभी चीज़ों में मुझे लगता है कि सरकार ने सही दिशा में कदम लिया गया है. लेकिन और भी कई चीज़ों की उम्मीद की जा रही थी. लेकिन सरकार ने 30 लाख 42 हज़ार करोड़ के बजट साइज़ को सरकार ने ले जाकर लगभग 34 लाख 83 हज़ार करोड़ खर्च की तरफ जोड़ दिया है.
जीडीपी के संकुचन के बावजूद भी उन्होंने खर्च की सीमा 35 लाख करोड़ के आसपास रखी है, ये एक साहसिक कदम है. साथ ही ये भी ध्यान दिया गया कि हम अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए हर तरह का ज़रूर कदम उठाएं, वो चाहे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में हो, सड़क बनाने की बात हो, पावर डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम की बात हो, सोलर सिस्टम में हो - हर दिशा में उन्होंने इस पर ध्यान दिया है.
(बीबीसी संवाददाता गुरप्रीत सैनी से बातचीत पर आधारित)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















