बजट 2021: किसानों को निर्मला सीतारमण ने क्या दिया

आम बजट में किसानों के लिए क्या है?

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बीते दो महीने से ज़्यादा वक़्त से केंद्र सरकार से नाराज़ किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं और मौजूदा मोदी सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बता रहे हैं.

लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को वित्त वर्ष 2021 - 22 का आम बजट पेश करते हुए दावा किया कि 'सरकार किसानों के लिए समर्पित है.'

बजट में किसानों के लिए क्या घोषणाएं

2021-22 बजट में एग्रीकल्चर इँफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवेलपमेंट सेस (एआईडीसी) बढ़ाते हुए पेट्रोल पर 2.5 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 4 रुपये प्रति लीटर रखा गया है.

इसके अलावा एग्रीकल्चर इँफ्रास्ट्रक्चर सेस काबुली चले पर 30 फ़ीसदी, मटर पर 50 फ़ीसदी, मसूर की दाल पर 5 फीसदी और रूई पर 5 फ़ीसदी बढ़ा दिया गया है. हालांकि सरकार ने इसपर लगने वाली कस्टम ड्यूटी घटा दी है ऐसे में उभोक्ताओं के लिए इसकी कीमत पर प्रत्यक्ष असर नहीं पड़ेगा.

सीतारमण ने कहा, '' कुलमिलाकर उपभोक्ता पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा. बेसिक एक्साइज़ ड्यूटी और स्पेशल एडिशनल एएक्साइज़ ड्यूटी को घटा दिया गया है ताकी कीमतों को लेकर कोई भार ना पड़े. ''

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वित्त मंत्री ने बताया कि 2021-22 में कृषि ऋण लक्ष्य को 16.5 लाख करोड़ रुपये तक किया जा रहा है.

उन्होंने जानकारी दी है कि अब स्वामित्व योजना को देशभर में लागू किया जाएगा. इसके साथ ही ऑपरेशन ग्रीन स्कीम का ऐलान किया गया है, जिसमें कई फसलों को शामिल किया जाएगा.

वहीं, पांच फिशिंग हार्बर को आर्थिक गतिविधि के हब के रूप में तैयार किया जाएगा. साथ ही तमिलनाडु में फिश लैंडिंग सेंटर का विकास किया जाएगा.

विपक्ष की नारेबाज़ी के बीच एमएसपी पर क्या कहा

आंदोलनकारी किसान जिन बातों को लेकर सबसे ज़्यादा चिंतिंत हैं, उनमें एमएसपी का मुद्दा प्रमुख है.

लेकिन आम बजट के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है और एमएसपी बढ़ाकर उत्पादन लागत का 1.5 गुना किया गया है.

वित्त मंत्री ने बताया कि गेहूं के लिए किसानों को 75,060 और दालों के लिए 10,503 करोड़ का भुगतान किया है.

वहीं, धान की भुगतान राशि 1,72,752 करोड़ होने का अनुमान है और कृषि उत्पादों में 22 और उत्पादों को शामिल किया जाएगा.

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सरकार के कामों को गिनवाते हुए क्या कहा?

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2021 में किसानों को गेहूं पर 75,100 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. वित्त मंत्री के मुताबिक़, गेहूं उगाने वाले 43.36 लाख किसानों को एमएसपी के तहत सरकारी ख़रीद से लाभ हुआ, जो संख्या पहले 35.57 लाख थी.

वित्त मंत्री जब ये बता रही थीं तब विपक्ष सदन में तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी कर रहा था. इस बीच वित्त मंत्री ने बताया कि कृषि ख़रीद में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसानों को लाभ हुआ है.

उन्होंने कहा है कि सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने पर कायम है. इसके साथ ही दावा किया कि मोदी सरकार ने यूपीए सरकार से क़रीब तीन गुना राशि किसानों के खातों में पहुंचाई है और हर सेक्टर में किसानों को मदद दी गई है और दाल, गेहूँ, धान समेत अन्य फसलों की एमएसपी बढ़ाई गई.

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वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा है कि धान की ख़रीद पर 2013-14 में 63 हज़ार करोड़ रुपये खर्च किए गए थे जिसे बढ़ाकर 1 लाख 45 हज़ार करोड़ किया जा चुका है.

उन्होंने कहा कि इस वर्ष ये आंकड़ा 72 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है और 1.2 करोड़ किसानों को इससे बीते वर्ष लाभ हुआ था, इस वर्ष इससे 1.5 करोड़ किसान लाभान्वित हुए हैं.

वित्त मंत्री ने कहा, "गेहूं पर सरकार ने 33 हज़ार करोड़ रुपये 2013-14 में खर्च किए थे. 2019 में 63 हज़ार करोड़ रुपये और अब यह 75 हज़ार करोड़ रुपये हो गई है. 2020-21 में 43 लाख किसानों को इसका लाभ मिला है."

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