सीबीआई ने अपने ही कर्मियों को रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दो सालों की जाँच के बाद देश की प्रमुख जाँच एजेंसी केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने ही विभाग के दो डीएसपी, एक इंस्पेक्टर और एक स्टेनोग्राफ़र के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है.
सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि ये सभी कर्मी मुंबई की एक कंपनी के किए 3500 करोड़ रुपये के घोटाले की जाँच में शामिल थे और इन पर कंपनी को लाभ पहुँचाने का आरोप लगा है.
सूत्रों का ये भी कहना है कि ये पहली बार नहीं है जब एजेंसी ने अपने ही अधिकारियों और कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की हो.
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी कई बड़े मामलों की जाँच करती है. इसलिए वो जाँच में शामिल अपने कर्मियों पर भी नज़र रखती है. शिकायत मिलने पर एजेंसी अपने कर्मियों की वैसी ही जाँच करती है जैसी वो दूसरे किसी मामले में करती है.
लेकिन अपने ही लोगों की जाँच करने के लिए एजेंसी में एक विशेष सेल मौजूद है जो शिकायत मिलने के आधार पर जाँच करता है. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है.
सूत्रों का कहना है कि शिकायत मिलने के दो सालों तक एजेंसी की विशेष सेल ने इन चारों कर्मियों और इनके साथ मिले हुए वकीलों और निजी कंपनी के मालिकों को अपनी निगरानी में रखा. उनके मोबाइल फ़ोन से लेकर उनकी हर हरकत पर दो सालों तक विशेष सेल की नज़र रही और सही वक़्त आने पर छापामारी भी की गई और मामला भी दर्ज किया.
सीबीआई एकेडमी पर भी छापा

इस बार जाँच के दायरे में सीबीआई का दिल्ली के 'सीजीओ कॉम्पलेक्स' स्थित मुख्यालय भी था जिसके साथ-साथ एजेंसी की विशेष जाँच टीम ने देश भर में 14 ठिकानों पर छापेमारी की.
ये पहला मौक़ा था कि एजेंसी ने ग़ाज़ियाबाद स्थित अपनी ही 'सीबीआई एकेडमी' में छापेमारी की. सूत्रों का कहना है कि डीएसपी आर के ऋषि की नियुक्ति सीबीआई एकेडमी में थी इसलिय वहाँ भी छापेमारी की गयी.
इस एकेडमी में सीबीआई के अधिकारियों का प्रशिक्षण होता है और यहाँ छापेमारी होना संस्था के लिए भी चिंता का विषय है.
सीबीआई के प्रवक्ता आर सी जोशी ने पत्रकारों को बताया कि एजेंसी के जिन कर्मियों को जाँच के दायरे में रखा गया, उन पर आरोप है कि उन्होंने पहले चल रहे एक घोटाले की जाँच के मामले में अभियुक्तों को फ़ायदा पहुँचाने का काम किया है.
मामले को लेकर जो प्राथमिकी दर्ज की गई है उसमें दो डीएसपी - आर के ऋषि और आर के सांगवान, इंस्पेक्टर कपिल धनकड़, स्टेनोग्राफ़र समीर कुमार सिंह, वकील अरविन्द कुमार गुप्ता और मनोहर मल्लिक के अलावा 'श्री श्याम पल्प एंड बोर्ड मिल्स प्राइवेट लिमिटेड' की उपनिदेशक मंदीप कौर ढिल्लो, 'फ्रॉस्ट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड' के दो निदेशक सुजय देसाई और उदय देसाई को नामज़द अभियुक्त बनाया गया है.
प्राथमिकी में कहा गया है, "विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली कि डीएसपी आर के सांगवान और आर के ऋषि, इंस्पेक्टर कपिल धनकड़ और स्टेनोग्राफ़र समीर कुमार सिंह ने अपने निजी व्यक्तियों अरविन्द गुप्ता और मनोहर मल्लिक के साथ मिलकर पहले से चल रहे मामले की जाँच की सत्यनिष्ठा के साथ समझौता किया है."
प्राथमिकी में ये भी कहा गया है कि ऐसा अभियुक्तों ने आर्थिक लाभ के लिए किया है.
एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि दोनों अभियुक्त डीएसपी में से एक की तैनाती सीबीआई के 'बैंकिंग एंड सिक्योरिटीज फ्रॉड सेल' में थी जिस पर मुंबई की एक कंपनी द्वारा किये गए कथित रूप से 3500 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जाँच का ज़िम्मा था. अभियुक्त कर्मियों पर आरोप है कि उनको रिश्वत हर महीने निरंतर पहुँचाई गई थी.
आगे की कार्यवाही

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दो साल पहले जब अपने कर्मियों के ख़िलाफ़ सीबीआई को शिकायत मिली तो एजेंसी की विशेष सेल ने उनकी निगरानी शुरू की. एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि इस दौरान दिल्ली के चाणक्यपुरी के इलाक़े में स्थित अधिकारियों के इंस्टीट्यूट में छापेमारी की गई. इसी छापेमारी के दौरान एजेंसी के अधिकारियों के नाम सामने आए.
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक यूनिट-IV की एसपी नुपूर सिंह ने प्राथमिकी में कहा, "अभियुक्त बनाए गए इंस्पेक्टर ने डीएसपी को श्याम पल्प एंड बोर्ड्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की तरफ़ से रिश्वत पहुँचाया. वहीं एक दूसरे डीएसपी ने एक दूसरी कंपनी - फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के निदेशकों की तरफ़ से दस लाख रुपये बतौर रिश्वत इंस्पेक्टर को पहुँचाए."
सीबीआई की एसपी नुपुर सिंह के अनुसार डीएसपी आर के ऋषि को चंडीगढ़ की एक कंपनी ने वकीलों के ज़रिये दो बार 15-15 लाख रुपये पहुँचाए जबकि इंस्पेक्टर कपिल धनकड़ को दो बार 2.5-2.5 लाख रुपये दिए गए. इस चंडीगढ़ स्थित कंपनी के ख़िलाफ़ भी सीबीआई जाँच कर रही थी.
इस संबंध में नुपुर सिंह ने भारतीय दंड विधान की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) क़ानून 2018 की धारा 7, 7/A, 8 और 12 के तहत सभी अभियुक्त बनाए गए लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की है.
एजेंसी ने इस संबंध में 14 जनवरी को एक प्रेस रिलीज़ जारी की और कहा कि छापेमारी दिल्ली, नोएडा, ग़ाज़ियाबाद के अलावा गुरुग्राम, मेरठ और कानपुर स्थित अभियुक्तों के ठिकानों पर की गई. प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि फ़िलहाल मामले को लेकर और जाँच जारी है.
सूत्रों का कहना है कि छापेमारी में बरामद हुए सबूतों के आधार पर आगे की कार्यवाही भी की जा रही है और इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है कि कई और लोग भी सीबीआई की जाँच के घेरे में आ सकते हैं.
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