अश्वनी कुमार: पूर्व सीबीआई निदेशक ने आत्महत्या की, शव बरामद

अश्वनी कुमार

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक अश्वनी कुमार की मौत हो गई है. वे अपने शिमला स्थित घर में मृत पाए गए. पुलिस के मुताबिक़ उन्होंने खुदकुशी की है.

शिमला में बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अश्वनी शर्मा ने बताया कि घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने पुष्टि की कि ये आत्महत्या का मामला है.

पुलिस की टीमें उनके घर पहुंची, जहां कथित तौर पर उन्हें अश्वनी कुमार का एक सुसाइड नोट मिला है.

हिमाचल प्रदेश के डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि अश्वनी कुमार के पास से एक सुसाइड नोट मिला है.

इस सुसाइड नोट में लिखा हुआ था, ''अपनी बीमारी और डिसएबिलिटी के चलते इस जीवन को ख़त्म कर रहा हूं और नए जीवन की ओर बढ़ रहा हूं.''

ईमानदार अधिकारी माने जाते थे कुमार

डीजीपी संजय कुंडू के मुताबिक़ अश्वनी कुमार ने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए किसी को भी ज़िम्मेदार नहीं ठहराया. परिवार वालों के मुताबिक़ अश्वनी कुमार ने ख़ुदकुशी से पहले सामान्य थे. उन्होंने दिन में सैर की, काली माता के मंदिर गए और शाम में ध्यान किया.

शाम में उनके बेटे और बहू सैर के लिए बाहर निकले. जब वो वापस लौटे तो दरवाज़ा अंदर से बंद था. दरवाजा तोड़े जाने पर अश्वनी कुमार मृत पाए गए.

परिवार वालों ने भी अश्वनी कुमार की मौत में किसी तरह की साज़िश होने की बात नहीं कही है.

संजय कुंडू के मुताबिक़ युवा आईपीएस अधिकारियों के लिए अश्वनी कुमार की ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा प्रेरणा का काम करती रही थी.

साल 1973 में वे भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए थे. वो 2006 से लेकर 2008 तक हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के पद पर भी रहे. उन्हें एक ईमानदार अधिकारी माना जाता था.

अश्वनी कुमार का जन्म हिमाचल प्रदेश के एक पिछड़े ज़िले सिरमौर के नहान में 15 नवंबर, 1950 को हुआ था. वो 2008 से 2010 के बीच सीबीआई के निदेशक रहे. इसके बाद वे मणिपुर और नगालैंड के राज्यपाल भी रह चुके थे.

वापस आने पर अश्वनी कुमार ने एपीजी गोयल शिमला विश्विद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यभार स्वीकार किया था, लेकिन 2018 में उन्होंने इसे छोड़ दिया.

लॉकडाउन के दौरान वे मुंबई में फंस गए थे, जहाँ वो अपने बेटे अभिषेक के साथ रह रहे थे. उनके बेटे एक बड़ी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं. अश्वनी कुमार के परिवार में उनकी पत्नी चंदा, बेटे और बहू हैं.

हिमाचल प्रदेश पुलिस, सीबीआई और प्रधानमंत्री को सुरक्षा मुहैया कराने वाली सरकारी एजेंसी एसपीजी के अहम पदों पर वे रहे थे.

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इन मामलों के लिए जाने जाते थे

साल 2008 अश्वनी कुमार ने कार्यभार संभाला था तब सीबीआई चर्चित आरुषि तलवार केस की जाँच कर रही थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, वो जांच से खुश नहीं थे और उन्होंने केस अपने हाथ में लेने का फैसला किया.

कुमार ने कहा था, "ये केस मेरे लिए लिटमस टेस्ट है, मुझे पता करना है कि आरुषि को किसने मारा? माँ-बाप ने या किसी और ने? मुझे इस केस को लेकर गुस्सा आता है."

कुमार के कार्यकाल में ही केस की क्लोज़र रिपोर्ट बनाई गई थी. कॉमनवेल्थ गेम घोटाले की जांच भी उनके कार्यकाल में शुरू हुई थी.

इसके अलावा कथित सोहराबुद्दीन फ़ेक एनकाउंटर मामले में अमित शाह के ख़िलाफ़ चार्जशीट भी उनके कार्यकाल में दायर की गई थी. शाह को इस मामले में बरी कर दिया गया है.

(आत्महत्या एक गंभीर सामाजिक-मनोवैज्ञानिक समस्या है, जिसे टाला जा सकता है. इसके लिए मनोचिकित्सक की मदद लेनी चाहिए.)

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