बिलासपुर: उज्ज्वला शेल्टर होम से भागी लड़कियों ने लगाये यौन शोषण के आरोप

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- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर (छत्तीसगढ़) से, बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक सरकारी उज्ज्वला गृह में रहने वाली लड़कियों के साथ कथित यौन प्रताड़ना का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
इस उज्ज्वला गृह से भागकर आईं लड़कियों का आरोप है कि वहाँ लड़कियों का कथित यौन शोषण किया जाता था. साथ ही लड़कियों को कथित रूप से देह व्यापार के लिए बाहर भेजा जाता था.
इन आरोपों के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक और उनकी एक टीम ने मामले की जाँच के लिए बिलासपुर का दौरा किया है. फ़िलहाल इस केंद्र को बंद कर दिया गया है और वहाँ रह रहीं लड़कियों को उनके घर या सखी सेंटर भेजा जा रहा है.
सरकार द्वारा संचालित इस गृह में युवतियों के साथ यौन प्रताड़ना, उनके साथ दुष्कर्म और उनसे देह व्यापार कराने के आरोप में संचालक को गिरफ़्तार किया गया है. गुरुवार को पीडिताओं ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान में गंभीर आरोप लगाये थे.
ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार की उज्ज्वला गृह योजना के तहत बच्चों तथा महिलाओं के मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण से बचाव, पुनर्वास और उन्हें समाज में पुनः जोड़ने का काम किया जाता है.
लेकिन इसी उज्ज्वला गृह में कथित यौन प्रताड़ना के गंभीर आरोप सामने आने के बाद विपक्ष ने पूरे मामले की विशेष टीम बनाकर जाँच करने की माँग की है.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धर्मलाल कौशिक ने बीबीसी से कहा, "उज्ज्वला गृह में जो कुछ हुआ है, वह हम सबके लिए शर्मशार करने वाली घटना है. बिलासपुर को संस्कारधानी कहा जाता है. अगर संस्कारधानी में, सरकार के संरक्षण में रह रही बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो राज्य के दूसरे हिस्सों में बेटियों की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है."
दूसरी ओर पुलिस इससे इनकार कर रही है. पुलिस का कहना है कि आरंभिक तौर पर इतने गंभीर आरोप पुलिस के समक्ष नहीं आये थे. अगर पुलिस के सामने और बातें आएंगी तो उन्हें भी जाँच में शामिल किया जाएगा.
इधर युवतियों का कहना है कि उन पर अपना बयान बदलने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और ऐसा नहीं करने पर उन्हें 'गंभीर परिणाम' भुगतने की चेतावनी दी जा रही है.

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गंभीर आरोप
केंद्र सरकार की उज्ज्वला गृह योजना के अंतर्गत राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग ने रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और कोरिया ज़िले में स्वैच्छिक संगठनों को केंद्र संचालन का ज़िम्मा दिया है.
इन केंद्रों को सरकारी अनुदान तो मिलता ही है, देशी-विदेशी संस्थाओं से पैसे भी मिलते हैं.
आरोप है कि बिलासपुर की ही रहने वाली एक युवती अपने पति से विवाद के बाद घर से निकल गई थी, जिसे कुछ लोगों ने बिलासपुर के सरकंडा थानांतर्गत शिव मंगल शिक्षण समिता द्वारा संचालित उज्ज्वला गृह पहुँचा दिया था.
रविवार की शाम उस युवती के परिजन उसे ले जाने के लिए पहुँचे, जहाँ उसने उज्ज्वला गृह में प्रताड़ित किये जाने का आरोप लगाया.
वहाँ खिड़कियों से झांक रहीं दूसरी युवतियों ने भी देह व्यापार के लिए भेजे जाने की बात कहते हुए, उनसे मदद की गुहार लगाई.
इसके बाद युवती के परिजनों ने आस-पास के लोगों की मदद से तीन युवतियों को वहाँ से निकाला और सभी लोग सरकंडा थाना पहुँचे.

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उज्ज्वला गृह से निकलकर आईं युवतियों ने प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि उन सभी को रात तीन बजे तक थाने में रोक कर रखा गया, लेकिन यौन प्रताड़ना और देह व्यापार के लिए बाहर भेजे जाने संबंधी उनके आरोपों को पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में दर्ज नहीं किया और मामूली मारपीट की धाराएं लगाकर उन्हें चलता कर दिया गया.
इसके उलट उज्ज्वला गृह के संचालक की शिकायत पर युवती और उनके परिजनों के ख़िलाफ़ कर्मचारियों के साथ मारपीट व तोड़फोड़ की रिपोर्ट दर्ज़ कर ली गई.
एक पीड़िता ने कहा, "मेरे साथ गैंगरेप हुआ था और पुलिस मुझे उज्ज्वला गृह में यह कहकर छोड़ गई थी कि तीन बयान कोर्ट में होने के बाद मुझे यहाँ से छोड़ दिया जाएगा. उज्ज्वला गृह में चौथे ही दिन मेरे साथ रेप किया गया और जब मैंने कहा कि मैं इसकी शिकायत करूंगी तो मेरे साथ लगातार मारपीट की गई."
एक अन्य पीड़िता ने आरोप लगाया कि वहाँ खाने में कथित रूप से कोई दवा दी जाती थी, जिसके बाद युवतियाँ बेसुध हो जाती थीं. सुबह जब नींद खुलती थी तो वो असामान्य स्थिति में होती थीं.
युवती का कहना था कि उनके सामने दूसरी युवतियों को रात को उज्ज्वला गृह से बाहर भेजा जाता था.
एक अन्य युवती ने आरोप लगाया कि विरोध करने वाली युवतियों के कपड़े उतार कर, उन्हें कमरे में बंद कर दिया जाता था.
हालांकि, उज्ज्वला गृह के संचालक जीतेंद्र कुमार मौर्य ने मीडिया को दिये अपने बयान में कहा है कि युवतियों के सारे आरोप झूठे हैं और संस्था को बदनाम करने के लिए साज़िश की जा रही है.
उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि युवतियों के साथ किसी तरह की प्रताड़ना होती थी.
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जाँच जारी है
बिलासपुर पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है और प्राथमिक तौर पर जब युवतियाँ थाने में पहुँची थीं तो उन्होंने ऐसे गंभीर आरोप नहीं लगाये थे.
मामले की जाँच कर रहे सरकंडा इलाक़े के थाना प्रभारी जेपी गुप्ता ने बीबीसी से कहा, "रविवार की रात युवतियों ने ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया था. महिला पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में हमने उनका बयान रिकार्ड किया था. अगर कोई सामने आकर शिकायत करेगा तो उसकी ज़रूर जाँच की जाएगी."
उन्होंने कहा कि युवतियों को इस मामले में मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराने के लिए बुधवार को नोटिस जारी किया गया है.
बिलासपुर के कांग्रेस पार्टी के विधायक शैलेष पांडेय ने बीबीसी से कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और इसकी जाँच पुलिस कर रही है.
लेकिन विपक्षी दल भाजपा इसे नाकाफ़ी बता रही है. विधानसभा में विपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक का कहना है कि पुलिस इस मामले में ख़ुद आरोपों के घेरे में है, ऐसे में इस पूरे मामले की जाँच के लिए सरकार को तत्काल एक विशेष टीम गठित करनी चाहिए.
इस संबंध में हमने राज्य की महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री अनिला भेड़िया से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका.
मानवाधिकार कार्यकर्ता और हाईकोर्ट की अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला कहती हैं, "बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम में जो स्थितियाँ थीं, आशंका है कि यहाँ भी ऐसा ही कुछ चल रहा हो. संकट ये है कि मामले में जाँच की जगह लीपापोती हो रही है और इन युवतियों और उनकी मदद करने वालों पर ही दबाव बनाया जा रहा है, उन्हें बयान बदलने के लिए धमकाया जा रहा है. इस मामले में सरकार को एसआईटी गठित कर जाँच करनी चाहिए."
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