बिहार : महिलाओं का आसरा गृह या यातना केंद्र ?

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी के लिए
"हम घर जाना चाहते हैं. अपने घर का पता भी बताते हैं लेकिन हमें यहां बंद कर रखा है."
उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर की जहरी देवी पटना के एक आसरा गृह की पहली मंज़िल पर बने एक कमरे में कैद थीं.
मैं नीचे थी और उन्होंने खिड़की के सहारे मुझसे बात की. उनके बगल में बिहार शरीफ़ की सुनीता देवी ने भी बहुत स्पष्ट तो नहीं लेकिन लड़खड़ाते शब्दों में मुझसे यही कहा.
"मुझे घर जाना है और मुझे अपने घर का पता याद है."
मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह के चर्चा में आने के बाद बिहार के शेल्टर होम बजबजाते गटर जैसे लग रहे हैं. जहां देखिए वहीं से यातना दिए जाने के मामले सामने आ रहे हैं.
पटना का आसरा गृह राजीव नगर थाने के अंतर्गत आता है. इसे 'अनुमाया ह्यूमन रिसोर्स फांउडेशन' चलाता है. इस आसरा गृह से 9 अगस्त को एक लड़की ने खिड़की का ग्रिल काटकर भागने की कोशिश की थी.

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जांच में जुटी पुलिस
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद ये बात सामने आई कि 10 अगस्त को यहां रहने वाली दो महिलाओं, पूनम भारती और बबली की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी. उसके बाद से ही आसरा गृह पर पुलिस का पहरा है.
इस मामले में पटना के राजीव नगर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 420/406/409/304/34 के तहत चार लोगों को अभियुक्त बनाया गया है. इसमें संस्था के सचिव चिरंतन कुमार और कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. जबकि होम के डॉक्टर अंशुमान प्रियदर्शी और एक सहायक खुशबू कुमारी फ़रार हैं.
पटना के एसएसपी मनु महाराज ने बताया, "जांच चल रही है और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. बाकी लोगों की गिरफ़्तारी के लिए हर संभव कोशिश जारी है. इस मामले में हाउस मदर बेबी कुमारी को भी हिरासत में लिया गया है."
मुख्य तौर पर विक्षिप्त महिलाओं के लिए बीते मई माह में खुले इस होम के सुर्खियों में होने की वजह इसकी कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल भी है. मॉडलिंग से लेकर इवेंट मैनेजमेंट करने वाली मनीषा के ताल्लुक बिहार के हर क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों से है.
इस बात की तस्दीक उनका फ़ेसबुक अकांउट भी करता है. महिलाओं के बीच तीज, सावन उत्सव और महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यक्रम करने को लेकर वो पटना के 'पेज थ्री' सर्किल में बहुत लोकप्रिय थी.

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अनसुलझे सवाल
आलम ये है कि मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह कांड के मुख्य अभियुक्त बृजेश ठाकुर के अख़बार 'प्रात: कमल' में भी मनीषा से जुड़ी खबरें पहले पन्ने पर छपती थीं. बीते 1 जून के प्रात: कमल अखबार में पहले पन्ने पर मनीषा की तस्वीर के साथ 4 कॉलम की ख़बर छपी थी. इस ख़बर में छपी तस्वीर में मनीषा के साथ पटना की मेयर सीता साहू भी हैं.
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि 10 अगस्त को दो महिलाओं की मौत के बाद आसरा गृह ने थाने को सूचना क्यों नहीं दी?
पटना मेडिकल कॉलेज अधीक्षक राजीव रंजन के मुताबिक, "दोनों महिलाओं को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था जिसके बाद इस बात की जानकारी स्थानीय थाने को दी गई थी."
लेकिन इसके बाद आनन-फ़ानन में पूनम भारती का दाह संस्कार कर दिया गया. लेकिन बबली का शव जलाने से पहले ही मामला सबकी नज़र में आ गया. बबली का फिर से पोस्टमार्टम कराया गया है.

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सच क्या है?
हालांकि चिरंतन कुमार ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया, "पुलिस को इन दोनों मौत की जानकारी हम लोगों ने ही दी थी और इसका सबूत मेरे पास है. मेरी जान को ख़तरा है और मुझे फंसाया जा रहा है. मेरे होम में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है. इसलिए रात को गाड़ी आने वाली सब बात झूठ है."
उन्होंने ये भी कहा कि 1 अगस्त को पटना के निशांत गृह से आई पूनम पहले से बीमार थी. साथ ही बबली जो अप्रैल महीने में यहां आई थी वो भी लगातार बीमार रहती थी. दोनों को बुखार और डायरिया की शिकायत थी.
राजीव नगर के चन्द्रविहार कालोनी में स्थित इस आसरा गृह में 50 महिलाएं रह सकती हैं, लेकिन यहां 75 महिलाएं रहती हैं. गृह के आस-पास रहने वाले लोग बहुत नाराज़ हैं. सबसे ज़्यादा नाराज़ बनारसी का परिवार है जिनका घर आसरा गृह से सटा है. बनारसी ही वो शख़्स हैं जिन पर 9 अगस्त को एक लड़की को भगाने का आरोप लगा है.
बनारसी की बेटी नीतू सिंह कहती है, "मेरे पिता को ज़बरदस्ती फंसाया जा रहा है. अगर उन्हें लड़की को भगाना होता तो वो उसके भागने पर हल्ला ही क्यों मचाते? ये होम वाले महिलाओं को खाना मांगने पर पीटते हैं. गार्ड तक छत पर लाकर महिलाओं को पीटता है."

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वहीं मोहल्ले की रश्मि और पप्पू श्रीवास्तव ने भी बताया कि रात भर महिलाओं के चिल्लाने और रोने-पीटने की आवाजें आती थीं.
ये आसरा होम पटना के राजीव नगर थाना, केन्द्रीय लोक निमार्ण विभाग, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स और नेशनल अकादमी आफ कस्टम, इनडायरेक्ट टैक्स और नारकोटिक्स के आलीशान दफ़्तरों से तकरीबन एक किलोमीटर दूर ही है.
इतने ताक़तवर दफ्तरों के आस-पास भी इन महिलाओं को सुरक्षित और सुखद 'आसरा' नहीं मिल सका.
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