KBC 12 में करोड़पति बनने वाली नाज़िया नसीम

इमेज स्रोत, BBC/Ravi Prakash
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिन्दी के लिए.
वो खूबसूरत हैं, उनकी भाषा अच्छी है, सलीके से बात करती हैं, तमाम सवालों के जवाब से लबरेज़ हैं, कॉन्फिडेंट हैं, फेमिनिस्ट हैं, खूब पढ़ती हैं और नौकरी करती हैं, घर भी चलाती हैं.
ये नाज़िया नसीम हैं जिन्होंने भारतीय टेलीविजन के चर्चित शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (केबीसी) के ताज़ा सीजन में एक करोड़ रुपये जीते हैं और इसके साथ ही वो इस सीज़न की पहली करोड़पति बन गई हैं.
11 नवंबर की इस घटना ने उनकी ज़िंदगी बदल दी है और अब वो आम से ख़ास बन चुकी हैं.
10 और 11 नवंबर की रात उनके पूरे परिवार ने केबीसी के वो शो देखें जिसमें नाज़िया शो के होस्ट और भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन से मुख़ातिब थीं.
अब वह दिल्ली से रांची आई हैं जहां उनकी अम्मी-अब्बू और परिवार के दूसरे सदस्य रहते हैं. उनका बचपन इसी शहर की गलियों में गुजरा है और इसकी कई यादें उन्हें और सशक्त बनाती हैं.

इमेज स्रोत, BBC/Ravi Prakash
नाजिया नसीम ने रांची के उस डीएवी श्यामली स्कूल (अब जवाहर विद्या मंदिर) से पढ़ाई की है, जहां कभी भारतीय क्रिकेट के कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी भी पढ़ा करते थे.
बाद के सालों में उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में भी पढ़ाई की. अब वे मोटरसाइकिल बनाने वाली एक नामी कंपनी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं.
वे दिल्ली में अपने शौहर मोहम्मद शकील और दल साल के बेटे तान्याल के साथ रहती हैं.
केबीसी का सफ़र
नाज़िया नसीम अपने केबीसी से जुड़े अनुभव को याद करते हुए कहती हैं, "मैं पिछले 20 साल से कौन बनेगा करोड़पति में जाना चाहती थी. ख़ुदा का शुक्र है कि मुझे यह मौक़ा मिला."
''मैं सबसे ज़्यादा खुश हुई जब अमिताभ बच्चन ने मुझसे कहा कि 'नाज़िया जी, आइ एम प्राउड ऑफ़ यू.' (मुझे आप पर गर्व है). यह साल किसी और के लिए ख़राब होगा. मेरे लिए तो यह साल सबसे अच्छा रहा. ये यादें ताउम्र मेरे साथ रहेंगी."
"मेरी और मेरी अम्मी की ख्वाहिशें पूरी हुई हैं. इसका सारा श्रेय मेरे परिवार को जाता है. जिसने मुझे बाहर निकलने और पढ़ने-बोलने की आज़ादी दी. ख़ासकर मेरी मां, जिनकी कम उम्र में शादी होने के बावजूद उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई पूरी की बल्कि एक बिजनेस वुमेन भी हैं. वे बुटिक चलाती हैं और आत्मनिर्भर हैं."

इमेज स्रोत, BBC/Ravi Prakash
रिस्क लेने से क्या डरना
नाज़िया बताती हैं, "25 लाख रुपये के लिए पूछे गए तेरहवें सवाल के जवाब को लेकर श्योर नहीं थी. लेकिन मैं कॉन्फिडेंट थी. तब मैंने कहा- रिस्क तो लिया ही है मैंने ज़िंदगी में, एक बार और ले लेते हैं. फिर मैंने जो जवाब दिया वह सही निकला. इसके साथ ही मैं 25 लाख जीत चुकी थी."
"मेरी आंखों में आंसू थे मैंने पीछे मुड़कर अपनी मां और पति को देखा. मेरा आत्मविश्वास और मज़बूत हुआ और देखते-देखते मैं सोलहवें सवाल तक पहुंच गई. फिर जो रिज़ल्ट आया, उससे आप सब वाक़िफ़ हैं. मैंने एक करोड़ रुपये जीत लिए और इतनी रक़म जीतने वाली इस सीजन की पहली विजेता बन गई."
घर से मिली फेमिनिज्म की सीख
नाज़िया खुद को महिलावादी बताती है और कहती हैं उन्हें ये अपनी मां से विरासत में मिला है.
उन्होंने कहा, "मैंने एक फ़िल्म देखी थी सोन चिरैया. उसमें फूलन देवी का रोल निभा रही कलाकार भूमि पेडनेकर कहती हैं- 'औरत की कोई जात नहीं होती.' यह बहुत बड़ी बात है.
"आज भी हमारे समाज में औरतों को वह आज़ादी नहीं मिली है, जिसकी वे हक़दार हैं. मैं एक ऐसे समाज की चाहत रखती हूं, जहां मां-बाप अपनी लड़कियों को इसलिए नहीं पढ़ाएं कि उसे अच्छा लड़का (जीवनसाथी) मिलेगा, बल्कि इसलिए पढ़ाएं कि वह पढ़-लिखकर अच्छी लड़की बनेगी. लड़के तो फिर मिल ही जाएंगे."

इमेज स्रोत, BBC/Ravi Prakash
नाज़िया बताती हैं, "बचपन में अब्बू और अम्मी के व्यवहार से यह सीख मिली और शादी के बाद मेरे पति ने मेरे लिए ऐसा माहौल तैयार किया. मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा भी बड़ा होकर महिलाओं की इज़्ज़त करे और मेरे परिवार में औरतों की आज़ादी की परंपरा कायम रहे. हमारे समाज की यह सबसे बड़ी ज़रूरत है."
'पढ़ाई से ही एक सुलझी हुई बच्ची'
नाज़िया की मां बुशरा नसीम ने बीबीसी को बताया कि, "बचपन में नाज़िया पढ़ाई में असाधारण तो नहीं थीं लेकिन जो एक बार पढ़ लिया, वह हमेशा याद रखती थीं. वे तहज़ीबदार और शांत लड़की थीं और अपने तीन भाई-बहनों में सबसे सुलझी हुई थीं."
"भाई-बहनों के झगड़ों की कई बातें नाज़िया खुद ही सुलझा लेतीं. इसकी भनक घरवालों को बाद में लगती. तभी लग गया था कि आगे चलकर यह हमारा नाम रौशन करेगी. आज हम खुश हैं और इसकी वजह मेरी बेटी है."
नाज़िया के अब्बू (पिता) मोहम्मद नसीमुद्दीन स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (सेल) से रिटायर हो चुके हैं.
उन्होंने कहा, "मैंने अपने बेटे-बेटियों में कोई फ़र्क नहीं किया. सबलोग एक साथ एक ही स्कूल में पढ़े. इस कारण आज सब अपनी ज़िंदगी में व्यवस्थित हैं. किसी मां-बाप को इससे अधिक और क्या चाहिए, मुझे भरोसा है कि नाज़िया की ज़िंदगी में अभी खुशी के और मुक़ाम आएंगे. केबीसी तो सिर्फ़ एक पड़ाव है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














